ईरानी के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने एक साफ बयान जारी किया है। पेजेशकियन ने मंगलवार को कहा कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम अमेरिका के साथ हुए 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) का हिस्सा नहीं है और इसे भविष्य के किसी भी समझौते में शामिल नहीं किया जाएगा। किसी भी तरह के संबंध को दृढ़ता से खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि ईरान की मिसाइलें समझौते में शामिल नहीं थीं और कभी नहीं होंगी।

ईरान के सरकारी प्रसारक इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (आईआरआईबी) द्वारा साझा किए गए एक वीडियो के अनुसार, पेज़ेश्कियन ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान ये टिप्पणियां कीं। ईरान की मिसाइल क्षमताओं का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि अगर हमारे पास रक्षा के लिए मौजूद मिसाइलें नहीं होतीं, तो इजरायल और अमेरिका गाजा की तरह ही ईरान को भी रौंद डालते, न तो बूढ़ों पर और न ही युवाओं पर कोई दया दिखाते।”

उनकी ये टिप्पणी स्विट्जरलैंड में हुई तकनीकी वार्ता के बाद आई है, जो क्षेत्र में शत्रुता को समाप्त करने के उद्देश्य से किए गए 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन से संबंधित है।

पिछले सप्ताह, संयुक्त राज्य अमेरिका ने समझौते का मसौदा जारी किया। अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 14 सूत्रीय दस्तावेज़ को पढ़कर सुनाया, जिसमें होर्मुज जलमार्ग को फिर से खोलने, ईरान पर कुछ वित्तीय प्रतिबंधों में ढील देने और तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर भविष्य की तकनीकी वार्ता के लिए एक रूपरेखा तैयार करने के प्रावधान शामिल हैं।

प्रकाशित पाठ में कथित तौर पर ईरान के मिसाइल कार्यक्रम या व्यापक रक्षा क्षमताओं पर प्रतिबंधों का कोई उल्लेख नहीं है। हथियारों से संबंधित एकमात्र प्रावधान ईरान की “परमाणु हथियार प्राप्त न करने या विकसित न करने” की प्रतिबद्धता है। लगातार चल रही कूटनीति के बावजूद यह मुद्दा विवादित बना हुआ है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर अंकुश लगाने की वकालत की थी, लेकिन हालिया वार्ताओं के दौरान उन्होंने अपना रुख नरम किया है।

पिछले सप्ताह फ्रांस में हुए जी7 शिखर सम्मेलन में बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि मिसाइलें समस्या नहीं हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि मैं यह कह रहा हूं कि अगर अन्य देशों के पास ये सुविधाएं हैं, तो उनके पास ये सुविधाएं न होना थोड़ा अनुचित है।

एएफपी के अनुसार, ईरान ने 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान अपनी हवाई सुरक्षा की कमियों को दूर करने के लिए मिसाइल कार्यक्रम विकसित करना शुरू किया था, जिसके परिणामस्वरूप बाद में इसकी मारक क्षमता और सटीकता दोनों में विस्तार हुआ।

ईरान से लगभग 1,500 किलोमीटर दूर स्थित इजरायल लंबे समय से इस कार्यक्रम को एक बड़ा सुरक्षा खतरा मानता रहा है। संघर्ष से पहले, अमेरिका ने तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत में ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं और क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों को दिए जा रहे समर्थन को शामिल करने की कोशिश की थी।

ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि हम किसी भी परिस्थिति में, कभी भी, किसी के साथ अपनी रक्षा क्षमताओं के बारे में बातचीत नहीं करेंगे। एएफपी ने यह भी बताया कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि प्रारंभिक समझौते में बैलिस्टिक मिसाइलों का कोई जिक्र नहीं था। शरीफ ने कहा कि दोहरा मापदंड नहीं हो सकता… कि कुछ देशों के पास बैलिस्टिक मिसाइलें हों और ईरान के पास न हों। आप इस दोहरे रवैये को पचा नहीं सकते।

‘अगर ईरान ने परमाणु जांच से…’, ट्रंप ने तेहरान को फिर दी धमकी

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से धमकी दी है। ट्रंप ने कहा कि कि अगर ईरान, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को परमाणु जांच की इजाजत नहीं देता है तो वे तेहरान के साथ बातचीत कैंसिल कर देंगे। पढ़ें पूरी खबर।