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इंडोनेशिया में चार विदेशी दोषियों को मौत की सज़ा, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने की निंदा

चार लोगों को देर रात 12 बजकर 45 मिनट (अंतरराष्ट्रीय समयानुसार गुरुवार पांच बजकर 45 मिनट) पर मृत्युदंड दिया गया।
Author सिलाकाप (इंडोनेशिया) | July 30, 2016 01:08 am
मौत की सजा मिलने के बाद मृतकों को कड़ी सुरक्षा के बीच एंबुलेंस में लेकर जाते हुए। (REUTERS/Darren Whiteside)

इंडोनेशिया के फायरिंग स्क्वैड ने नशीले पदार्थ संबंधी मामलों में दोषी ठहराए गए चार लोगों को शुक्रवार (29 जुलाई) को मृत्युदंड दे दिया लेकिन एक भारतीय समेत 10 अन्य लोगों को फिलहाल मृत्युदंड नहीं दिया गया। चार दोषियों को मौत की सजा दिए जाने के कारण इंडोनेशिया की चौतरफा आलोचना हो रही है। पाकिस्तान, भारत एवं जिम्बाब्वे के साथ साथ इंडोनेशिया के नागरिकों समेत 10 अन्य लोगों को भी फायरिंग स्क्वैड का सामना करना था लेकिन उन्हें मृत्युदंड नहीं दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि उन्हें बाद में मृत्युदंड दिया जाएगा।

अधिकारियों ने इन 10 लोगों की मौत की सजा की तामील रोके जाने का कोई कारण नहीं बताया लेकिन जब अन्य लोगों को जेल में मृत्युदंड दिया जा रहा था तभी वहां एक बड़ा तूफान आ गया। फायरिंग स्क्वैड ने एक इंडोनेशियाई और तीन नाईजीरियाई लोगों को मृत्युदंड दिया। देश में पिछले साल अप्रैल से पहली बार मौत की सजा दी गई थी। प्राधिकारियों ने उस समय नशीले पदार्थ संबंधी मामलों के आठ दोषियों को मृत्यु की सजा दी थी जिनमें दो ऑस्ट्रेलियाई थे।

राष्ट्रपति जोको विडोडो ने मृत्युदंड का चलन नाटकीय रूप से बढ़ाए जाने का बचाव करते हुए कहा कि इंडोनेशिया नशीले पदार्थों के खिलाफ युद्ध लड़ रहा है और तस्करों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए। आम अपराधों के डिप्टी अटॉर्नी जनरल नूर राचमद ने कहा कि ‘जान लेने के लिए इन लोगों को मृत्युदंड नहीं दिया गया है बल्कि नशीले पदार्थों की तस्करी के नीच कृत्य एवं बुरे इरादों को रोकने के लिए ऐसा किया गया है।’ उन्होंने कहा, ‘शेष को चरणों में (मृत्युदंड) दिया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि मृत्युदंड दिए जाने का समय अभी तय नहीं किया गया है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने मृत्युदंड दिए जाने की निंदा की है। समूह के राफेंदी जामिन ने इसे ‘एक निंदनीय कृत्’’ करार दिया है। उन्होंने कहा, ‘जिन लोगों पर अभी मृत्युदंड तामील किया जाना है, उन्हें इसे देने को तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाना चाहिए। जो अन्याय पहले ही हो चुका है, उसे बदला नहीं जा सकता लेकिन अब भी उम्मीद है कि स्थिति और नहीं बिगड़ेगी।’ संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून और यूरोपीय संघ ने भी हाल में मृत्युदंड दिए जाने की निंदा की थी।

चार लोगों को देर रात 12 बजकर 45 मिनट (अंतरराष्ट्रीय समयानुसार गुरुवार पांच बजकर 45 मिनट) पर मृत्युदंड दिया गया। जिन लोगों को मृत्युदंड दिया गया है, उनमें से इंडोनेशियाई नागरिक का नाम फ्रेडी बुदीमन है और नाइजीरिया के तीन अन्य लोगों के नाम सेक ओस्मेन, हमफ्रे जेफरसन एजिके एलेवेके और माइकल टिटस इगवेह हैं। एलेवेके के वकील आफिफ अब्दुल कोयिम ने कहा कि मृत्युदंड नहीं दिया जाना चाहिए था क्योंकि उनके मुवक्किल ने इस सप्ताह एक कानूनी याचिका दायर की थी। उन्होंने कहा, ‘जब प्रक्रिया का सम्मान नहीं किया जाता, तो इसका अर्थ यह होता है कि देश कानून एवं मानवाधिकारों का पालन नहीं कर रहा।’ जिन दो लोगों के मामलों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार समूहों के बीच चिंता पैदा की थी, उन्हें मृत्युदंड नहीं दिया गया है। इनमें पाकिस्तानी जुल्फिकार अली और इंडोनेशियाई महिला मेरी उतामी शामिल है।

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