अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद पश्चिम एशिया में हालात फिर भड़क उठे। इजरायल ने लेबनान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला कर यह साफ संकेत दे दिया कि वह इस समझौते को पूरी तरह मानने के मूड में नहीं है। एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच शांति की बात हो रही है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत में बमबारी जारी है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और अनिश्चितता और गहरा गई है। ईरान ने इस पर कड़ा एतराज जताया है। इस पूरे मामले को सरल भाषा में इन तथ्यों से समझ सकते हैं।
- अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद इजरायल ने लेबनान पर बड़ा हमला किया। इजरायली सेना के मुताबिक यह अब तक का सबसे बड़ा प्लान्ड अटैक था।
- सिर्फ 10 मिनट में 100 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया गया। हमले में करीब 250 लोगों की मौत की खबर है। इस कार्रवाई से सीजफायर लगभग टूटता नजर आया।
- रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने फिर से होर्मुज जलमार्ग बंद कर दिया। अमेरिका ने स्पष्ट किया कि लेबनान में ऑपरेशन रोकना सीजफायर का हिस्सा नहीं था।
- इस सीजफायर में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 8 अप्रैल को व्यापक सीजफायर की घोषणा की थी।
- इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा – सीजफायर का समर्थन है, लेकिन लेबनान में हमले जारी रहेंगे।
- ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अब जिम्मेदारी अमेरिका पर है। विश्लेषकों के अनुसार यह सीजफायर नेतन्याहू के लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदायक है।
- इजरायल अपने तीन बड़े लक्ष्य – ईरान का परमाणु कार्यक्रम रोकना, मिसाइल क्षमता घटाना और सरकार को कमजोर करना — पूरी तरह हासिल नहीं कर पाया।
- इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष पुराना है, 1982 और 2006 में भी बड़े युद्ध हो चुके हैं। अब तक 1000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और करीब 10 लाख लोग विस्थापित हुए हैं, जबकि यूरोपीय देशों ने हालात को ‘दूसरे गाजा’ बनने की चेतावनी दी है।
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अमेरिका और ईरान के बीच में दो हफ्ते का सीजफायर हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसका ऐलान किया है। ईरान ने भी इस युद्ध को समाप्त करने के लिए 10 शर्तें रखी हैं। इसमें राहत की मांग से लेकर यूएन से कुछ खास अपील की गई हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक

