अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर जारी तनातनी के बीच ट्रंप प्रशासन ने कई बार कहा है कि युद्ध रोकने के लिए समझौता होने ही वाला है लेकिन ईरान ने अक्सर इन दावों को नकार दिया है। इस सबके बीच भारत में ईरान के राजदूत डॉ मोहम्मद फथली ने शुक्रवार को कहा कि कि ईरान के पास अभी भी जबरदस्त रक्षात्मक क्षमताएं हैं और वह अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार है। साथ ही उन्होंने कहा कि होर्मुज के पास सुविधाएं अभी फ्री नहीं रहेंगी।
न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए भारत में ईरान के राजदूत ने कहा, “उनके देश ने पिछले कई दशकों में नेविगेशन, मरीन रेस्क्यू, ट्रैफिक कंट्रोल और शिपिंग रेस्क्यू जैसे क्षेत्रों में सेवाएं मुफ्त में प्रदान की हैं लेकिन नई परिस्थितियों में ये सेवाएं और सुविधाएं अब मुफ्त नहीं रहेंगी। इनके लिए शुल्क लिया जाएगा”। उन्होंने कहा, “यह प्रथा कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों और जलडमरूमध्यों में आम है, जहां तटीय देश ट्रांजिट, तकनीकी सेवाओं, समुद्री मार्गदर्शन और क्षेत्र की सुरक्षा के लिए शुल्क लेते हैं।”
डॉ फथली ने इस बात पर ज़ोर दिया कि दशकों से लागू आर्थिक प्रतिबंधों ने देश को पंगु नहीं बनाया है बल्कि इसके बजाय इसे विदेशी शत्रुओं को मैनेज करने में विशेषज्ञता दी है। उन्होंने कहा, “जो लोग यह दावा करते हैं कि ईरान रणनीतिक और आर्थिक रूप से कमज़ोर हो गया है, उन्होंने 40 दिनों के युद्ध के दौरान ईरानी राष्ट्र और हमारी सशस्त्र सेनाओं की वास्तविक शक्ति देखी।”
हमें अतीत में हुए युद्धविरामों का कड़वा अनुभव है- ईरानी राजदूत
ईरान वर्तमान स्थिति का आकलन कैसे करता है और क्या तेहरान का मानना है कि व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष को रोकने के लिए कूटनीति की गुंजाइश अभी भी है? इस सवाल के जवाब में राजदूत ने कहा, “ईरान का मानना है कि आज हम क्षेत्र में जो कुछ देख रहे हैं, वह दबाव, धमकियों और सैन्य कार्रवाई पर आधारित नीतियों का परिणाम है। इन नीतियों ने क्षेत्रीय स्थिरता में मदद नहीं की है बल्कि इन्होंने खतरा बढ़ा दिया है। हालांकि, अपनी जनता, आंतरिक क्षमताओं और मजबूत सिद्धांतों पर भरोसा करते हुए ईरान दो परमाणु शक्तियों के दबाव और धमकियों के खिलाफ मजबूती से खड़ा रहा है। हमें अतीत में हुए युद्धविरामों और टूटे वादों का कड़वा अनुभव है इसलिए हम इन घटनाक्रमों को यथार्थवादी रूप से देखते हैं।
हम एक बार फिर इस बात पर जोर देते हैं कि हम अपनी रक्षा करने और धमकियों का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं लेकिन हम कूटनीति का मार्ग भी खुला रखते हैं। बेशक, हम संवाद, बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता देते हैं। हम राजनीतिक समाधानों पर जोर देते हैं, क्योंकि हमारा मानना है कि युद्ध से क्षेत्र के संसाधन ही नष्ट होंगे।”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे पर कि प्रतिबंधों और क्षेत्रीय दबाव के कारण ईरान रणनीतिक और आर्थिक रूप से कमजोर हो गया है और क्या तेहरान परमाणु संवर्धन पर समझौता करने को तैयार है, इस पर भारत में ईरान के राजदूत डॉ मोहम्मद फथली ने कहा, “जो लोग यह दावा करते हैं कि ईरान रणनीतिक और आर्थिक रूप से कमजोर हो गया है उन्होंने 40 दिनों के युद्ध के दौरान ईरानी राष्ट्र और हमारी सशस्त्र सेनाओं की वास्तविक शक्ति देखी। ईरान ने दिखाया कि भारी दबाव के बावजूद, उसके पास अभी भी महत्वपूर्ण रक्षात्मक, जनवादी और रणनीतिक क्षमताएं हैं और वह अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर सकता है।”
प्रतिबंधों का ईरान की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा- मोहम्मद फथली
भारत में ईरान के राजदूत ने आगे कहा, “निसंदेह, प्रतिबंधों का ईरान की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है और हमने इस बात से कभी इनकार नहीं किया है। यूरेनियम संवर्धन के मुद्दे पर, ईरान का रुख पूरी तरह स्पष्ट है। हमने कई बार कहा है कि हम ईरानी लोगों के कानूनी और वैध अधिकारों को नहीं छोड़ेंगे, जिसमें परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग का अधिकार भी शामिल है जिसका उल्लेख एनपीटी में किया गया है। इसी कारण से परमाणु मुद्दा फिलहाल यह मुद्दा वार्ता के एजेंडे में नहीं है और इस पर बातचीत बाद में एक विशिष्ट ढांचे के भीतर होगी।”
अमेरिका-ईरान के बीच 60 दिन का युद्धविराम बढ़ाने पर सहमति
अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के लिए युद्धविराम बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर सहमति बन गई है।हालांकि, सूत्रों ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक इसे मंजूरी नहीं दी है। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
