ईरान ने पाकिस्तान के दो व्यापारिक जहाजों को सोमवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करने और कुवैत तथा संयुक्त अरब अमीरात जाने की अनुमति दे दी है जबकि पहले उसने ऐसा करने से इनकार कर दिया था। ‘पाकिस्तान नेशनल शिपिंग कॉर्पोरेशन’ (पीएनएससी) के ये दोनों व्यापारिक जहाज (शालीमार और खैरपुर) ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच युद्ध शुरू होने के बाद फारस की खाड़ी में जाने वाले पहले पाकिस्तानी जहाज हैं।

पीएनएससी के एक अधिकारी ने बताया कि रविवार को ईरानी अधिकारियों ने इन दोनों जहाजों को रोक दिया था और उन्हें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से लौट जाने को कहा था। अधिकारी ने कहा, ”लेकिन कुछ ही समय बाद उन्हें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करके फारस की खाड़ी में जाने की अनुमति मिल गई।”

जहाज के कप्तान (आसिफ और शाहीन) अब कुवैत और दास द्वीप की ओर रवाना हो चुके हैं, जहां से वे लाखों लीटर डीजल और कच्चा तेल लेकर लौटेंगे।

ट्रंप ने किया था नाकेबंदी का ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा था कि अमेरिकी नौसेना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों के प्रवेश या निकलने को रोकने का काम करेगी। ट्रंप ने ‘ट्रूथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा था कि उन्होंने अमेरिकी नौसेना को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में उन सभी जहाजों की पहचान करने और उन्हें रोकने का निर्देश दिया है जिन्होंने ईरान को शुल्क (टोल) का भुगतान किया है।

ट्रंप ने दावा किया कि अन्य देश भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की इस नाकेबंदी में शामिल होंगे। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बेहद अहम समुद्री मार्ग है। दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग पांचवा हिस्सा इससे होकर गुजरता है। इससे पहले इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच हुई बातचीत फेल हो गई थी।

दूसरी ओर, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड नौसेना ने भी रविवार को कहा था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास आने वाले सैन्य जहाजों को माकूल जवाब दिया जाएगा।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा होर्मुज जलमार्ग ब्लॉक करने के ऐलान पर ईरान के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता ने कहा कि अगर हमारे बंदरगाह खतरे में पड़ते हैं तो खाड़ी का कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।