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मुस्लिम धर्मगुरु ने ईरान पर हमले के लिए अमेरिका को बताया जिम्‍मेदार, कहा- चलाता है आतंक का नेटवर्क

ईरान में दो जगहों पर आतंकियों ने हमला किया। दोनों हमलों की जिम्मेदारी इस्‍लामिक स्‍टेट ने ली है।

ran parliament attack, Khomeini shrine shooting, iran shooting, iran parliament shooting, world news, ईरान हमला, आईएस, इस्‍लामिक स्‍टेटदक्षिणी तेहरान की खुमैनी दरगाह, जहां आत्‍मघाती हमला हुआ। (AP Photo)

शिया धर्मगुरु व मजलिस-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना कल्बे जव्वाद नकवी ने ईरान की संसद और देश के पूर्व सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्लाह खोमैनी के मकबरे पर बुधवार को हुए हमले पर दुख जताया। उन्होंने कहा, “दुनिया में एकमात्र ईरान ऐसा इस्लामी देश है, जहां आतंकवादी हमलों पर सरकार का पूरा नियंत्रण था। लेकिन, अमेरिका और इजरायल की गुलामी करने वाले मुसलमान देशों के समर्थन के बाद अब ईरान को भी आतंकवाद की आग में जलाने की कोशिश हो रही है।” मौलाना ने कहा, “अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सऊदी अरब दौरे और इस्लामी देशों के साथ उनकी बातचीत का उद्देश्य ईरान के खिलाफ तथाकथित इस्लामी सरकारों को एकजुट करना था। ट्रंप के सऊदी अरब दौरे के बाद ईरान में आतंकवादी हमले का होना बताता है कि आतंकवाद का पूरा नेटवर्क अमेरिका, इजरायल और सऊदी अरब के सहयोग से चलता है।”

ईरान में दो जगहों पर आतंकियों ने हमला किया। दोनों हमलों की जिम्मेदारी इस्‍लामिक स्‍टेट ने ली है। इन हमलों में 12 लोगों की मौत और 39 से ज्‍यादा लोगों के मरने की खबर है। ईरानी संसद पर बुधवार को तीन बंदूकधारियों ने हमला किया। बिल्डिंग में प्रवेश करते ही आतंकियों ने गोलियां बरसानीं शुरू कर दीं। सुरक्षा बलों ने संसद में छिपे सभी आतंकियों को मार गिराया है। वहीं दूसरा हमला दक्षिणी तेहरान की खुमैनी दरगाह पर हुआ, जहां एक आत्‍मघाती हमलावर ने खुद को उड़ा लिया। यहीं पर एक और हमलावर मौजूद था, जिसने सायनायड खाकर जान दे दी।

आईएस ने अपनी अमाक एजेंसी के जरिये एक वीडियो जारी किया है, जिसमें हमलावर भवन के भीतर नजर आ रहे हैं। हमले के जारी रहते हुए जिम्मेदारी लेने का यह दुर्लभ मामला है। पुलिस ने बताया कि हमला शुरू होने के करीब पांच घंटे बाद अपराह्न तीन बजे के करीब तक सभी हमलावरों को मार गिराया गया। शिया बहुल ईरान आतंकी समूह इस्लामिक स्टेट समेत सुन्नी जिहादियों के निशाने पर रहता है। हालांकि अब तक यहां के शहरी क्षेत्र ज्यादातर हमलों से बचे रहे हैं। ईरान, सीरिया में बशर असल असद के शासन और सीरिया की सुन्नी कट्टरपंथी समूहों से लड़ाई में मदद दे रहा है। दोनों ही देशों में आईएस पर दबाव बढ़ रहा है। सीरिया में रक्का और इराक में मोसुल जैसे आईएस के दो अंतिम महत्वपूर्ण शहरी गढ़ों पर आक्रमण तेज हो रहा है।

मार्च माह में आईएस ने फारसी भाषा में एक वीडियो जारी कर चेतावनी दी थी कि वह ‘‘ईरान को फतह कर पहले की तरह इसे सुन्नी मुस्लिम राष्ट्र बनाएगा।’’ ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने रविवार को कहा था कि यूरोप समेत दुनियाभर में आईएस के हमलों से यह साबित होता है कि पश्चिम एशिया में पश्चिमी ताकतों की नीतियां उसी पर उलटी पड़ गई हैं।

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