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सिंधु जल बंटवारा: पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने डैम के लिए कोष बनाने का दिया आदेश, सीजेआई बोले- 1965 के युद्ध जैसी दिखे दीवानगी

पाकिस्तान तमाम कोशिशों के बावजूद सिंधु नदी पर बांध बनाने के लिए फंड नहीं जुटा पाया। अब वहां के सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए सार्वजनिक कोष बनाने का आदेश दिया है। साथ ही चंदा देने में वर्ष 1965 के युद्ध सरीखा जोश और दीवानगी दिखाने को कहा है।

भारत से पाकिस्तान की ओर जाने वाली सिंधु नदी (फोटो-PTI)

सिंधु नदी जल बंटवारा का मुद्दा एक बार फिर से सिर उठाने लगा है। पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने गुलाम कश्मीर में सिंधु नदी पर डैम बनाने के लिए सार्वजनिक कोष गठित करने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शाकिब निसार ने इस दिशा में खुद पहल करते हुए 10 लाख रुपये का चंदा दिया है। ‘इकोनोमिक टाइम्स’ के अनुसार, पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा ने भी बांध निर्माण के लिए एक महीने का वेतन देने की घोषणा की है। इसके अलावा क्रिकेटर शाहिद आफरिदी और अन्य निजी संगठनों ने भी चंदा देने की घोषणा की है। सिंधु नदी पर डैम बनाने के लिए अब तक पांच करोड़ की राशि इकट्ठा हो चुकी है। पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस निसार ने इसको लेकर चौंकाने वाली टिप्पणी भी की है। उन्होंने कहा, ‘वर्ष 1965 के युद्ध के वक्त जिस तरह का जोश और दीवानगी दिखी थी, डैम निर्माण के लिए एक बार फिर से वैसा ही जोश दिखना चाहिए।’ पाकिस्तान वर्षों से सिंधु नदी पर डैम बनाने के लिए विदेशी फंड जुटाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन भारत के दबाव के कारण कोई भी संस्था बांध निर्माण के लिए आर्थिक मदद देने को तैयार नहीं है। मालूम हो कि पाकिस्तान सिंधु नदी पर गुलाम कश्मीर के गिलगिट-बाल्टीस्तान इलाके में 4,500 मेगावाट क्षमता वाली विद्युत परियोजना लगाने की जुगत में है।

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सशस्त्र बल के अफसर दो और जवान एक दिन का देंगे वेतन: पाकिस्तान मानता है कि सिंधु नदी पर बांध बनने से बिजली तो पैदा होगी ही मौजूदा जल संकट भी समाप्त हो जाएगा। इसके लिए सशस्त्र बलों के अधिकारी दो दिन और जवान एक दिन का वेतन चंदे के तौर पर देंगे। सरकारी संस्थानों ने भी चंदा देने की घोषण की है। साथ ही विदेशों में रहने वाले पाकिस्तानियों से भी डैम निर्माण के लिए चंदा देने की अपील की गई है। पड़ोसी मुल्क ने इससे पहले विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक से पनबिजली परियोजना के लिए फंड देने की अपील की थी। दोनों संस्थाओं ने इस इलाके को विवादित बताते हुए इसके लिए आर्थिक मदद मुहैया कराने से इनकार कर दिया था। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा प्रोजेक्ट पर काम शुरू होने से पाकिस्तान में उम्मीद जगी थी, लेकिन चीन ने बिजली परियोजना की फंडिंग के लिए स्वामित्व का प्रावधान जोड़ दिया था। इस वजह से प्रोजेक्ट पर आगे काम नहीं हो सका।

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