ईरान पर अमेरिका-इजरायल युद्ध का आज तीसरा दिन है। पेंटागन ने कुवैत में तीन अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि की है और राष्ट्रपति ट्रंप ने लक्ष्य हासिल होने तक अभियान जारी रखने का संकल्प लिया है। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और 40 शीर्ष अधिकारी मारे गए हैं। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और खाड़ी में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। अमेरिकी सेना ने ईरान के अंदर 1000 से अधिक ठिकानों पर हमले किए। इस सबके बीच ईरान से भारत के लिए फ्लाइट्स बंद होने से वहां फंसे भारतीय परेशान हैं।
लगभग दस मिलियन भारतीयों के लिए, जिनका जीवन पश्चिम एशिया से जुड़ा हुआ है, अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले और खाड़ी क्षेत्र में फैली जवाबी कार्रवाई उनके सबसे बुरे सपने के सच होने जैसा है। चारों तरफ आसमान में धुएं के गुबार उठ रहे हैं, मोबाइल फोन अलर्ट और घर से आ रहे चिंता भरे मैसेज से फुल हैं।
यात्री खाड़ी क्षेत्र के हवाई अड्डों पर फंसे हुए
कई यात्री बीच में खाड़ी क्षेत्र के हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं और संघर्ष के बादल छंटने का इंतजार कर रहे हैं। भारत में उनके परिवार और दोस्त बेसब्री से उम्मीद कर रहे हैं कि उनके प्रियजन सुरक्षित रहें। सभी की निगाहें टेलीविजन और फोन की स्क्रीन पर टिकी हुई हैं। उन सभी के लिए, यह युद्ध राजनीति और रणनीति से कहीं अधिक है, यह व्यक्तिगत मामला है।
ईरान द्वारा क्षेत्र के होटलों और हवाई अड्डों को निशाना बनाकर किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण दुबई, अबू धाबी और दोहा जैसे प्रमुख हवाई अड्डों को बंद करना पड़ा, 1000 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।
फंसे भारतीयों के परिवार परेशान
कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के लैला की रहने वाली 56 वर्षीय आसिया ने कहा, “जब मुझे हमलों के बारे में पता चला तो मैंने तुरंत वहां मौजूद अपने दोनों बच्चों के लिए प्रार्थना करना शुरू कर दिया। जब उन्होंने फोन करके बताया कि वे सुरक्षित हैं, तभी मैंने चैन की सांस ली।” उनके दोनों बेटे अबू धाबी और बहरीन में रहते हैं।
जालंधर के मूल निवासी और दुबई में रहने वाले उद्योगपति और समाजसेवी एसपी सिंह ओबेरॉय ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “हमला भीषण है। दुबई से आसमान में ड्रोन और मिसाइलें साफ तौर पर देखी जा सकती हैं। काफी मलबा भी गिर रहा है, जिससे यहां भी कुछ नुकसान हुआ है।” ओबेरॉय के अनुसार, यूएई सरकार ने निवासियों को अत्यंत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी है। उन्होंने कहा, “उड़ानों में व्यवधान के कारण भारत और अन्य देशों के हजारों यात्री अबू धाबी, दुबई और शारजाह हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं।”
अबू धाबी में मोहम्मद आदम और अकबर अली उस भयानक मंजर को याद करते हैं जब मिसाइल हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजे। उन्होंने बताया, “हमें डर था कि रिहायशी इमारतों को निशाना बनाया जा सकता है, इसलिए हम अपने घरों के अंदर भाग गए। अभी तक सिर्फ अमेरिकी ठिकानों पर ही हमले हुए हैं। शहर पर कोई हमला नहीं हुआ है, हालांकि मिसाइलों को रोके जाने के दौरान हुए जोरदार धमाकों की वजह से वह रात काफी मुश्किल भरी रही।”
पश्चिम एशिया में भारतीय प्रवासी सबसे बड़ी आबादी में से एक
पश्चिम एशिया में भारतीय प्रवासी सबसे बड़ी आबादी में से एक हैं, जिनमें अकेले खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) देशों में 2024 तक नौ मिलियन से अधिक निवासी हैं जो मुख्य रूप से संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब में केंद्रित हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में हजारों छात्रों के अलावा, इजरायल में एक लाख से अधिक भारतीय और ईरान में एक लाख से अधिक भारतीय हैं। संयुक्त अरब अमीरात में भारतीय सबसे अधिक रहते हैं जो वहां की जनसंख्या का लगभग 35 प्रतिशत हैं।
भारत से आने वाले पर्यटकों में खाड़ी देशों का दबदबा बना हुआ है। 2025 में, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में लगभग 86 लाख, सऊदी अरब में 34 लाख और कतर में 11 लाख भारतीय पर्यटक आए थे।
