इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि दशकों से वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने की लड़ाई लड़ रहे हैं और इसे वह अपने जीवन का मिशन मानते हैं।
नेतन्याहू ने कहा, “मैंने अब तक इस मिशन को निभाया है और आगे भी निभाता रहूंगा। समझौता हो या ना हो, ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे। ना आज और ना ही कल। जब तक मैं इजरायल का प्रधानमंत्री हूं, ऐसा नहीं होने दूंगा।”
विपक्ष और गठबंधन सहयोगियों की आलोचना के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनी सरकार के कदमों का बचाव किया। उन्होंने कहा, “लोग मुझसे पूछते हैं कि हमने क्या हासिल किया है? और मैं उन्हें जवाब देता हूं कि हमने अपने ऊपर मंडरा रहे तत्काल विनाश के खतरे को टाल दिया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमने इजरायल राष्ट्र को पूर्ण विनाश के खतरे से बचाया है।”
इजरायली प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
नेतन्याहू के नेतृत्व पर इजरायल में उठे सवाल
नेतन्याहू के नेतृत्व पर निशाना साधते हुए इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री और प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदार नफ्ताली बेनेट ने पत्रकारों से कहा कि “नेतन्याहू सरकार का कार्यकाल देश के भीतर विभाजन और गृहयुद्ध जैसे माहौल के साथ शुरू हुआ, फिर 7 अक्टूबर के नरसंहार के दौर से गुजरा और अब ईरान के खिलाफ एक ऐतिहासिक विफलता के साथ समाप्त हो रहा है।”
इजरायल के लिए ‘सुरक्षा बहाल करने’ का वादा करते हुए नफ्ताली बेनेट ने कहा कि अगर वह सत्ता में होते तो वह लगभग हर चीज़ को अलग तरीके से संभालते। उन्होंने कहा कि कूटनीतिक स्तर पर भी वह अपनी उस साख का इस्तेमाल करते जो उन्हें ‘इजरायल के प्रति अब तक के सबसे सहानुभूतिपूर्ण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप’ के साथ हासिल थी और उसका इस्तेमाल केवल इजरायल के राष्ट्रीय हितों के लिए करते।
बेनेट का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब ईरान को लेकर हुई हालिया घटनाओं और सरकार की नीतियों को लेकर इजरायल में नेतन्याहू की आलोचना तेज हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ईरान के खिलाफ अपने घोषित उद्देश्यों को हासिल करने में नाकाम रही है।
वहीं, इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन गवीर ने कहा कि यह समझौता ‘इजरायल के लिए बाध्यकारी नहीं है।’ उनके अलावा कई अन्य नेताओं ने भी इस समझौते पर सवाल उठाए हैं।
ट्रंप के साथ कथित मतभेद पर नेतन्याहू
अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ कथित ‘मतभेद’ की अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए नेतन्याहू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “ऐसे समय आते हैं जब राष्ट्रपति ट्रंप और मैं हर मुद्दे पर एक जैसी राय नहीं रखते। इज़राइल के सुरक्षा हितों की समझदारी से रक्षा की जानी चाहिए।”
उन्होंने दक्षिणी लेबनान से सेना वापस बुलाने की संभावना को भी खारिज कर दिया। कई लोगों का मानना है कि यह मुद्दा प्रस्तावित समझौते में बाधा बन सकता है क्योंकि उस समझौते में शत्रुता की पूरी तरह समाप्ति का प्रावधान है।
नेतन्याहू ने कहा, “हमने इज़राइल राज्य के चारों ओर गहरे सुरक्षा क्षेत्र स्थापित किए हैं। हमने यह गाज़ा, लेबनान और सीरिया में किया है जहां हमने असद की सेना के सभी हथियारों को नष्ट कर दिया। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि हम अपने देश की रक्षा के लिए जितने समय तक आवश्यक होगा, इन सुरक्षा क्षेत्रों में बने रहेंगे।”
उन्होंने आगे कहा, “हमने आतंकवादी शासन के नेताओं का सफाया कर दिया, हमने आतंक के कारखानों को कुचल दिया।” उन्होंने यह भी जोड़ा, “आप सभी (इज़रायली नागरिक) मौत के भयानक खतरे में थे।”
इज़रायली नेता ने जोर देकर कहा, “हम लेबनान के सुरक्षा बफर ज़ोन में उतने समय तक बने रहेंगे जितने समय तक हमारे लिए आवश्यक होगा।”
‘ईरान को नहीं मिलेगी प्रतिबंधों से राहत’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस रवाना होने से पहले ईरान के साथ शांति समझौते के ड्राफ्ट पर सहमति की घोषणा की। इससे पश्चिम एशिया में करीब 107 दिनों से जारी युद्ध समाप्त हो जाएगा। ट्रंप ने G7 शिखर सम्मेलन में बोलते हुए चेतावनी दी कि ईरान को तब तक प्रतिबंधों में राहत नहीं मिलेगी जब तक वह वाशिंगटन के साथ हुए नए समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं कर लेता।
