12 मार्च को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का एक वीडियो सामने आया। इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई कि नेतन्याहू की 6 उंगलियां हैं। यह दावा किया गया कि अगर नेतन्याहू की छह उंगलियां हैं तो यह वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनाया गया है और अगर वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनाया गया है तो उनकी मौत हो चुकी है।
Snopes और PolitiFact ने तुरंत इस दावे का खंडन किया और इस बात को साबित किया कि जो छठी उंगली जैसी दिख रही है वह केवल एक ऑप्टिकल भ्रम है और ऐसा उंगली के नीचे हथेली के उभरे हुए हिस्से की वजह से हुआ।
इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के एआई चैटबॉट Grok ने इसमें दखल दिया। उसने यूजर्स से कहा कि यह फुटेज एआई के द्वारा बनाई गई है। Grok के दावे के बाद नेतन्याहू की टीम ने अपने नेता के जिंदा होने के कई सबूत सामने रखे लेकिन इन्हें लेकर तमाम शक पैदा हो गए। Grok और लोगों के एक वर्ग ने इन नए वीडियो को भी डीपफेक बताया।
नेतन्याहू के ये वीडियो ऐसे वक्त में सामने आए, जब अमेरिका-इजरायल की ईरान से जंग चल रही है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में ऐसे टूल आम लोगों के भी पास हैं जिनसे असली दिखने वाले वीडियो, इमेज और ऑडियो बनाए जा सकते हैं। ऐसे में युद्ध से जुड़ा हुआ कोई भी वीडियो चाहे वह मिसाइल हमलों का हो, लोगों के मारे जाने का हो या बंधक बनाए जाने का, इसे लेकर शक पैदा होता है।
मानवाधिकार संगठन WITNESS के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सैम ग्रेगरी BOOM से कहते हैं कि इस युद्ध के दौरान इस शक का इस्तेमाल हथियार के तौर पर किया गया है। उन्होंने कहा कि इस युद्ध में शामिल हर पक्ष एआई का इस्तेमाल करने के आरोप लगा रहा है, असली चीजों को एआई से बनाया हुआ बता रहा है और अपनी सुविधा के अनुसार असली चीजों का बचाव कर रहा है।
सताफ कैफे से आया नेतन्याहू का वीडियो
नेतन्याहू की 6 उंगलियां और मौत होने के जवाब में उनकी टीम ने येरूशलम के सताफ कैफे से प्रधानमंत्री का वीडियो जारी किया। इस वीडियो में नेतन्याहू ने कॉफी ऑर्डर की और अपनी मौत की अफवाहों को हवा में उड़ा दिया। उन्होंने कैमरे के सामने अपने हाथ दिखाए और साबित किया कि उनकी पांच ही उंगलियां हैं लेकिन Grok और अफवाहों ने लोगों के बीच में यह बात पहुंचा दी थी कि यह वीडियो नकली है।
जब लोगों को बताया गया कि उनका यह दावा करना जैसे नेतन्याहू की 6 उंगलियां हैं गलत है तो उन्होंने अपने अपने बाकी दावों के बारे में नहीं सोचा। इस बार फिर से Grok ने दखल दिया और उसने कैफे में बनाए गए नेतन्याहू के वीडियो को डीपफेक बता दिया। इससे लोगों का शक और ज्यादा मजबूत हो गया।
वीडियो में गड़बड़ी के सबूत नहीं मिले
BOOM की ओर से जब इस वीडियो को डीपफेक्स रैपिड रिस्पांस फोर्स को भेजा गया तो वहां तीन विशेषज्ञ टीमों ने इसकी गहन जांच की और तीनों ने जो बताया वह लगभग एक जैसा था। उन्होंने बताया कि वीडियो में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से गड़बड़ी किए जाने के सबूत नहीं मिले। यह भी सामने आया कि वीडियो में दिख रहे शख्स का व्यवहार स्वाभाविक था और उसके चेहरे और आंखों के हाव-भाव भी बिल्कुल सामान्य थे।
जब इस तरह की बातें चलती रही तो नेतन्याहू ने एक और वीडियो पोस्ट किया। इस बार वह लोगों के बीच में मौजूद थे और उन्होंने अपने दिन भर के कामकाज को दिखाया लेकिन यह शक अभी भी नहीं रुका। शक इस बात को लेकर शुरू हुआ कि नेतन्याहू की उंगली में पहनी हुई अंगूठी कुछ फ्रेम में दिखाई दे रही थी जबकि कुछ में वह गायब थी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के क्राउडसोर्स्ड कम्युनिटी नोट्स ने इस वीडियो को नकली बताया और कई लोगों ने कहा कि यह वीडियो एआई जेनरेटेड है।
मजबूत होता गया शक
इस तरह बेंजामिन नेतन्याहू को अपने जिंदा होने का सबूत देने के लिए तीन अलग-अलग वीडियो जारी करने पड़े लेकिन हर बार जांच-पड़ताल हुई और इन वीडियो के डीपफेक होने के आरोप बढ़ते गए। Grok और Community Notes ने हर बार इस शक को और मजबूत किया।
सवाल इस बात का नहीं है कि बेंजामिन नेतन्याहू जिंदा है या नहीं। सवाल इस बात का है कि युद्ध अपराधों का दस्तावेजीकरण, आम लोगों को नुकसान का आकलन और स्वतंत्र जांच को बिना किसी ठोस प्रमाण के चुनौती दी जा सकती है।
ग्रेगरी बताते हैं कि WITNESS की डीपफेक्स रैपिड रिस्पांस फोर्स के जरिए मानवाधिकार समूह अब किसी संघर्ष के दस्तावेज को पहले ही सत्यापित कर रहे हैं क्योंकि वे जानते हैं कि किसी सबूत को एआई से बनाया हुआ बताकर खारिज किया जा सकता है।
