ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति के दूत स्टीव विटकोफ से पूछा कि क्या वह कभी ऐसी बातचीत में शामिल हुए हैं, जिसमें किसी भी पल बमबारी होने का खतरा हो। ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि यह सवाल उन्होंने स्टीव विटकोफ से तब पूछा था जब वह और स्टीव विटकोफ यूरेनियम संवर्धन को लेकर बात कर रहे थे।
दोनों नेताओं के बीच पिछले साल हुई न्यूक्लियर मुद्दे को लेकर वार्ता रुक-रुककर हो रही थी, जो फरवरी में लड़ाई के दौरान भी जारी रहा था। हालांकि ईरान का कहना है कि इस संपर्क को औपचारिक बातचीत नहीं माना जा सकता।
ईरान वेनेजुएला की तरह घुटने नहीं टेकेगा- ईरानी विदेश मंत्री
एक रूसी न्यूज़ चैनल की ओर से शेयर किए गए ईरानी आउटलेट ‘मेहर न्यूज़’ के साथ एक इंटरव्यू में, अब्बास अरागची ने यह भी कहा कि ईरान वेनेजुएला की तरह घुटने नहीं टेकेगा उन्होंने दक्षिण अमेरिकी देश में सत्ता बदलने के लिए अमेरिका के सैन्य ऑपरेशन का जिक्र करते हुए यह बात कही।
अब्बास अरागची- स्टीव विटकॉफ ने कई बार की थी बातचीत
पिछले साल बातचीत शुरू होने के बाद से अब्बास अरागची- स्टीव विटकॉफ का संपर्क कई देशों की राजधानियों में हुए थे। पहला दौर 6 फरवरी को मस्कट में हुआ, जिसमें ओमान के मध्यस्थ दोनों प्रतिनिधिमंडलों के बीच आते-जाते रहे और दिन के अंत में आमने-सामने एक बैठक हुई। इसके बाद मस्कट और रोम में तीन और दौर हुए। पांचवां दौर यूरोप में तय किया गया था, और बाद में दोनों की मुलाकात जिनेवा में हुई। इसके बाद इजरायल-अमेरिका से ईरान का युद्ध शुरू हो गया।
अप्रैल में, अब्बास अराघची ने पाकिस्तानी अधिकारियों की मध्यस्थता में स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के साथ एक नियोजित बैठक के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद, मस्कट और मॉस्को की यात्रा की। इन औपचारिक दौरों के अलावा, दोनों ने सीधे टेक्स्ट मैसेज पर भी संपर्क बनाए रखा।
अब्बास अराघची के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब वे अमेरिका और देश के भीतर मौजूद कट्टरपंथियों, दोनों के दबाव का सामना कर रहे हैं। कट्टरपंथी अब्बास पर ईरान के मारे गए सुप्रीम लीडर के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाते हैं।
अमेरिका ने निकोलस मादुरो को पकड़ा था
अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान “वेनेजुएला नहीं है”, जहाँ अमेरिका “एक व्यक्ति” को पकड़कर बाकी लीडरशिप के झुकने की उम्मीद कर सकता है। 3 जनवरी को अमेरिका ने वेनेजुएला में एक ऑपरेशन चलाया था, जिसमें राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को राजधानी काराकस से पकड़ा गया और मुकदमे के लिए न्यूयॉर्क ले जाया गया। ईरान ने बार-बार इस घटना का हवाला देते हुए कहा है कि इसी तरह के दबाव में उसका राजनीतिक ढांचा नहीं ढहेगा।
ईरानी विदेश मंत्री का यह इंटरव्यू ऐसे समय में सामने आया है जब जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर समझौता बेअसर हो चुका है।
अमेरिका ने शुरू किया ईरानी पोर्टों की नाकाबंदी
ब्लूमबर्ग समाचार एजेंसी के अनुसार, अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी फिर से लागू कर दी है और ईरान ने होर्मुज जलमार्ग को बंद करने की घोषणा की है, हालांकि दोनों पक्षों ने कहा कि फरवरी और मार्च में संघर्ष के चरम पर होने की तुलना में हमले अब कम हो रहे।
अमेरिका ने लगातार आठ रातों तक ईरान पर हमले किए हैं। जॉर्डन में एक बेस पर ईरानी मिसाइल हमले में दो सैनिकों की मौत और एक के लापता होने के बाद अमेरिकी सेना में मरने वालों की संख्या 16 हो गई है।
ट्रंप ने दी धमकी
इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर ईरान ने शिपिंग के लिए होर्मुज जलमार्ग को फिर से नहीं खोला, तो तनाव और बढ़ जाएगा। हालांकि ईरान ने पूरे इलाके में और बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई करने की कसम खाई है।
अब्बास अराघची से कट्टरपंथी नाराज
देश के अंदर, अब्बास अराघची की स्थिति काफी कमजोर हो गई है। कुछ खबरों के मुताबिक, उन्हें पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के जुलूस से भागने पर मजबूर होना पड़ा। अली खामेनेई की मौत 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हमलों में हुई थी। शोक मनाने वाले लोग ईरानी विदेश मंत्री के खिलाफ “समझौता करने वाले” के नारे लगा रहे थे और उन पर पत्थर फेंक रहे थे।
कट्टरपंथी गुटों ने अब्बास अराघची, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेरी घालीबाफ और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन पर “सॉफ्ट तख्तापलट” करने का आरोप लगाया है। उन्होंने यह आरोप जून के समझौते पर हस्ताक्षर करने को लेकर लगाया है, जो नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के स्पष्ट समर्थन के बिना किया गया था। मोजतबा पद संभालने के बाद से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं और केवल लिखित बयानों के जरिए ही बातचीत करते हैं।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, मोहम्मद बाघेरी गालिबाफ ने सरकारी टीवी पर दिए भाषण में इस आरोप का खंडन किया। उन्होंने तर्क दिया कि बातचीत का मतलब “समझौता करना” नहीं है, बल्कि यह उनके बताए ‘प्रतिरोध की रणनीति’ का ही एक हिस्सा है।
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ईरान ने अपनी राजधानी में बड़े-बड़े बिलबोर्ड लगाए हैं, जिस पर ट्रंप और उनके परिवार के सदस्यों की फोटो और ताबूत में दिखाए गए हैं। साथ बिलबोर्ड पर लिखा गया है कि खून के बदले खून। ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर के बाद दोबारा युद्ध शुरू कर दिया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
