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आइएस की गुलाम रही यजीदी महिलाओं के इलाज की पहल

जर्मनी में ऐसी 11 सौ महिलाओं को शारीरिक और मानसिक उपचार की परियोजना चलाई गई है जिसके खिजिलान प्रमुख हैं।

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संयुक्त राष्ट्र ने यजीदी अल्पसंख्यकों पर आइएस हमले को संभावित नरसंहार करार दिया है।

इसलामिक स्टेट के जेहादियों ने एक हजार से ज्यादा यजीदी महिलाओं और लड़कियों पर अत्याचार किए, जिनकी कहानियां अब बाहर आ रही हैं। जेहादियों ने एक आठ साल की लड़की को कई बार बेचा। उसके साथ बलात्कार किया गया। हालात इतने बदतर हो गए थे कि एक लड़की ने तो इससे बचने के लिए खुद को बदसूरत बनाने तक की कोशिश भी की। जर्मन डॉक्टर जेआइ खिजिलान ने इराक में आइएस द्वारा गुलाम बनाकर रखी गईं जिन 1400 से अधिक यजीदी महिलाओं और लड़कियों की कहानियां सुनी हैं, उसमें से ये केवल दो लड़कियों की कहानियां हैं। जिनेवा में एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि इन महिलाओं और लड़कियों ने नरक जैसे हालात का सामना किया है।

जर्मनी में ऐसी 11 सौ महिलाओं को शारीरिक और मानसिक उपचार की परियोजना चलाई गई है जिसके खिजिलान प्रमुख हैं।जर्मन राज्य बाडेन वुर्टेमबर्ग द्वारा चलायी जा रही इस परियोजना के तहत पिछले वर्ष अप्रैल से इस महीने की शुरुआत तक उत्तरी इराक से पीड़ित महिलाओं और लड़कियों को जर्मनी लाया गया। 2014 में बाडेन वुर्टेमबर्ग में इस कार्रवाई का निर्णय लिया गया था।इस समय आइएस जेहादी यजीदी लोगों का नरसंहार और हजारों को भागने पर मजबूर करते हुए धीरे-धीरे उत्तरी इराक की तरफ बढ़ रहे हैं। इस दौरान वे हजारों लड़कियों और महिलाओं का अपहरण करके उनको यौन गुलामी के लिए मजबूर कर रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र ने यजीदी अल्पसंख्यकों पर आइएस हमले को संभावित नरसंहार करार दिया है। खिजिलान ने इसे आपात स्थिति बताते हुए अन्य राष्ट्रों और राज्यों से बाडेन वुर्टेमबर्ग का अनुसरण करने का आह्वान किया है। दक्षिण-पश्चिमी जर्मन राज्य ने इस परियोजना के लिए 9.5 करोड़ यूरो का बजट आवंटित किया है। खिजिलान और उनकी टीम को यह तय करना है कि किस पीड़िता को इस योजना के तहत सबसे अधिक लाभ मिले। डॉक्टर ने कहा कि आइएस की गुलामी में रहीं ऐसी 1200 और यजीदी महिलाओं एवं लड़कियों का उपचार किसी दूसरे स्थान पर किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि आइएस से भागने में सफल रही महिलाएं वापस उत्तरी इराक के बेहद रूढ़िवादी समुदायों में पहुंची हैं, जहां मनोवैज्ञानिक मदद की नाममात्र की सुविधा है जिनेवा में मानवाधिकार रक्षकों के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से इतर उन्होंने कहा, ‘इन महिलाओं को वास्तव में विशेषज्ञ उपचार की जरूरत है। अगर हम इनकी मदद नहीं करेंगे तो कौन करेगा?’उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के तहत जो लड़कियां और महिलाएं लाई गईं हैं उनमें अधिकतर 16 से 20 वर्ष के बीच की हैं। उन्होंने साथ ही कहा कि सबसे अधिक उम्र की महिला 40 वर्ष की है और सबसे कम उम्र की लड़की आठ वर्ष की है।

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