Iran-Israel War: इजरायल-अमेरिका के खिलाफ जंग लड़ रहा ईरान लगातार ट्रंप की मुसीबतें बढ़ाता जा रहा है। यह युद्ध जितना लंबा खिंच रहा है, ट्रंप पर सवालों की बौछार उतनी ही ज्यादा होती जा रही है। इस बीच अब ईरान ने अमेरिका के पेट्रो डॉलर के सबसे बड़े आर्थिक अधिपत्य को चुनौती दे दी है। इस चुनौती के लिए तेहरान की तरफ से होर्मुज स्ट्रेट का इस्तेमाल किया जा रहा है।

दरअसल, ईरान के एक सीनियर अधिकारी ने सीएनएन के सोर्सेज से बातचीच में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नींद उड़ाने वाला बयान दिया है। अधिकारी ने कहा है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट से तेल और गैस के सभी टैंकर्स को गुजरने की अनुमति तो दे सकता है, लेकिन शर्त ये हैंॉ, कि उन तेल टैंकर्स का व्यापार डॉलर्स के बजाए युआन (चीनी करेंसी) में किया जाए।

होर्मुज स्ट्रेट का इस्तेमाल कर रहा ईरान

पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और पूर्ण रूप से बंद होने की आशंकाओं के बीच तेहरान कथित तौर पर होर्मुज स्ट्रेट के मार्ग से सीमित संख्या में तेल टैंकरों को गुजरने देने पर विचार कर रहा है। बता दें कि हाल के दिनों में ईरान ने भारत के ही कई टैंकर्स को हो होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दी है। ईरान चाहता है कि अमेरिकी डॉलर के बजाय युआन में हो। ईरान का यह कदम सीधे तौर पर दशकों पुरानी पेट्रो डॉलर प्रणाली को सीधे चुनौती दे सकता है।

चीन के सपने को लगे पंख?

ईरान अगर होर्मुज स्ट्रेट पर तेल टैंकर्स को गुजारने के लिए केवल युआन को ही स्वीकृति देता है, तो ऊर्जा सौदों में युआन के अंतर्राष्ट्रीयकरण का सपना देख रहे चीन के प्रयासों को गति मिल सकती है। वहीं वैश्विक बाजारों में हलचल भी हो सकती है, क्योंकि होर्मुज पर एक वित्तीय चेकपॉइंट विश्व तेल व्यापार को हमेशा के लिए बदल भी सकता है।

ज्यादातर अमेरिकी डॉलर में होता है तेल का व्यापार

बता दें कि दुनिया में ज्यादातर तेल का व्यापार अमेरिकी डॉलर में होता है। हालांकि रूस पर लगे प्रतिबंधों के बाद उसका कुछ तेल रूबल या युआन में भी बेचा जा रहा है। भारत के साथ रूस रुबल और रुपये में भी व्यापार भी कर रहा है। दूसरी ओर चीन लगातार यह कोशिश कर रहा है कि अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार में युआन का इस्तेमाल बढ़े।

दिलचस्प बात यह भी है कि सऊदी अरब से तेल खरीद में चीन कई बार युआन में भुगतान की बात कर चुका है। हालांकि अभी तक तो अमेरिकी डॉलर ही दुनिया की सबसे मजबूत और सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली करेंसी बना हुआ है, लेकिन ईरान का होर्मुज स्ट्रेट इस्तेमाल करना उनके डॉलर के लिए चुनौती बन सकता है।

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इजरायल-ईरान संघर्ष: धमाके के बाद तेहरान की एक इमारत से धुआँ उठता हुआ (AP)।

अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ 28 फरवरी को बिना सोचे-समझे शुरू किए गए युद्ध के नतीजे दुनिया भर में बहुत दूर तक जाने वाले हैं। ‘आपरेशन एपिक फ्यूरी’ के दो हफ्तों में ईरान तबाह हो गया लगता है, लेकिन हारा नहीं है। युद्ध के पहले ही दिन अयातुल्ला खामेनेई सहित उसके शीर्ष नेतृत्व की पहली पंक्ति खत्म हो गई थी। उसके बाद ईरान ने तेजी से कदम उठाते हुए एक नया नेता चुना और एक नया सैन्य नेतृत्व स्थापित किया है। उधर अमेरिका-इजरायल गठबंधन ने घोषणा की कि वे उन्हें भी खत्म कर देंगे। पढ़िए पूरी खबर…