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वीडियो: आजादी के जश्न में KG के बच्चों को पहनाया बुर्का, हाथों में दिया ‘हथियार’

इंडोनेशिया के पूर्वी जावा में एक किंडर-गार्टन (केजी) स्कूल बच्चों को बुर्का पहनाकर और उनके हाथों में एके-47 जैसी दिखने वाली नकली बंदूकें थमाकर लोगों के गुस्से का शिकार बन रहा है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें नन्हे बच्चे बुर्का पहने हुए और हाथों में बंदूक की डमी लिए सड़क पर परेड करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

Author Updated: August 20, 2018 4:01 PM
परेड के वीडियो से लिया गया स्क्रीनशॉट। (सोर्स- Twitter/@yennikwok)

इंडोनेशिया के पूर्वी जावा में एक किंडर-गार्टन (केजी) स्कूल बच्चों को बुर्का पहनाकर और उनके हाथों में एके-47 जैसी दिखने वाली नकली बंदूकें थमाकर लोगों के गुस्से का शिकार बन रहा है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें नन्हे बच्चे बुर्का पहने हुए और हाथों में बंदूक की डमी लिए सड़क पर परेड करते हुए दिखाई दे रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रोबोलिंगो में इंडोनेशियाई सैन्य आवास परिसर स्थित टीके कार्तिका स्कूल ने स्वतंत्रतता दिवस के मौके पर बच्चों की परेड निकाली थी। बीते शुक्रवार (17 अगस्त) को इंडोनेशिया ने अपने 73वां स्वतंत्रता दिवस मनाया था। बच्चों के द्वारा कराया गया इस तरह का प्रदर्शन आजादी के जश्न का हिस्सा बताया गया। बच्चों के हाथों में कार्ड-बोर्ड की बनाई गई एके-47 की तरह दिखने वाली बंदूकें थमाई गई थीं। सीएनएन इंडोनेशिया की खबर के मुताबिक अगले दिन यानी शनिवार को एक स्थानीय प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्कूल की प्रमुख यूलियाना टुंग्गा डेवी ने विवादित घटनाक्रम के लिए माफी मांगी।

डेवी ने कहा, ”हम किसी को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते हैं और न ही बच्चों में आक्रामता की किसी भावना को पैदा करने का हमारा इरादा है।” उन्होंने कहा कि बच्चों का प्रदर्शन किसी कट्टरपंथी धार्मिक समूह का समर्थन करने के इरादे से नहीं किया गया, यह केवल निर्भरता का एक प्रदर्शन था। इंडोनेशिया के शिक्षा और संस्कृति मंत्री मुहाजिर एफेंडी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्हें केजी के बच्चों के इस काम में कुछ भी गलत नहीं दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट था कि स्कूल अपने बच्चों को कट्टरपंथी बनाने का इरादा नहीं रखता था। उन्होंने कहा ”यह बस एक संयोग है, और मैं कल्पना नहीं कर सकता कि यह अमल में लाया जा सकता है।”

शिक्षा मंत्री ने रविवार को स्कूल को सौगात भी दी। उन्होंने घोषणा की कि उनका विभाग स्कूल को 25 मिलियन रुपिआह (भारत की करेंसी के हिसाब से करीब 1 लाख साढ़े 19 हजार रुपये) स्कूल को अतिरिक्त वित्त पोषण के तौर पर आवंटित करेगा। उन्होंने कहा कि यह पैसा स्कूल के परिचालन और वंचित परिवारों को उनके बच्चों को स्कूल में एनरोल करने के लिए जरूरी है। विश्लेषकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में इंडोनेशिया में धार्मिक बहुलवाद से एक बदलाव आया है, खासकर जकार्ता के पूर्व अल्पसंख्यक चीनी-ईसाई गवर्नर अहोक के कारावास के बाद, जो पिछले वर्ष ईश-निंदा के दोषी पाए गए थे।

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