ईरान में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को श्रद्धांजलि दी। बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा वाले इस प्रतिनिधिमंडल ने तेहरान में ईरानी नेता के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
हसनैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में कहा, “आज तेहरान में ग्रैंड अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह में विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटी के साथ भारत का प्रतिनिधित्व किया। साथ ही, हालिया संघर्ष में जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना भी व्यक्त की।”
विदेश राज्य मंत्री ने क्या पोस्ट किया?
एक अलग पोस्ट में मार्गेरिटा ने कहा कि उन्होंने और बिहार के राज्यपाल ने अंतिम संस्कार समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व किया और भारत सरकार और भारत के लोगों की ओर से खेद व्यक्त किया।
इसके अलावा, कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और भारत के सिख, हिंदू, मुस्लिम और ईसाई धार्मिक नेताओं ने भी दिवंगत ईरानी नेता को श्रद्धांजलि दी। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, मुफ्ती ने कहा कि खामेनेई की मृत्यु पर गहरी संवेदना और एकजुटता व्यक्त करने के लिए तेहरान में होना सम्मान की बात थी। उन्होंने खामेनेई को एक सम्मानित नेता बताया जिन्होंने धारा के विपरीत खड़े होने का साहस किया और पीड़ितों के लिए लड़ाई लड़ी।”
सार्वजनिक अंतिम संस्कार समारोह 5, 6 और 7 जुलाई को तेहरान और कोम में आयोजित किए जाएंगे। उन्हें 9 जुलाई को उनके गृहनगर मशहद में दफनाया जाएगा।
दफनाने में देरी क्यों हुई?
इस्लामी परंपरा के अनुसार, मौत के 24 घंटे के भीतर दफनाने की प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए। हालांकि, युद्ध जैसी स्थिति के कारण खामेनेई के पार्थिव शरीर को दफनाने में देरी हुई। इस दौरान, धार्मिक नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए उनके शव को कोल्ड स्टोरेज में सुरक्षित रखा गया था। उनकी मौत के बाद भी ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले जारी रहे। संघर्ष के बीच, अंतिम संस्कार के लिए नागरिकों को इकट्ठा करना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना असंभव था। ईरान ने युद्धविराम लागू होने और हाल ही में शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद ही दफनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का फैसला किया।
यह भी पढ़ें: पिता के जनाजे में शामिल नहीं होंगे ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई? जानें करीबी शख्स ने क्यों किया ये दावा
इजरायली और अमेरिकी हमले में मारे गए ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को सम्मान के साथ 6 जुलाई को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। उनके बेटे मोजतबा खामेनेई ईरान के नए सुप्रीम लीडर बने हैं। अब भारत में सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अयातुल्ला हकीम इलाही ने कहा है कि गंभीर सुरक्षा चिंताओं के कारण मोजतबा खामेनेई पिता के अंतिम संस्कार में सार्वजनिक रूप से उपस्थित होने की संभावना काफी कम है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
