Iran-USA War: ईरान-इजरायल अमेरिका युद्ध में पाकिस्तान की मध्यस्थता की खबरों को लेकर भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने मध्यस्थता में पाकिस्तान की भूमिका को सिरे से खारिज कर दिया और कहा इस्लामाबाद की भूमिका के दावों में किसी भी तरह की कोई सच्चाई नहीं है।
दरअसल, भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच वार्ता को सुविधाजनक बनाने के इस्लामाबाद के दावे “सच नहीं” हैं। उन्होंने ये बातें न्यूज एजेंसी के साथ अपने एक इंटरव्यू के दौरान कही है।
अमेरिका पर लगाए आरोप
इलाही ने कहा कि इस तरह के दावे वास्तविक राजनयिक प्रयासों को दर्शाने के बजाय वैश्विक तेल की कीमतों को प्रभावित करने के उद्देश्य से किए गए थे। उन्होंने कहा कि इस मामले में उनकी कोई भूमिका नहीं है। पाकिस्तान के माध्यम से ईरान और अमेरिका के बीच हुई यह बातचीत झूठी थी क्योंकि वे सिर्फ बातचीत के जरिए तेल की कीमतों को रोकना चाहते थे।
सुप्रीम नेता के प्रतिनिधि ने कहा कि वे न तो बातचीत को लेकर गंभीर हैं, न ही समझौता करने को लेकर, और न ही बातचीत को लेकर। वे सिर्फ कुछ देशों का इस्तेमाल करना चाहते थे। उन्होंने कहा कि हम बातचीत करना चाहते हैं, संवाद करना चाहते हैं, लेकिन यह सच नहीं है।
क्या भारत निभा सकता है शांति में अहम भूमिका?
ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच युद्ध में भारत की शांति की भूमिका निभाने से जुड़े सवाल पर इलाही ने कहा कि भारत सहित सभी देश संघर्ष को समाप्त करने में सकारात्मक योगदान दे सकते हैं। बता दें कि इससे पहले कई देशों के राष्ट्र प्रमुखों और कूटनीतिज्ञों ने कहा था कि भारत की युद्ध को खत्म कराने या फिर सीजफायर कराने में अहम भूमिका हो सकती है।
लंबे खिंचते युद्ध पर उन्होंने कहा कि इसका अंत अमेरिका और इज़राइल पर निर्भर करता है, जिन्होंने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ शत्रुता शुरू की थी और आरोप लगाया था कि हमलों में अस्पतालों, स्कूलों और आवासीय क्षेत्रों सहित नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया था।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। इससे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर पहले से ही बढ़ा तनाव और भी बढ़ गया है। ऐसा लगता है कि यह संदेश सीधे तौर पर ट्रंप द्वारा पहले दी गई उन धमकियों का संदर्भ देता है जिनमें उन्होंने कहा था कि अगर तेहरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को दोबारा नहीं खोलता है तो वह बिजली संयंत्रों और पुलों सहित ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएंगे। पढ़िए पूरी खबर…
