अमेरिका और इजरायल के ईरान से युद्ध की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अभी तक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हैं। यह संकरा मार्ग अभी तक पूरी तरह से खुल नहीं पाया है। समुद्री और व्यापार डेटा प्लेटफार्म द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक तेल टैंकरों सहित लगभग 90 जहाज ही होर्मुज पार कर चुके हैं।

इस समुद्री मार्ग से आम दिनों में औसतन सौ से ज्यादा जहाज निकलते है। समुद्री और व्यापार डेटा प्लेटफार्म के अनुसार, युद्ध के बाद अब यह आंकड़ा कम होकर पांच जहाज प्रतिदिन पर आ गया है। जिन जहाजों ने हाल में होर्मुज स्ट्रेट क्रॉस किया है, उनमें भारत और पाकिस्तान के जहाज भी शामिल हैं। दोनों ही देशों की सरकारें ईरान से लगातार संपर्क में हैं।

ईरान लाखों बैरल तेल कर रहा निर्यात

न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट में बताया गया है कि ऐसे हालातों में भी ईरान लाखों बैरल तेल का निर्यात कर रहा है। एपी ने ट्रेड डेटा और एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म केप्लर के हवाले से बताया कि ईरान मार्च की शुरुआत से अब तक 16 मिलियन बैरल से ज्यादा तेल का निर्यात करने में सफल रहा है। चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है।

एपी से बात करते हुए केप्लर की ट्रेड रिस्क एनालिस्ट एना सुबासिक ने कहा कि ईरान के तेल निर्यात की मात्रा में “लगातार मजबूती” बनी हुई है। कंसल्टिंग फर्म Reddal के क्लाइंट डायरेक्टर कुन काओ ने एपी को बताया कि ईरान ने न सिर्फ चोकपॉइंट पर कंट्रोल किया बल्कि अपना तेल बेचकर मुनाफा भी कमा रहा है।

होर्मुज से निकलने वाले जहाजों में 20% ईरान से जुड़े

ईरान द्वारा बाहर भेजा गया तेल समुद्री और व्यापार डेटा प्लेटफार्म पर आधारित है। Lloyd’s List Intelligence के अनुसार, एक से 14 मार्च के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से 89 जहाज गुजरे हैं। इनमें 16 तेल टैंकर हैं।

माना जा रहा है कि इन 89 जहाजों में से 20% ईरान से जुड़े हुए थे जबकि अन्य जहाज चीन और ग्रेस से संबंधित थे। रविवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से पाकिस्तान का एक टैंकर कच्चा तेल लेकर गुजरा, यह पाकिस्तान पहुंच चुका है। मंगलवार को भारत के दो जहाज (शिवालिक और नंदा देवी) भी गैस लेकर पहुंचे। इस समय इराक भी अपने टैंकर को निकलने देने के लिए ईरान से बातचीत कर रहा है। 

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