Iran War: इजरायल-अमेरिका की ईरान से जंग लंबी खिंच रही है। इसके चलते गल्फ देशों से होने वाली कच्चे तेल की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। दुनिया के कई देशों के जहाज होर्मुज स्ट्रेट से पहले अटके हुए हैं, क्योंकि ईरान ने इस जलडमरूमध्य को बाधित कर दिया है। भारतीय जहाजों को भी इस क्षेत्र में परेशानियां आ रही हैं, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के इस रूट का ईरान रणनीतिक तौर पर इस्तेमाल कर रहा है।
भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर कई बार ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची से फोन पर बातचीत कर चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से भी बातचीत की। इसके चलते ईरान धीरे-धीरे भारतीय झंडे वाले जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट पार करने की अनुमति दे रहा है। इस बीच एक बड़ा सवाल यह ही है कि आखिर होर्मुज स्ट्रेट से भारत पहुंचने में जहाजों को कितना समय लगता है?
कितना बड़ा क्षेत्र है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र की बात करें तो चौड़ाई 21-33 किलोमीटर है। ऐसे में जो तेल टैंकर और भारतीय जहाज इस मार्ग से गुजरते हैं, उनके लिए जंग या तनाव की स्थिति में जोखिम वाली है। यहां से गुजरकर भारत आने वाले जहाज कांडला और मुंबई आते हैं।
होर्मुज स्ट्रेट से भारत आने कितना लगता है समय?
जानकारी के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से भारत के पश्चिमी तट (गुजरात/कांडला) की समुद्री दूरी लगभग 1,000 से 1,550 किलोमीटर है। इस महत्वपूर्ण तेल मार्ग से गुजरात के कांडला बंदरगाह तक पहुंचने में जहाजों को लगभग 37 घंटे और मुंबई तक लगभग 53 घंटे लगते हैं।
बता दें कि यह क्षेत्र फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है। ऐसे में तेल टैंकर आम दिनों में इस क्षेत्र से भारत आने वाले जहाज 24-31 किलोमीटर प्रति घंटे की औसत रफ्तार से चलते हैं। इन्हें भारत आने से 2-3 दिन का समय लग सकता है।
भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद अहम
गौरतलब है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों (तेल और गैस) के लिए काफी हद तक इसी मार्ग पर निर्भर है। इसीलिए भारत के लिहाज से होर्मुज स्ट्रेट काफी अहम है। भारत सरकार कूटनीतिक चैनल्स के जरिए धीरे-धीरे अपने तेल टैंकर्स और एलपीजी के जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से निकलवा रही है। सरकार ने अपने तेल और एलएनजी टैंकरों की सुरक्षा के लिए नौसेना के युद्धपोत तैनात किए हैं, जो कि भारतीय जहाजों को एसकॉर्ट कर रहे हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच, शिवालिक और नंदा देवी सहित कुछ एलपीजी टैंकर भारतीय नौसेना के एस्कॉर्ट के साथ सफलतापूर्वक भारत पहुंच चुके हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, ‘जग लाडकी’ नामक एक और कच्चा तेल ले जा रहा जहाज भी भारत आ गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अभी भी भारत के 22 से 26 जहाज इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं।
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पिछले 13 दिन से यह एक नाम दुनियाभर की सुर्खियों में छाया हुआ है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से जुड़ी एक खबर आती है और कच्चे तेल की कीमतें ऊपर-नीचे हो जाती हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि आखिर यह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ है क्या? आंकड़ों में समझते हैं कि आखिर इस ग्लोबल कॉरिडोर को अगर ईरान ने बंद कर दिया तो क्या होगा? कच्चे तेल पर किस तरह असर पड़ेगा? पढ़िए पूरी खबर…
