इस्लामाबाद में आज अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को लेकर वार्ता होनी है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस निर्धारित शांति वार्ता में हिस्सा लेने के लिए शुक्रवार को पाकिस्तान रवाना हो गए। ईरानी प्रतिनिधिमंडल भी पाकिस्तान पहुंच चुका है। वहीं, अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे, उनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी होंगे। वहीं, ईरानी प्रतिनिधिमंडल में संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गलिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची भी हैं। वेंस के रवाना होने से पहले जॉइंट बेस एंड्रयूज (जेबीए) में बोलते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ईरानी सेना को सैन्य रूप से परास्त कर दिया गया है और चल रही वार्ताओं के परिणाम की परवाह किए बिना महत्वपूर्ण जलमार्ग को फिर से खोल दिया जाएगा।

शांति वार्ता में किन मुद्दों पर चर्चा होगी?

एक अहम मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम होगा। दोनों पक्षों के प्रस्तावों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ट्रंप ने ईरान के 10 सूत्रीय प्रस्ताव को व्यवहार्य आधार बताया। हालांकि, सरकारी मीडिया में प्रकाशित ईरानी मांगों में सभी प्रतिबंध हटाना और होर्मुज जलमार्ग पर ईरान के नियंत्रण को मान्यता देना शामिल है, ऐसी शर्तें जिन्हें अमेरिका शायद ही स्वीकार करेगा।

लेबनान पर असहमति

लेबनान को लेकर असहमति एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है। ईरान का कहना है कि युद्धविराम में उसका सहयोगी हिज़्बुल्लाह भी शामिल है जबकि अमेरिका और इजरायल का कहना है कि ऐसा नहीं है। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गलिबफ ने कहा कि लेबनान में युद्धविराम के बिना बातचीत आगे नहीं बढ़ सकती। वहीं, वेंस ने स्वीकार किया कि लेबनान को शामिल करने के बारे में गलतफहमी थी।

होर्मुज जलमार्ग पर क्या हैं शर्तें?

होर्मुज जलमार्ग का फिर से खुलना एक और महत्वपूर्ण मुद्दा है। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है। ईरान का कहना है कि होर्मुज पर अभी भी उसका पूरा कंट्रोल है और जलमार्ग से महज 15 जहाजों को गुजरने की अनुमति है जबकि ट्रंप ने गुजरने वाले जहाजों पर टोल वसूलने के किसी भी प्रयास के खिलाफ आगाह किया है।

वहीं, दूसरी ओर जेडी वेंस के रवाना होने से पहले जॉइंट बेस एंड्रयूज में बोलते हुए ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ईरानी सेना को सैन्य रूप से परास्त कर दिया गया है और चल रही वार्ताओं के परिणाम की परवाह किए बिना महत्वपूर्ण जलमार्ग को फिर से खोल दिया जाएगा। ट्रंप ने कहा, “खैर मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं। उनके सामने एक बड़ा मुद्दा है। मैं पता लगाऊंगा कि क्या चल रहा है। वे सैन्य रूप से पराजित हो चुके हैं और अब हम समझौते के साथ या बिना समझौते के होर्मुज जलमार्ग को खोलने जा रहे हैं। हम उस जलडमरूमध्य पर होंगे।”

अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे कहा, “मुझे लगता है कि यह काम बहुत जल्दी हो जाएगा और अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम इसे किसी न किसी तरह से पूरा कर लेंगे। सब ठीक चल रहा है। नौसेना जा चुकी है, वायुसेना जा चुकी है, नेता जा चुके हैं और पूरा इलाका खाली हो चुका है।

ईरान को अमेरिका पर भरोसा नहीं

इस्लामाबाद से बोलते हुए ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ने कहा कि तेहरान वार्ता के प्रति सद्भावना रखता है लेकिन उसे अमेरिका पर भरोसा नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि अगर वाशिंगटन एक वास्तविक समझौता पेश करता है और ईरान को उसके अधिकार देता है तो ईरान समझौता करने के लिए तैयार है। ईरानी मांगों पर व्हाइट हाउस की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई लेकिन ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि समझौते का एकमात्र कारण ईरानियों का जीवित रहना है।

जेडी वेंस ने तेहरान की दी चेतावनी

पश्चिम एशिया में संघर्ष को समाप्त करने के लिए इस्लामाबाद शनिवार को दोनों देशों के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शुक्रवार को ईरान के साथ वार्ता में भाग लेने के लिए इस्लामाबाद रवाना हुए हैं। पाकिस्तान के लिए रवाना होते समय जेडी वेंस ने एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात करते हुए ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें