भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत के साथ सिंधु जल समझौते को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने पाकिस्तान के पानी को ‘रेड लाइन’ बताते हुए कहा कि अगर उसके जल संसाधनों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई तो पाकिस्तान सीधी कार्रवाई का जवाब देगा।

वहीं, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शरीफ के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि कश्मीर के लिए भी उसकी नदियां बेहद महत्वपूर्ण हैं।

शहबाज शरीफ ने क्या कहा?

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गुरुवार को इस्लामाबाद में ‘यादगार-ए-फतह’ यानी ‘विजय स्मारक’ के उद्घाटन के दौरान भारत को लेकर कड़ा बयान दिया। पाकिस्तान ने इस स्मारक को पिछले साल भारत के साथ हुए संघर्ष की अपनी व्याख्या से जुड़े स्मारक के तौर पर पेश किया है।

शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान क्षेत्र में शांति और स्थिरता चाहता है, लेकिन उसकी शांति की इच्छा को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का पानी उसकी ‘रेड लाइन’ है और अगर उसके जल संसाधनों को खतरा पहुंचा तो वह सीधा जवाब देगा। उन्होंने भारत को चेतावनी देते हुए कहा, “भारत को सही रास्ते पर आना होगा, नहीं तो उसे सीधा जवाब दिया जाएगा।”

उमर अब्दुल्ला ने शरीफ को दिया जवाब

शहबाज शरीफ के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पाकिस्तान के उस दावे पर सवाल उठाया, जिसमें वह खुद को कश्मीर के लोगों का हितैषी बताता है। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पाकिस्तान अक्सर कश्मीर के लोगों का बड़ा हमदर्द होने का दावा करता है, लेकिन जब बात पानी की आती है तो उसकी यह चिंता कहां गायब हो जाती है?

उन्होंने कहा कि सिंधु जल संधि ने जम्मू-कश्मीर की अपनी जल संसाधनों का पूरी तरह इस्तेमाल करने की क्षमता को सीमित किया है, जबकि इस व्यवस्था से पाकिस्तान को काफी फायदा मिला।

‘हमारा खून चूसा गया है’

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने सिंधु जल संधि के कारण लंबे समय तक इसके प्रभाव झेले हैं। उन्होंने चिनाब नदी से पीने के पानी के इस्तेमाल, तुलबुल परियोजना में बैराज निर्माण और बड़े बांधों के जरिए पानी के भंडारण व नियंत्रण जैसी सीमाओं का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि छह नदियों में से तीन नदियां- रावी, ब्यास और सतलुज भारत के हिस्से में आईं, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब जैसी पश्चिमी नदियां मुख्य रूप से पाकिस्तान को आवंटित की गईं।

पाकिस्तान की ओर से पानी को ‘रेड लाइन’ बताए जाने पर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि कश्मीरियों के लिए भी उनकी नदियां उनके भविष्य से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा, “हमारा खून चूसा गया है। यह पानी हमारा है… ये हमारी नदियां हैं और इन पर हमारा जायज हक था।”

सिंधु जल संधि को लेकर भारत का रुख

भारत ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद 23 अप्रैल 2025 को सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया था। पहलगाम हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। भारत ने इस फैसले को आतंकवाद और पाकिस्तान के सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने से जोड़ा था।

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अब जब भारत ने संधि को स्थगित रखा है तो इसे आगे भी इसी स्थिति में रखा जाना चाहिए, ताकि जम्मू-कश्मीर अपने जल संसाधनों का बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर सके।

क्या है सिंधु जल संधि?

सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुई थी। विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई इस संधि के तहत सिंधु नदी तंत्र की छह प्रमुख नदियों के पानी के इस्तेमाल को लेकर दोनों देशों के अधिकार तय किए गए थे। संधि के तहत पूर्वी नदियां- रावी, ब्यास और सतलुज भारत के लिए आवंटित की गईं, जबकि पश्चिमी नदियां- सिंधु, झेलम और चिनाब मुख्य रूप से पाकिस्तान के हिस्से में गईं।

हालांकि, भारत को पश्चिमी नदियों के पानी का घरेलू इस्तेमाल, कृषि और जलविद्युत उत्पादन जैसे सीमित उपयोग की अनुमति संधि की शर्तों के तहत दी गई थी। संधि में दोनों देशों के बीच जल सहयोग और विवादों के समाधान और सहयोग के लिए भी व्यवस्था की गई थी।

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भारत हर साल 15 अगस्त को इंडिपेंडेंस डे यानी स्वतंत्रता दिवस मनाता है, जबकि पड़ोसी देश पाकिस्तान अपना स्वतंत्रता दिवस 14 अगस्त को मनाता है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों देश एक ही ब्रिटिश भारतीय साम्राज्य से अलग होकर अस्तित्व में आए और दोनों के गठन का आधार एक ही ‘इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट, 1947’ था। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।