ईरान-अमेरिका के बीच 4 महीने से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध के बीच यूएई ने होर्मुज जलमार्ग को बाईपास करने की योजना बनाई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात अपने पूर्वी तट पर एक नए गहरे पानी के बंदरगाह (Deepwater Port) की योजना बना रहा है जिससे होर्मुज जलमार्ग को बायपास किया जा सकेगा। साथ ही ईरान और अमेरिका के बीच महीनों से चल रहे संघर्ष के बीच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों में से एक पर निर्भरता कम हो जाएगी।
फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि दुबई स्थित डीपी वर्ल्ड की योजना फुजैराह में इस परियोजना को विकसित करने के साथ-साथ उसी अमीरात में मौजूदा बंदरगाह पर एक नया टर्मिनल बनाने की भी है। 2005 में स्थापित यह कंपनी कार्गो लॉजिस्टिक्स, पोर्ट टर्मिनल संचालन, समुद्री सेवाओं और फ्री ट्रेड क्षेत्रों में डील करती है। यह प्रतिवर्ष लगभग 7 करोड़ कंटेनरों का संचालन करती है।
माल ओमान की खाड़ी के रास्ते यूएई में प्रवेश कर सकेगा
अंतरिम युद्धविराम के बाद से जहाजों की आवाजाही में आंशिक रूप से सुधार हुआ है और औसतन प्रतिदिन लगभग 40 आवागमन हो रहे हैं फिर भी यह पहले की तुलना में काफी कम है। डीपी वर्ल्ड द्वारा प्रस्तावित पूर्वी तट विस्तार से माल ओमान की खाड़ी के रास्ते यूएई में प्रवेश कर सकेगा, जिससे होर्मुज जलमार्ग को छोड़कर इसे सड़क मार्ग से दुबई, अबू धाबी और पड़ोसी खाड़ी देशों तक पहुंचाया जाएगा।
नए बंदरगाह का निर्माण लगभग 18 महीनों में पूरा होने की उम्मीद
डीपी वर्ल्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि नए बंदरगाह का निर्माण लगभग 18 महीनों में पूरा होने की उम्मीद है और यूएई सरकार के साथ करार को अंतिम रूप दिया जा रहा है। परियोजना की फंडिंग और स्वामित्व पर अभी भी विचार-विमर्श चल रहा है। अधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि नई सुविधा प्रमुख बंदरगाह का स्थान लेने के बजाय उसकी पूरक होगी। उन्होंने कहा, “जेबेल अली, जेबेल अली ही रहेगा। इसका आकार कभी कम नहीं किया जाएगा।”
डीपी वर्ल्ड ने यूएई के पूर्वी तट पर स्थित बंदरगाहों पर निर्भरता बढ़ाई
डीपी वर्ल्ड ने प्रस्तावित पूर्वी तट परियोजना के विवरण की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है लेकिन उसने स्वीकार किया है कि बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों के जवाब में वह अपने परिचालन में विविधता लाने के तरीकों की तलाश कर रही है। कंपनी द्वारा नई सुविधाओं के विकास में करोड़ों डॉलर का निवेश करने की उम्मीद है जिसकी अंतिम राशि परिचालन आवश्यकताओं पर निर्भर करेगी। संघर्ष शुरू होने के बाद से, डीपी वर्ल्ड ने यूएई के पूर्वी तट पर स्थित बंदरगाहों पर अपनी निर्भरता बढ़ा दी है, और भीड़भाड़ वाले जेबेल अली टर्मिनल से माल को फुजैराह और खोर फक्कन की ओर मोड़ दिया है।
यह परियोजना अगर पूरी हो जाती है तो यह होर्मुज जलमार्ग पर निर्भरता को कम करने के साथ-साथ खाड़ी के अग्रणी लॉजिस्टिक्स और ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करने के यूएई के सबसे बड़े रणनीतिक कदमों में से एक होगी।
UAE पर ईरान के हमले
पश्चिमी एशिया में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जो अमेरिका का एक प्रमुख रणनीतिक सहयोगी है, उसे फरवरी के अंत में अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से लगातार ईरान के हमलों का सामना करना पड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने UAE पर लगभग 3000 ड्रोन और मिसाइलें दागी हैं। ऐसे ही एक हमले के दौरान दुबई के जेबेल अली बंदरगाह पर आग लग गई थी।
इस संघर्ष ने होर्मुज जलमार्ग से होकर होने वाले जहाजरानी संचालन को बुरी तरह से बाधित कर दिया है, जिससे पश्चिम एशिया के सबसे बड़े कंटेनर बंदरगाह जेबेल अली में परिचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, ईरान द्वारा जलमार्ग को बंद करने के बाद बंदरगाह पर गतिविधि में 90 प्रतिशत तक की गिरावट आई है, जिसके चलते डीपी वर्ल्ड को वैकल्पिक मार्गों और सुविधाओं की तलाश करनी पड़ी है। जेबेल अली लंबे समय से दुबई के कारोबार की रीढ़ रहा है और एशिया, अफ्रीका और यूरोप के साथ व्यापार को जोड़ने वाला एक प्रमुख केंद्र है। फारस की खाड़ी में स्थित होने के कारण यह होर्मुज जलमार्ग पर बहुत निर्भर है।
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भारत ने होर्मुज में भारतीय नाविकों पर हुए हमले को लेकर ईरान के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इस मामले में विदेश मंत्रालय (MEA) ने ईरान के मिशन उप प्रमुख (Deputy Chief of Mission) को तलब किया है। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
