ईरान और अमेरिका की शांति वार्ता विफल होने के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ अभियान उसके परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को रौंदने में कामयाब रहा और यह भी कहा कि “वे उनका (ईरान) गला दबा रहे हैं।”
आगे उन्होंने 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों से शुरू हुए युद्ध के बारे में बात करते हुए कहा, “इजरायल का अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन यह स्पष्ट है कि हमने ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं।”
बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा, “ईरान ने हमें गाजा में हमास, लेबनान में हिजबुल्लाह,सीरिया में असद शासन, इराक में मिलिशिया और यमन में हूती के जरिए घेरने का प्रयास किया। ईरान हमारा गला घोंटना चाहता था, लेकिन हम उसका गला घोंट रहे हैं। उन्होंने हमें विनाश की धमकी दी थी और अब वे अस्तित्व के लिए लड़ रहे हैं।”
इजरायल के प्रधानमंत्री की ये टिप्पणी ऐसे समय आई हैं जब अमेरिका और ईरान ने शनिवार को शांति वार्ता को लेकर बैठक की और जो बाद में बिना किसी नतीजे के खत्म हुई।
ईरान और अमेरिका की वार्ता बेनतीजा रही
रविवार सुबह अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच 21 घंटे बातचीत हुई लेकिन कोई प्रगति नहीं हुई। उन्होंने कहा कि यह बेहद बुरी खबर है, लेकिन यह अमेरिका से अधिक ईरान के लिए बुरी है। जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका सद्भभावना और नरमी के साथ बातचीत में शामिल हुआ लेकिन ईरान से यह स्पष्ट और सकारात्मक प्रतिबद्धता हासिल नहीं कर सके कि भविष्य में परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, जिसे उन्होंने अमेरिका की मुख्य मांग कहा।
‘अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने प्रगति रोका’
हालांकि ईरान ने शांति वार्ता की विफलता का कारण अमेरिका की अनुचित मांगों को बताया। ईरानी सरकारी मीडिया आईआरआईबी ने कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने कई मुद्दे रखे, लेकिन अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने प्रगति को रोक दिया। इस कारण वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई।
उधर इस वार्ता की मेजबानी कर रहे पाकिस्तान ने कहा कि दोनों पक्षों को सीजफायर समझौते का पालन करना चाहिए। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा, “पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच संवाद और सुगम बनाने में अपनी भूमिका निभाता रहा है और आने वाले दिनों में भी ऐसा करना जारी रखेगा।”
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इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयान पर तीखी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि इजरायल को ‘इंसानियत के लिए अभिशाप’ या ‘कैंसर जैसा देश’ कहना बिल्कुल गलत और आपत्तिजनक है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
