US-Israel Iran War: ईरान और इज़रायल के बीच युद्ध अब अपने सातवें दिन में प्रवेश कर चुका है। इस दौरान पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और उथल-पुथल बढ़ गई है। एक के बाद हमले, मिसाइल और ड्रोन अटैक, एयर स्ट्राइक और समुद्री टकरावों ने न केवल दोनों देशों को प्रभावित किया है बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और बाजारों को भी हिला दिया है। एक हफ्ते में क्या-क्या घटनाएं हुईं और कौन से अहम मोड़ सामने आए…देखें पूरी टाइमलाइन…
पहला दिन (28 फरवरी 2026)
इजरायल और यूनाइटेड ने मिलकर तेहरान पर हमला किया और इसे ‘प्री-एम्प्टिव एक्शन’ (पहले से किया गया सैन्य कदम) बताया। इस सैन्य अभियान को ‘Operation Roaring Lion’ और ‘Operation Epic Fury’ नाम दिया गया।
इस ऑपरेशन के तहत ईरान के कई प्रमुख शहरों- तेहरान, कोम और इस्फ़हान पर हमले किए गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अल खामनेई की मौत हो गई। इसके अलावा 200 से ज्यादा नागरिकों की भी जान चली गई।
जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इजरायल के शहरों तेल अवीव और येरुशलम पर मिसाइलों की बौछार कर दी। इसके अलावा पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया।
ईरान के निशाने पर United States Fifth Fleet का बहरीन स्थित बेस, Al Udeid Air Base (क़तर), Ali Al Salem Air Base (कुवैत) और Al Dhafra Air Base (यूएई) भी थे। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि दुबई के प्रमुख पर्यटन स्थलों- बुर्ज खलीफा और पाम आइलैंड को भी हमलों में निशाना बनाया गया।
दूसरा दिन (1 मार्च 2026)
यूनाइटेड स्टेट्स और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे संयुक्त सैन्य अभियान के बीच, अमेरिकी सेना ने रविवार 1 मार्च 2026 को बड़ी घोषणा की। अमेरिकी सेना ने बताया कि उसने Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के मुख्यालय को नष्ट कर दिया है। यह ईरान की सुरक्षा व्यवस्था का एक अहम स्तंभ माना जाता है।
इसी दौरान ईरान द्वारा दागी गई एक मिसाइल इजरायल के बेत शेमेश में गिरी जिसमें कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई और 28 लोग घायल हो गए। यह जानकारी घटनास्थल पर मौजूद राहतकर्मियों ने दी।
ईरानी समाचार एजेंसी Iranian Students’ News Agency (ISNA) के मुताबिक, उत्तरी Tehran स्थित Gandhi Hospital को भी अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों में निशाना बनाया गया।
खाड़ी देशों में स्थित सैन्य ठिकानों पर ईरान के हमलों के बाद फ्रांस, जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम ने एक संयुक्त बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि जरूरत पड़ने पर वे अपने हितों की रक्षा के लिए ईरान के खिलाफ ‘रक्षात्मक कार्रवाई’ करने के लिए तैयार हैं।
उधर ईरान में अली खामनेई की मौत के बाद सरकार ने अलीरेजा अराफी को अंतरिम नेतृत्व परिषद का प्रमुख नियुक्त किया।
तीसरा दिन (2 मार्च 2026)
संघर्ष के तीसरे दिन इजरायल ने बेरूत पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए। यह कार्रवाई उस वक्त की गई जब लेबनान के उग्रवादी संगठन हिज़्बुल्लाह ने सोमवार (2 मार्च 2026) की सुबह सीमा पार से इजरायल की ओर मिसाइलें दागीं।
तीसरे दिन ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांडर ने घोषणा की कि Strait of Hormuz (होर्मुज़ स्ट्रेट) को बंद कर दिया गया है। बता दें कि इस घटनाक्रम से दुनियाभर मे तेल आपूर्ति के लगभग पांचवें हिस्से को प्रभावित कर सकता है और कच्चे तेल की कीमतों को तेज़ी से बढ़ा सकता है। दुनिया का 30 प्रतिशत तेल इसी होर्मुज़ स्ट्रेट से होकर निकलता है। उन्होंने चेतावनी दी कि जो भी जहाज़ इस जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश करेगा, ईरान उसे निशाना बनाएगा।
इसी बीच खाड़ी क्षेत्र में कुवैत ने बताया कि उसने ईरान के जवाबी हमलों के दौरान अपने इलाके की ओर आ रहे दुश्मन ड्रोन को मार गिराया। ये हमले अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के जवाब में पड़ोसी देशों को निशाना बनाकर किए गए थे।
ईरान ने यह भी कहा कि उसने इजरायल के तेल अवीव में एक सरकारी परिसर पर मिसाइल हमला किया। इसके अलावा हाइफ़ा में सुरक्षा और सैन्य ठिकानों तथा येरुशलम के पूर्वी हिस्से में भी हमले किए गए।
चौथा दिन (3 मार्च 2026)
ईरान में 27 फरवरी 2026 से यूनाइटेड स्टेट्स और इजरायल के हमले शुरू होने के बाद से अब तक 780 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। यह जानकारी Iranian Red Crescent Society ने दी।
इसी बीच 4 मार्च 2026 (बुधवार) को इजरायल की सेना ने कहा कि उसने ईरान के अंदर कई लक्ष्यों पर एक साथ व्यापक हमले शुरू किए। यह कार्रवाई उस समय हुई जब इस्लामिक गणराज्य ईरान ने कुछ घंटे पहले इजरायल की ओर तीन अलग-अलग मिसाइल हमले किए थे।
मंगलवार रात 3 मार्च 2026 को इराक के एरबिल और दोहा, दुबई व अबू धाबी (यूएई) में तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं। दुबई के अधिकारियों ने कहा कि ये विस्फोट एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा किए गए इंटरसेप्शन ऑपरेशन का नतीजा थे।
वहीं सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि रियाध में स्थित United States Embassy Riyadh पर दो ड्रोन से हमला किया गया, जिससे वहां आग लग गई। इससे पहले कुवैत में स्थित United States Embassy Kuwait में भी एक घटना हुई थी जिसके बाद दूतावास ने अगले आदेश तक बंद रहने की घोषणा कर दी।
पांचवा दिन (4 मार्च 2026)
अमेरिका और इजरायल की तरफ से लगातार जारी बमबारी के बावजूद ईरान नए सर्वोच्च नेता की नियुक्ति की प्रक्रिया को तेज करने की कोशिश कर रहा है। सरकारी टीवी के अनुसार, यह कदम अली खामनेई की मौत के बाद उनके उत्तराधिकारी को तय करने के लिए उठाया जा रहा है।
इसी बीच इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज़ ने चेतावनी दी कि अगर ईरान नया सर्वोच्च नेता चुनता है तो इजरायल उसे भी निशाना बनाकर मार सकता है।
संघर्ष के पांचवें दिन इजरायल ने ईरान और लेबनान में फिर से हवाई हमले किए। लेबनान की सरकारी मीडिया के मुताबिक ताज़ा बमबारी में एक रिहायशी इमारत को निशाना बनाया गया। दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना खियाम कस्बे में भी घुस गई जहां वह ईरान समर्थित संगठन हिज़्बुल्लाह के खिलाफ जमीनी अभियान चला रही है।
इजरायली सेना ने कहा कि लगातार हमलों के बावजूद ईरान के पास अभी भी बड़ी संख्या में मिसाइल लॉन्च करने की क्षमता मौजूद है। हालांकि इजरायल ईरान के कई मिसाइल लॉन्च साइट्स को लगातार निशाना बना रहा है।
इसी दौरान यूनाइटेड स्टेट्स की एक पनडुब्बी ने भारतीय महासागर में श्रीलंका के तट के पास एक ईरानी युद्धपोत पर हमला किया जिसके बाद वह डूब गया। इस टॉरपीडो हमले में कम से कम 83 लोगों की मौत हो गई। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने वॉशिंगटन डी.सी. में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस हमले की पुष्टि की।
इस बीच एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने बताया कि नागरिकों के लिए तेहरान में आयोजित होने वाला अयातुल्ला अली खामेनेई को श्रद्धांजलि देने का सार्वजनिक समारोह फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
छठा दिन (5 मार्च 2026)
पश्चिम एशिया में जारी हवाई हमलों का सिलसिला लगातार छठे दिन गुरुवार (5 मार्च 2026) भी जारी रहा। इससे एक दिन पहले अमेरिका की एक पनडुब्बी ने ईरान के एक युद्धपोत को डुबो दिया था। इसके बाद तेहरान ने चेतावनी दी कि वह पूरे क्षेत्र में सैन्य और आर्थिक ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई करेगा।
गुरुवार सुबह ईरान ने इजरायल की ओर मिसाइलें दागीं और इजरायल ने इसकी पुष्टि की। यह हमला उस समय हुआ जब इजरायली सेना ने लेबनान में नई सैन्य कार्रवाई शुरू करने की घोषणा की थी और हिज़्बुल्लाह के ठिकानों को बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में निशाना बनाया था।
इसी बीच ईरान का एक दूसरा युद्धपोत गुरुवार को श्री लंका के समुद्री क्षेत्र की ओर बढ़ रहा था। यह घटना उस हमले के एक दिन बाद हुई जब अमेरिकी पनडुब्बी ने एक अन्य ईरानी फ्रिगेट को श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास डुबो दिया जिसमें कम से कम 87 नाविकों की मौत हो गई थी।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इस जहाज पर 100 से ज्यादा क्रू सदस्य सवार हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि कहीं इसका भी वही हाल न हो जो बुधवार को श्रीलंका के तट के पास डूबे उसके दूसरे जहाज का हुआ था।
इस बीच नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्री ने पूर्व अमेरिकी सेना के कर्नल Douglas Macgregor के उस दावे को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ईरान पर हमले के लिए भारत के नौसैनिक अड्डों का इस्तेमाल कर रहा है।
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मध्य-पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है। यह संघर्ष दशकों पुराना है जो समय-समय पर युद्ध जैसे हालात पैदा करता रहा है। हाल के दिनों में यह टकराव और ज्यादा खतरनाक हो गया है और पूरे क्षेत्र में बड़े युद्ध की आशंका बढ़ गई है। यूनाइटेड स्टेट्स और इजरायल ने शनिवार (28 फरवरी 2026) को ईरान पर हमला किया जिसके बाद पश्चिम एशिया एक नए संघर्ष में घिर गया। पढ़ें पूरी खबर…
