कई हफ्तों से मध्यस्थ के माध्यम से ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते पर पहुंचने के लिए लगातार कोशिश कर रहे हैं। जिससे मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध का अंत हो सके। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों पक्ष (अमेरिका-ईरान) अंततः एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर सहमत हो गए हैं, जिसके तहत दोनों देश सीजफायर को 60 दिनों के लिए बढ़ाएंगे और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करेंगे।

हालांकि, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दावा किया है कि युद्धविराम विस्तार के लिए तैयार किए गए समझौते को अभी भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी का इंतजार है। वार्ता में अहम भूमिका निभाने वाले वेंस ने मीडिया से कहा कि यह कहना मुश्किल है कि राष्ट्रपति समझौता ज्ञापन पर कब हस्ताक्षर करेंगे या करेंगे भी या नहीं, लेकिन हमने इस दिशा में काफी प्रगति की है।

ईरान की तसनीम समाचार एजेंसी ने तेहरान के वार्ताकारों के करीबी एक सूत्र का हवाला देते हुए बताया कि मसौदे को अंतिम रूप नहीं दिया गया है और समझौता होने पर पाकिस्तान को सूचित किया जाएगा। स्थानीय मीडिया द्वारा ईरानी सूत्रों ने कहा कि कोई भी समझौता तभी पूर्ण होगा जब तेहरान इसकी घोषणा करेगा, न कि ट्रंप द्वारा एकतरफा घोषणा की जाएगी।

यदि समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप दिया जाता है, तो यह एक प्रारंभिक ढांचा होगा, जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य, अमेरिकी प्रतिबंधों और युद्ध की औपचारिक समाप्ति को निर्धारित करने के लिए अधिक ठोस और संभवतः लंबे समय तक चलने वाली वार्ताओं का मार्ग प्रशस्त करेगा।

इस डील में क्या शामिल है?

होर्मुज नाकाबंदी (Hormuz Blockade): एक्सियोस की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित समझौते के तहत, होर्मुज से जहाजों का आवागमन बिना किसी के प्रतिबंध के होगा। कोई टोल या उत्पीड़न नहीं होगा। ईरान 30 दिनों के भीतर सभी खदानें हटा देगा, और यदि वाणिज्यिक यातायात फिर से शुरू होता है तो संयुक्त राज्य अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटा लेगा।

ईरान का परमाणु कार्यक्रम (Iran Nuclear Programme): इसके अलावा, मसौदा समझौते में यह भी शामिल होगा कि दोनों पक्ष ईरान के समृद्ध यूरेनियम (Enriched Uranium) के भविष्य पर बातचीत करने के लिए प्रतिबद्ध होंगे और ईरान परमाणु हथियार बनाने का प्रयास नहीं करेगा।

एक्सियोस और न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, समझौते के तहत, 60 दिनों की अवधि में दोनों पक्ष सबसे पहले ईरान के लगभग 970 पाउंड यूरेनियम भंडार के निपटान और ईरानी संवर्धन के लिए नियामक ढांचे पर बातचीत करेंगे। बताया जाता है कि दस टन परमाणु सामग्री और भी है जिसे निम्न स्तर तक समृद्ध किया गया है, जिस पर वार्ताकारों को विचार-विमर्श करना होगा।

अमेरिकी प्रतिबंध (US Sanctions): अमेरिका वार्ता के तहत प्रतिबंधों में ढील और ईरान की जब्त संपत्तियों की रिहाई पर चर्चा करने के लिए भी प्रतिबद्ध होगा। एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्ष ईरान को सामान और मानवीय सहायता प्राप्त करने में मदद करने के लिए एक तंत्र पर भी चर्चा करेंगे। हालांकि, न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि लिखित समझौते मौखिक समझौतों से मेल नहीं खा सकते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान का विदेशी बैंकों में अनुमानित 24 अरब डॉलर की संपत्ति फंसी हुई है, और वह उस संपत्ति में से 20 अरब डॉलर चाहता है।

लेबनान में युद्ध (War in Lebanon): इस समझौते में लेबनान में इज़रायल और हिज़बुल्लाह के बीच चल रहे युद्ध को समाप्त करने का प्रावधान भी होगा। यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर ट्रंप और इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच कम से कम एक बार तनावपूर्ण चर्चा हो चुकी है। इजरायल ने हाल ही में ईरान समर्थित हिज़बुल्लाह के खिलाफ अपना सैन्य अभियान तेज कर दिया है।

ईरान के लिए निवेश कोष (Investment Fund for Iran): लेकिन शायद समझौते में सबसे चौंकाने वाला बदलाव ईरान के लिए निवेश कोष का जिक्र है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक ईरानी अधिकारी के हवाले से बताया कि अमेरिका 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण कार्यक्रम की स्थापना पर सहमत होगा। ईरानी अधिकारी ने कहा कि अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होने की स्थिति में ईरान को यह धनराशि देने का वादा किया गया है।

वहीं, इसको लेकर अमेरिकी राजनयिकों ने कथित तौर पर इसे एक अंतरराष्ट्रीय निवेश कोष बताया है, जिसे अंतिम समझौते की स्थिति में अमेरिका सुविधा प्रदान करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे कोष की योजनाओं पर बातचीत की अवधि के दौरान आगे चर्चा की जाएगी।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानियों ने प्रस्ताव दिया है कि समझौते के तहत प्रमुख तेल और ऊर्जा निगमों सहित अमेरिकी कंपनियां निवेश और संयुक्त उद्यम सौदों के लिए ईरान में प्रवेश कर सकती हैं।

जटिल मुद्दे

दोनों पक्ष समझौते के करीब हैं, फिर भी कुछ अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, चूंकि अधिकांश वार्ता पाकिस्तानी और कतरी मध्यस्थों के माध्यम से हुई है, इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिकी और ईरानी एक ही तरह के ज्ञापन पर काम कर रहे हैं या ईरान में वास्तव में किसके पास समझौते पर हस्ताक्षर करने का अधिकार है।

न्यूयॉर्क टाइम्स से बात करने वाले अमेरिकी राजनयिकों ने बताया कि प्रारंभिक समझौते में शुरुआती 60 दिनों के लिए शत्रुता समाप्त करने की बात कही गई थी। जिससे दोनों पक्षों के बीच बातचीत हो सके। लेकिन ईरानी अधिकारी द्वारा बताए गए विवरण के अनुसार, शर्तों में बातचीत की अवधि के दौरान लेबनान सहित सभी मोर्चों पर “युद्ध समाप्ति की घोषणा” शामिल थी। ईरानियों ने यह भी दावा किया कि समझौता ज्ञापन केवल एक व्यापक और स्थायी समझौते के लिए चल रही बातचीत की अवधि से संबंधित था।

इसके अलावा, इस समझौते से होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर एक निश्चित अवधि के लिए निर्बाध नौवहन की अनुमति मिलने की भी उम्मीद थी, जो वाणिज्यिक जहाजरानी के लिए एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है जिससे होकर शांति काल में वैश्विक तेल और गैस का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है।

हालांकि, अमेरिका के समझौते के अनुसार, अमेरिकी नाकाबंदी जारी रहेगी, लेकिन ईरान द्वारा युद्ध-पूर्व स्तर की समुद्री यातायात व्यवस्था को बहाल करने के आधार पर इसे चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा। इसका उद्देश्य ईरान को जलडमरूमध्य से बारूदी सुरंगें जल्द से जल्द हटाने के लिए प्रोत्साहित करना है। हालांकि, ईरानी अधिकारी ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि समझौते के तहत अमेरिका द्वारा लगाई गई नाकाबंदी 30 दिनों के भीतर हटा ली जाएगी और वार्ता की अवधि के लिए जलडमरूमध्य खोल दिया जाएगा। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका ने इसके लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की है।

क्या ओमान से युद्ध की तैयारी कर रहा अमेरिका? ट्रंप की ‘चेतावनी’ के बाद उठे सवाल, खाड़ी देश का यह स्टैंड

अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ओमान ने वॉशिंगटन को भरोसा दिलाया है कि उसकी ईरान के साथ मिलकर होर्मुज जलमार्ग पर किसी भी तरह की टोल व्यवस्था लागू करने की प्लानिंग नहीं है। खाड़ी देश वह अमेरिका के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना चाहता है। पढें पूरी खबर।