अमेरिका और ईरान बीच तीन महीने से भी अधिक से जारी तनाव बीच रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्लामी गणराज्य की प्रस्ताव को नकार दिया। राष्ट्रपति के अनुसार यह से पूरी तरह से ‘स्वीकार नहीं करने लायक’ है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच मध्यस्थता में अहम भूमिका निभा रहे पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को भेजे गए ईरान के प्रस्ताव में युद्ध से हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग और होर्मुज जलडमरूमध्य पर इस्लामिक गणराज्य की संप्रभुता को मान्यता देने की बात कही गई है।

ईरान ने क्या मांगें रखीं?

तसनीम की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी शांतिवार्ता पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान ने तत्काल युद्ध बंद करने का आह्वान किया। साथ ही इस बात की गारंटी मांगी कि अब इस्लामी गणराज्य के खिलाफ कोई नया हमला नहीं किया जाएगा। IRIB की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने युद्ध से हुए नुकसान के लिए मुआवजे और होर्मुज जलडमरूमध्य पर इस्लामिक गणराज्य की संप्रभुता को मान्यता देने की मांग भी की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने अमेरिकी ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल से 30 दिनों के लिए ईरानी तेल बिक्री पर लगे प्रतिबंध हटाने और ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करने की मांग भी की है।

सूत्रों के हवाले से बताया गया कि ईरान की मांगों में “कुछ अमेरिकी प्रतिबद्धताओं के बदले होर्मुज जलडमरूमध्य का प्रबंधन ईरान के हाथ में देने” की बात भी शामिल है। हालांकि इन प्रतिबद्धताओं की जानकारी स्पष्ट नहीं की गई।

समाचार एजेंसी के अनुसार, ईरान के प्रस्ताव में सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने की मांग भी शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि संघर्ष खत्म होने के बाद आगे की शर्तों पर चर्चा के लिए 30 दिन की बातचीत अवधि का प्रस्ताव रखा गया है।

हिज्बुल्लाह समर्थित अल मयादीन की रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल तेहरान और वॉशिंगटन के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता से लिखित रूप में बातचीत जारी रहेगी। वहीं, द वॉल स्ट्रीट जरनल की रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने अमेरिका के 20 साल तक यूरेनियम संवर्धन रोकने के प्रस्ताव की तुलना में कम अवधि के लिए इसे स्थगित करने की इच्छा जताई है। लेकिन उसने अपने परमाणु ठिकानों को खत्म करने के किसी भी प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका के साथ संघर्ष को खत्म करने संबंधी अपने प्रस्ताव पर ईरान की प्रतिक्रिया को “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया है। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों पक्ष एक नाजुक युद्धविराम का पालन कर रहे हैं। ट्रूथ सोशल पर लिखे एक पोस्ट में उन्होंने कहा, “ईरान के तथाकथित प्रतिनिधियों द्वारा दी गई प्रतिक्रिया मैंने पढ़ी।”

इस बीच ईरान की सरकारी एजेंसी से जुड़े तसनीम न्यूज एजेंसी के हवाले से एक सूत्र ने ट्रंप द्वारा तेहरान की प्रतिक्रिया की आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि ईरानी अधिकारी वॉशिंगटन की मंजूरी हासिल करने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। तसनीम के मुताबिक सूत्र ने कहा, “ईरान में कोई भी योजना ट्रंप को खुश करने के लिए नहीं बनाई जाती” और अमेरिकी राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया “बिल्कुल भी मायने नहीं रखती।”

गौरतलब है कि लगातार हो रही घटनाओं से नाजुक युद्धविराम पर दबाव बना हुआ है और यह अब भी स्पष्ट नहीं है कि दोनों देशों के बीच शांति प्रस्तावों के इस नए आदान-प्रदान से होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा खुल पाएगा या नहीं।

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होर्मुज जलमार्ग में ईरान द्वारा बिछाई बारूदी सुरंगों की खोज और उन्हें निष्क्रिय करने में अमेरिका क्या ‘कामिकाजे डाल्फिन’ का इस्तेमाल कर रहा है? हाल ही में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से जब यह पूछा गया, तो वे चुप लगा गए और सिर्फ इतना बोल सके कि ‘न तो हम इसकी पुष्टि करेंगे और न ही इससे इनकार करेंगे कि हमारे पास कामिकाजे डाल्फिन हैं।’ होर्मुज में ईरान भी ‘कामिकाजे डाल्फिन’ का इस्तेमाल कर सकता है। इस मामले में ईरान का सैन्य सहयोगी रूस उसके साथ खड़ा है। पूरी खबर पढ़ें…