ईरान ने पाकिस्तानी मध्यस्थों के ज़रिए अमेरिका को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और युद्ध खत्म करने का एक नया प्रस्ताव दिया है। अमेरिकी मीडिया एक्सियोस ने रविवार को एक अमेरिकी अधिकारी और मामले की जानकारी रखने वाले दो सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी। हालांकि न्यूक्लियर बातचीत को बाद में टालने के लिए प्रस्ताव दिया गया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी टॉप नेशनल सिक्योरिटी और फॉरेन पॉलिसी टीम के साथ ईरान पर एक सिचुएशन रूम मीटिंग करेंगे, जिसमें वे आगे की कार्रवाई का रिव्यू करेंगे।
ट्रंप का बयान
ईरान ने यह भी कहा कि अमेरिका को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करने वाले ईरानी एसेट्स पर लगी रोक हटानी होगी। ट्रंप ने रविवार को पहले ही संकेत दे दिया था कि जब तक ईरानी सरकार के साथ पूरी डील नहीं हो जाती, तब तक वह रोक जारी रखने की योजना बना रहे हैं। ट्रंप ने रविवार को फॉक्स न्यूज़ को बताया, “जब आपके सिस्टम से बहुत ज़्यादा तेल बह रहा हो, अगर किसी वजह से यह लाइन बंद हो जाती है क्योंकि आप इसे कंटेनर या जहाज़ों में नहीं डाल सकते। इससे क्या होता है कि लाइन अंदर से फट जाती है। ऐसा होने में उनके पास (ईरान) सिर्फ़ तीन दिन हैं। और जब यह फटेगा, तो आप इसे पहले जैसा कभी नहीं बना सकते। यह अभी जो है उसका सिर्फ़ 50% ही होगा। इसलिए मुझे लगता है कि वे दबाव में हैं।”
इस बीच फ़ार्स न्यूज एजेंसी ने बताया कि ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची की हाल ही में इस्लामाबाद यात्रा के दौरान ईरान ने पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाकर अमेरिकी पक्ष को लिखित संदेश भेजे। इसमें क्षेत्रीय स्थिति स्पष्ट की गई और देश की कुछ विशेष सीमाएं बताई गईं। इनमें परमाणु मामले और होर्मुज़ जैसे मुद्दे शामिल थे।
रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की चेतावनी
होर्मुज जलमार्ग के बंद रहने के कारण युद्ध को खत्म करने का दबाव तेज हो गया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि उनका नाकाबंदी हटाने का कोई इरादा नहीं है। इसकी वजह से काफी उथल-पुथल मची हुई है। गार्ड्स ने अपने आधिकारिक टेलीग्राम चैनल पर कहा, “होर्मुज जलमार्ग को नियंत्रित करना और क्षेत्र में अमेरिका और व्हाइट हाउस के समर्थकों पर इसके प्रभावों की छाया बनाए रखना इस्लामी ईरान की निर्णायक रणनीति है।”
