चीन ने ईरान को सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइलें बेचने के सौदे से इनकार किया है। चीन ने सोमवार को उन खबरों का खंडन किया जिसमें कहा गया है कि उसने अमेरिका और इजराइल के आक्रमण से पहले ईरान को CM 302 सुपरसोनिक एंटीशिप मिसाइल बेचने के किसी सौदे को अंतिम रूप दिया है।

मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर ये मिसाइल सौंप दी जातीं तो ये उन सबसे उन्नत सैन्य उपकरणों में से होतीं जो हाल के वर्षों में चीन द्वारा ईरान को हस्तांतरित किए गए हैं। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि इस सौदे की रिपोर्ट भ्रामक है। उन्होंने कहा, ”यह रिपोर्ट सच नहीं है। एक जिम्मेदार बड़ी शक्ति के रूप में, चीन हमेशा अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करता है। चीन दुर्भावनापूर्ण संगति और भ्रामक सूचनाओं के प्रसार का विरोध करता है और आशा करता है कि संबंधित पक्ष ऐसा कदम उठायेंगे जो तनावपूर्ण स्थिति के सुधार में सहायक हो।”

अमेरिका ने युद्धपोतों को ईरान के जल क्षेत्र के पास खाड़ी में तैनात किया

यह रिपोर्ट काफी मायने रखती है क्योंकि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ मौजूदा सैन्य अभियान को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी युद्धपोतों को ईरान के जल क्षेत्र के पास खाड़ी में तैनात किया है। इन युद्धपोतों में लड़ाकू विमान वाहक पोत भी शामिल हैं। चीनी आधिकारिक मीडिया ने सोमवार को खबर दी कि अमेरिकी विमान ईरान की मिसाइल से टकराने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गए थे। हालांकि यह जानकारी नहीं है कि ये मिसाइल कहां निर्मित थे।

ईरान चीन के सबसे बड़े तेल आपूर्तिकर्ताओं में से एक है और बीजिंग के साथ उसके घनिष्ठ रक्षा तथा सामरिक संबंध हैं। अमेरिका द्वारा अपने करीबी सहयोगी, वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो, उनकी पत्नी की गिरफ्तारी और ईरानी नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या की घटनाओं पर चीन ने सधी प्रतिक्रिया दी है।

डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 31 मार्च को चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं। जब पूछा गया कि क्या ट्रंप पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद अपनी यात्रा जारी रखेंगे तो प्रवक्ता ने कहा कि चीन और अमेरिका के बीच दोनों राष्ट्राध्यक्षों की मुलाकात को लेकर संवाद जारी है। एक ईरानी पत्रकार के इस प्रश्न पर कि चीन कैसे अमेरिका को संप्रभु देशों के नेताओं की हत्या जैसी एकतरफा कार्रवाई करने से रोकने में भूमिका निभा सकता है, माओ ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बल के प्रयोग या अन्य देशों की संप्रभुता और सुरक्षा के उल्लंघन के प्रति चीन के कड़े विरोध को दोहराया।

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