अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे सैन्य संघर्ष को 6 महीने से ऊपर का समय हो चुका है और इस सैन्य संघर्ष की वजह से ही मिडिल ईस्ट में तनाव अपने चरम पर है। इस बीच मध्य-पूर्व में एक और युद्ध की चिंगारी सुलग उठी है। दरअसल, मंगलवार को यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको के ठिकानों पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन हमलों में 70 से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी है। हूतियों के इस हमले के बाद मिडिल ईस्ट में एक और युद्ध भड़कने की संभावना है क्योंकि यह हमला सिर्फ सऊदी अरब पर नहीं बल्कि मक्का समझौते के सदस्य देशों जैसे पाकिस्तान और तुर्की के लिए एक चुनौती है।
मक्का समझौते के सदस्य दे सकते हैं जवाब
इस हमले के जवाब में अगर मक्का संयुक्त रक्षा समझौता के सदस्य संयुक्त रूप से कोई कार्रवाई करने की सोचते हैं तो फिर यह युद्ध बड़ा हो जाएगा। मक्का संयुक्त रक्षा समझौता 7 अगस्त को ही हुआ था और इस समझौते में सऊदी अरब के अलावा पाकिस्तान और तुर्की जैसे मुल्क भी हैं। जब यह समझौता हुआ था तो सदस्य देशों ने यह कहा था कि अगर इस समझौते के किसी भी सदस्य देश पर हमला होगा तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।
हूतियों के हमले को लेकर पाकिस्तान का रिएक्शन भी आया
सऊदी अरब की सरकारी तेल रिफाइनरी कंपनी पर हूतियों के हमले के बाद पाकिस्तान का रिएक्शन भी आ गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा है कि मैं इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं, जिसमें कई लोग घायल हुए हैं।
शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान दो पवित्र मस्जिदों के कस्टोडियन, हिज मैजेस्टी किंग सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद, हिज रॉयल हाइनेस क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और सऊदी अरब के भाईचारे वाले लोगों के साथ पूरी एकजुटता के साथ खड़ा है।
पाकिस्तान के पीएम ने आगे कहा कि ऐसे कायरतापूर्ण हमलों से बेगुनाह लोगों की जान के साथ-साथ इलाके की शांति और सुरक्षा को भी खतरा है। हम किंगडम की सॉवरेनिटी, सुरक्षा और इलाके की अखंडता के लिए अपने पक्के सपोर्ट को दोहराते हैं और सभी घायलों के जल्दी ठीक होने की प्रार्थना करते हैं।
ऐसे हमले आगे भी हो सकते हैं
हूतियों की ओर से कहा गया है कि सऊदी अरब के खिलाफ सैन्य कार्रवाई दोबारा तेज की गई है। इस संगठन के प्रवक्ता ने हमले की जानकारी देते हुए बताया कि यह बहुत बड़ा हमला था और ऐसे हमले आगे भी जारी रहने की संभावना है। हूतियों का सऊदी अरब पर हमला ऐसे समय में हुआ है जब यमन में लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष के बीच क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ रहा है। 2022 में लागू हुए सीजफायर के बाद दोनों पक्षों के बीच बड़े स्तर पर लड़ाई काफी हद तक थम गई थी, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने इस संघर्ष के दोबारा से हवा दे दी है।
आखिर हूतियों और सऊदी अरब के बीच क्या है विवाद?
हूतियों और सऊदी अरब के बीच संघर्ष की जड़ यमन के गृहयुद्ध से जुड़ी है। 2014 में हूतियों ने यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद सऊदी अरब के नेतृत्व में एक खाड़ी गठबंधन ने यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया।
2015 से सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन हूतियों के खिलाफ हवाई हमले करता रहा है। इस दौरान अमेरिका से मिलने वाली खुफिया जानकारी और सैन्य सहयोग ने भी गठबंधन की कार्रवाई में भूमिका निभाई। दूसरी ओर, हूतियों को ईरान का समर्थन मिलता रहा है। इस संघर्ष को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से अप्रैल 2022 में सीजफायर लागू हुआ था, लेकिन 2022 अक्टूबर में इस सीजफायर की औपचारिक अवधि समाप्त हो गई थी।
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