पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, विशेषकर ईरान से जुड़े युद्ध के कारण ईंधन, समुद्र मार्ग से सामान की आवाजाही और खाद्य आपूर्ति बाधित हो रही है, जिससे अब दवाओं की उपलब्धता को लेकर भी चिंता बढ़ने लगी है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अल्प से मध्यम अवधि में आम दवाओं की उपलब्धता पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है, लेकिन लंबी अवधि में जोखिम बढ़ सकता है। आस्ट्रेलिया की दवा आपूर्ति प्रणाली को अल्पकालिक व्यवधानों से निपटने के लिए तैयार किया गया है। जुलाई 2023 से सरकार ने फार्मास्युटिकल बेनिफिट्स स्कीम (पीबीएस) के तहत आने वाली कई दवाओं के लिए न्यूनतम भंडारण अनिवार्य किया है। इसके तहत दवा कंपनियों को चार से छह महीने का भंडार देश के भीतर रखना होता है।

ऑस्ट्रेलिया में क्या चुनौती?

आस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय दवा नियामक संस्था थेरेप्यूटिक गुड्स एडमिनिस्ट्रेशन (टीजीए) इस दौरान आपूर्ति बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठा सकती है। दवाओं का भंडारण एक ही स्थान पर न होकर विभिन्न थोक विक्रेताओं और फार्मेसियों में फैला होता है, जिससे देशभर में उनकी उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। हालांकि यह सुरक्षा सभी दवाओं पर लागू नहीं होती। जो दवाएं पीबीएस सूची में शामिल नहीं हैं-जैसे नई दवाएं या निजी पर्चे पर मिलने वाली दवाएं-उनमें कमी का खतरा अधिक होता है।

इन दवाओं के लिए आमतौर पर कम भंडारण और सीमित आपूर्तिकर्ता होते हैं। आस्ट्रेलिया पहले से ही कुछ दवाओं की कमी का सामना कर रहा है। उदाहरण के लिए, ध्यान-अभाव अतिसक्रियता विकार की दवाएं और कुछ एंटीबायोटिक्स तथा हार्मोन थेरेपी की दवाएं वैश्विक मांग और उत्पादन बाधाओं के कारण प्रभावित हुई हैं।

दवा आपूर्ति की एक बड़ी चुनौती इसका वैश्विक निर्भरता होना है। आस्ट्रेलिया में उपयोग होने वाली 90 फीसद से अधिक दवाएं विदेशों से आती हैं। अमेरिका, यूरोप, भारत और चीन इसके प्रमुख स्रोत हैं। विशेष रूप से भारत और चीन कच्चे माल के प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बेहद संवेदनशील बन जाती है।

जानकार क्या बता रहे?

विशेषज्ञों के अनुसार, दवा आपूर्ति प्रणाली एक नेटवर्क की तरह होती है, जिसमें कई कड़ियां जुड़ी होती हैं। यदि इनमें से एक या अधिक कड़ियां-जैसे उत्पादन, परिवहन या कच्चा माल-प्रभावित होती हैं, तो पूरे नेटवर्क पर असर पड़ सकता है। युद्ध के कारण समुद्र मार्ग से सामान की आवाजाही में देरी, हवाई परिवहन में बाधा और उत्पादन में कमी जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

फिलहाल, उपलब्ध भंडार स्थिति को संभालने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। लेकिन यदि यह व्यवधान छह महीने या उससे अधिक समय तक जारी रहता है, तो व्यापक स्तर पर दवाओं की कमी हो सकती है, खासकर उन दवाओं में जिनका उत्पादन सीमित है।

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