सैन्य आक्रामकता की बजाए शांतिपूर्ण प्रदर्शन ज्यादा असरदार: संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने विश्व में ‘बढ़ते नस्लीय हमले’ और ‘संघर्ष’ के दौर में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से महात्मा गांधी के अहिंसा के दर्शन का पालन करने का अनुरोध करते हुए कहा कि भारतीय नेता ने साबित कर दिया कि सैन्य आक्रामकता की बजाए शांतिपूर्ण प्रदर्शन ज्यादा मुकम्मल तरीका है। हर […]

संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने विश्व में ‘बढ़ते नस्लीय हमले’ और ‘संघर्ष’ के दौर में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से महात्मा गांधी के अहिंसा के दर्शन का पालन करने का अनुरोध करते हुए कहा कि भारतीय नेता ने साबित कर दिया कि सैन्य आक्रामकता की बजाए शांतिपूर्ण प्रदर्शन ज्यादा मुकम्मल तरीका है।

हर साल 2 अक्तूबर को गांधी के जन्मदिन पर मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के अवसर पर अपने संदेश में बान ने कहा, ‘‘आज जब नस्लीय हिंसा बढ़ रही है और सांस्कृतिक स्थलों और धरोहरों का विनाश किया जा रहा है, तो यह वक्त है गांधी के शांति और मेल-जोल के आह्वान और उनकी उस चेतावनी को याद करने का जिसमें उन्होंने कहा था कि एक आंख के बदले एक आंख से तो दुनिया अंधी हो जाएगी।’’

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि यह दिन महात्मा के सिद्धांतों को स्मरण करने का है जिन्होंने अपने ही उदाहरण से साबित कर दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन सैन्य आक्रामकता की बजाए ज्यादा मुकम्मल हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1948 में मानवाधिकार की सार्वभौमिक घोषणा (यूनिवर्सल डिक्लेरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स) में बापू के सिद्धातों को जगह दी गयी थी। बापू का देहांत 1948 को ही हुआ था।

लोगों से गांधी के अहिंसा के सिद्धांतों पर आधारित असहिष्णुता की ताकतों का सामना करने, वैश्विक नागरिकता और मानव एकता के लिए आह्वान करते हुए बान ने कहा, ‘‘हमें वार्ता और समझ आधारित शांति की संस्कृति को बढ़ावा देना होगा, सम्मान और मानव विविधता को मानते हुए सौहार्द से एक दूसरे के साथ रहना होगा।’’

मानवीय गरिमा बढ़ाने, अहिंसा की संस्कृति को बढ़ावा देने और शांति के प्रयास के लिए शिक्षा को एक बड़ा औजार बताते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा के जरिए हम एक दूसरे के साथ रहने का नया रास्ता तैयार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा, वैश्विक नागरिकता और एकजुटता का भी आधार बन सकती है जो कि आज की दुनिया के लिए बेहद जरूरी है।

संयुक्त राष्ट्र उप महासचिव जेन एलिसन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से महात्मा गांधी के पदचिन्हों का अनुसरण करते हुए शक्ति और शांतिपूर्ण तरीके से बदलाव लाने की संभावना को फिर से साबित करने का अनुरोध किया।

संयुक्त राष्ट्र में कल भारतीय मिशन द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में एलिसन ये बात कही।

भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने श्रद्धांजलि कार्यक्रम की अध्यक्षता की।

संयुक्त राष्ट्र अधिकारी ने बापू के दया, करूणा, सबके लिए सम्मान और समानता के सिद्धांतों और मूलभूत मतों को फिर से अंगीकार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बढ़ती सांप्रदायिकता के इस दौर में बापू का दर्शन ज्यादा प्रासंगिक हो गया है।

 

 

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