इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर के गाजा को लेकर दिए गए बयान से विवाद खड़ा हो गया है। बेन-ग्विर ने गाजा में हर रात 30 से 40 लोगों को मारने की वकालत की है। उनका यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब इजरायल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा के लिए प्रस्तावित 15 सूत्री योजना को खारिज कर दिया है।

इजरायली मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने कहा कि वह पूरे गाजा को इजरायल का हिस्सा मानते हैं। उन्होंने गाजा में बस्तियां बसाने और वहां से अधिक से अधिक लोगों को दूसरे देशों में भेजने की बात कही। उन्होंने आतंकवादियों के लिए किसी तरह के पुनर्वास की संभावना से इनकार करते हुए उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की वकालत की।

‘हर रात 30 से 40 लोगों को निशाना बनाया जाए’

बेन-ग्विर ने कहा कि गाजा में लक्षित हत्याएं की जानी चाहिए और हर रात 30 से 40 लोगों को निशाना बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कार्रवाई केवल उन लोगों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, जो तत्काल खतरा पैदा करते हैं। उनके बयान के अनुसार, गाजा में कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्हें उन्होंने ‘जीने के लायक नहीं’ बताया। उनके इस बयान की फिलिस्तीनी मीडिया और अन्य पक्षों ने कड़ी आलोचना की है।

पूर्व बंधक के पॉडकास्ट में दिया बयान

बेन-ग्विर ने ये टिप्पणियां रोम ब्रास्लाव्स्की के पॉडकास्ट पर बातचीत के दौरान कीं। ब्रास्लाव्स्की को हमास ने बंधक बनाया था और बाद में वह रिहा हुए। बातचीत में दोनों ने 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले के बाद इजरायल की स्थिति और गाजा में सैन्य कार्रवाई पर चर्चा की।

उन्होंने कहा, “मैं पूरे गाजा को अपना मानता हूं। सिर्फ गुश कातिफ में ही नहीं, बल्कि पूरे गाजा में बस्तियां बसाना, ज्यादा से ज्यादा लोगों को वहां से जाने के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें उनके देशों में भेजना; और जहां तक आतंकवादियों की बात है, तो उनके लिए कोई पलायन या कुछ और नहीं, बल्कि उन्हें एक-एक करके मार डालना ही एकमात्र रास्ता है।”

एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, बेन-ग्विर ने गाजा में इजरायल की हालिया कम होती सैन्य कार्रवाई पर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से इस मुद्दे पर असहमत हैं और गाजा में हर रात 30 से 40 लोगों को निशाना बनाकर मारने की कार्रवाई की जानी चाहिए।

पहले भी विवादों में रहे हैं बेन-ग्विर

बेन-ग्विर और इजरायल के अन्य अधिकारियों की ओर से गाजा को लेकर दिए गए इसी तरह के बयानों की पहले भी आलोचना होती रही है। ऐसे बयानों को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में इजरायल के खिलाफ नरसंहार की मंशा के आरोपों से जुड़े साक्ष्य के तौर पर भी पेश किया गया है। हालांकि, इजरायल ने लगातार इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि उसने गाजा में नरसंहार नहीं किया है।

7 अक्टूबर के हमले के बाद शुरू हुआ युद्ध

7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर बड़ा हमला किया था। इस हमले में करीब 1,200 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 251 लोगों को बंधक बना लिया गया था। इसके बाद इजरायल और हमास के बीच युद्ध शुरू हुआ, जिसका असर गाजा के अलावा क्षेत्र के अन्य हिस्सों पर भी पड़ा।

युद्धविराम के बावजूद जारी हैं हमले

अमेरिका की मध्यस्थता से पिछले साल अक्टूबर में युद्धविराम समझौता लागू होने के बाद भी गाजा में हिंसा पूरी तरह नहीं रुकी। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, युद्धविराम लागू होने के बाद से 1,250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इजरायल और हमास के बीच संघर्ष के कारण गाजा में मानवीय संकट लगातार गंभीर बना हुआ है।

नेतन्याहू ने ट्रंप की 15 सूत्री योजना ठुकराई

गाजा को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 15 सूत्री योजना पर भी इजरायल ने असहमति जताई है। ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस ने जुलाई में दावा किया था कि हमास और गाजा में सक्रिय अन्य सशस्त्र समूहों के पूर्ण निरस्त्रीकरण को लेकर समझौता हुआ है। हालांकि, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट रूप से कहा कि इजरायल 15 सूत्री दस्तावेज को स्वीकार नहीं करता।

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलमार्ग को लेकर अब अपने सहयोगी देश ओमान को भी धमकी दे दी है। उन्होंने कहा कि होर्मुज में ईरानी जहाजों की अमेरिकी नाकेबंदी में अगर ईरान का पड़ोसी देश ओमान भी बाधा डालता है तो हम उस पर जबरदस्त बम गिराएंगे। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।