ईरान ने दावा किया कि उसने दो अमेरिकी लड़ाकू विमानों को मार गिराया है। हालांकि अमेरिका ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि दो एयरक्राफ्ट हादसे का शिकार हुए हैं और सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। अधिकारियों ने एसोसिएटेड प्रेस (AP) को बताया कि शुक्रवार को ईरान के ऊपर एक F-15E स्ट्राइक ईगल गिर गया। एक क्रू मेंबर को बचा लिया गया है, जबकि दूसरा लापता है।
फारस की खाड़ी में क्रैश हुआ दूसरा विमान
वहीं एक दूसरा एयरक्राफ्ट A-10 वॉर्थोग अटैक प्लेन भी लगभग उसी समय फारस की खाड़ी क्षेत्र में क्रैश हो गया। द न्यूयॉर्क टाइम्स द्वारा बताए गए अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार प्लेन होर्मुज स्ट्रेट के पास गिर गया और अकेले पायलट को सुरक्षित बचा लिया गया। अधिकारियों ने क्रैश के कारण की पुष्टि नहीं की है। सर्च ऑपरेशन जारी है।
अमेरिकी अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि दो सर्च ऑपरेशन जारी है। एक ऑपरेशन में F-15E के लापता क्रू मेंबर को खोजा जा रहा है जो दक्षिण-पश्चिमी ईरान में गिर गया था। दूसरा मामला होर्मुज स्ट्रेट के पास A-10 वॉर्थोग की घटना से जुड़ा है, जहां पायलट को पहले ही बरामद कर लिया गया है।
ईरान के निशाने पर कई अमेरिकी विमान
28 फरवरी 2026 को युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका के एयरक्राफ्ट कथित तौर पर कई मौकों पर निशाने पर आए हैं। हालांकि शुक्रवार की घटना में ईरान की फायरिंग में मानवयुक्त लड़ाकू जेट के नुकसान की पहली पुष्टि हुई है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ईरान के ऊपर एक F-15E स्ट्राइक ईगल को मार गिराया गया, जिसमें एक क्रू मेंबर को बचा लिया गया और दूसरा अभी भी लापता है, जबकि फारस की खाड़ी क्षेत्र में एक A-10 वॉर्थोग क्रैश हो गया और उसका पायलट सुरक्षित रूप से बरामद कर लिया गया।
CBS न्यूज़ के अनुसार लड़ाई में पहले अमेरिका के ईरान के ऊपर 16 MQ-9 रीपर ड्रोन और कुवैत में एक फ्रेंडली फायर घटना में तीन F-15 जेट मार गिराए गए थे। हालांकि इसमें किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि हालिया घटनाएं महत्वपूर्ण हैं क्योंकि अब तक ईरान की फायरिंग में कोई भी पायलट वाला अमेरिकी एयरक्राफ्ट नहीं गिरा था। व्हाइट हाउस ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इन घटनाओं के बारे में जानकारी दी गई है। उन्होंने अभी तक बचाव की कोशिशों पर पब्लिक में कोई कमेंट नहीं किया है।
यह घटना 20 साल से ज़्यादा समय में पहली बार है जब अमेरिकी मिलिट्री एयरक्राफ्ट दुश्मन की फायरिंग की चपेट में आए हैं। रिटायर्ड एयर फोर्स ब्रिगेडियर जनरल ह्यूस्टन कैंटवेल ने कहा कि ऐसे नुकसान बहुत कम हुए हैं क्योंकि अमेरिकी फोर्स ने ज़्यादातर लिमिटेड एयर डिफेंस सिस्टम वाले दुश्मनों का सामना किया है। AP द्वारा बताए गए एक्सपर्ट्स का कहना है कि विमान को गिराने में कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि लड़ाई शुरू होने के बाद से अमेरिकी फोर्स ने 13,000 से ज़्यादा मिशन उड़ाए हैं और 12,000 से ज़्यादा टारगेट पर हमला किया है।
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भारत में खरीदी गई 40 टन दवाइयों की एक बड़ी खेप ईरान नहीं पहुंच पा रही है। पिछले कई दिनों से यह दवाइयों की खेप नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के पास ही पड़ी हुई है। पढ़ें पूरी खबर
