पाकिस्तान के प्राचीन तक्षशिला पुरातात्विक परिसर में किए जा रहे कुछ पुनर्निर्माण कार्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक संस्था यूनेस्को (UNESCO) ने पाकिस्तान सरकार को चेतावनी दी है। यूनेस्को ने साफ कहा है कि उसे उन संरक्षण कार्यों को वापस लेना होगा जिनकी वजह से इस ऐतिहासिक स्थल की मूल पहचान और स्वरूप प्रभावित हो सकता है।

जानकारी के लिए बता दें कि तक्षशिला यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है और दक्षिण एशिया के सबसे महत्वपूर्ण प्राचीन बौद्ध महाविहार परिसरों में से एक माना जाता है।

‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनेस्को ने हाल ही में पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारियों को चेतावनी दी है। यूनेस्को का कहना है कि अगर मोहरा मोराडू और सिरकप में किए गए “अनावश्यक हस्तक्षेप” को वापस नहीं लिया गया तो तक्षशिला को ‘डेंजर लिस्ट’ में डाल दिया जाएगा। यूनेस्को ने यह भी कहा कि अगर पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो तक्षशिला को विश्व धरोहर सूची से भी बाहर किया जा सकता है। इससे पहले जर्मनी के एक विश्व धरोहर स्थल को भी इस सूची से हटाया जा चुका है।

जानकारी के लिए बता दें कि तक्षशिला पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के रावलपिंडी जिले में स्थित है। यहां मध्य पाषाण काल की एक गुफा, चार प्राचीन बस्तियों के अवशेष, बौद्ध मठ, एक मस्जिद और एक मदरसा मौजूद हैं। यूनेस्को की वेबसाइट के मुताबिक, तक्षशिला के चार प्राचीन नगर भारतीय उपमहाद्वीप में 500 से अधिक वर्षों के शहरी विकास की कहानी बताते हैं।

यूनेस्को का आरोप है कि तक्षशिला में किए जा रहे निर्माण कार्यों के दौरान पुरानी दीवारों की ऊंचाई बढ़ाई जा रही है। इससे ऐतिहासिक स्थल की मौलिकता और पहचान प्रभावित हो सकती है। इसी शिकायत के बाद 12 जून को यूनेस्को ने पाकिस्तान के पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के साथ तक्षशिला संग्रहालय का संयुक्त तकनीकी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पंजाब पुरातत्व विभाग ने अपने काम का बचाव करने की कोशिश जरूर की।

लेकिन यूनेस्को इस बात से नाराज दिखा कि मूल संरचना के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। बताया जा रहा है कि तक्षशिला में मौजूद पुराने पत्थर आकार में असमान हैं, जबकि नए निर्माण में इस्तेमाल की जा रही सामग्री ज्यादा चमकदार और एक जैसी दिखाई देती है।

सफाई देते हुए पंजाब पुरातत्व विभाग के महानिदेशक मलिक जहीर अब्बास ने कहा, “सिरकप और मोहरा मोराडू में जो काम चल रहा है, उसे पुनर्निर्माण नहीं कहा जा सकता।” उन्होंने कहा, “जो भी काम किया जा रहा है, वह अंतरराष्ट्रीय संरक्षण सिद्धांतों के अनुसार है। इसका उद्देश्य कमजोर हो चुकी पुरातात्विक संरचनाओं को स्थिर करना और उन्हें सुरक्षित रखना है, न कि उनकी मौलिक पहचान से छेड़छाड़ करना।”

ये भी पढ़ें- न्यूजीलैंड के दौरै पर अगले हफ्ते जाएंगे पीएम मोदी