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IMF से कर्ज लेने में भारत के पड़ोसी अव्वल, जानिए कौन-कौन से देश इस फेहरिस्त में शामिल

Economic Crisis: आईएमएफ कड़ी शर्तों के साथ देशों को कर्ज देता है, ऐसे में उसकी शर्तें अक्सर विवाद का कारण बन जाती हैं।

IMF से कर्ज लेने में भारत के पड़ोसी अव्वल, जानिए कौन-कौन से देश इस फेहरिस्त में शामिल
आईएमएफ के लोगो के पास खड़ा एक शख्स (फोटो- रॉयटर्स)

Economic Crisis: पिछले दिनों, महंगाई को लेकर श्रीलंका की जनता का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने सरकार के खिलाफ विद्रोही रूख अख्तियार कर लिया। राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे अपना भवन छोड़कर देश से निकल गए और श्रीलंकाई प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति भवन पर कब्जा कर लिया था। भारी कर्ज में डूबे श्रीलंका की तरह की तरह पाकिस्तान भी कर्ज में डूबा है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से कर्ज लेने के मामले में पाकिस्तान पहले नंबर है और दूसरे स्थान पर श्रीलंका है। जबकि, भारत का एक और पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश इस सूची में तीसरे स्थान पर है। कोरोना महामारी के बाद दुनिया में आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। करीब 90 देश इस वक्त आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और देश की माली हालत सुधारने के लिए आईएमएफ के पास जा रहे हैं। इस बीच, बांग्लादेश ने आईएमएफ के पास कर्ज के लिए आवेदन भेजा है।

बांग्लादेश मौजूदा आर्थिक संकट के बीच आईएमएफ की शरण में जाने वाला तीसरा दक्षिण एशियाई देश बन गया है। बांग्लादेश के एक अखबार द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, इस देश ने तीन सालों में 4.5 बिलियन डॉलर का कर्ज मांगा है। विदेशी मुद्रा भंडार में तेजी से आई गिरावट के बाद बांग्लादेश की सरकार ने आईएमएफ से कर्ज की मांग की है। प्राकृतिक गैस समेत दूसरे आयात का बिल बढ़ने और निर्यात में गिरावट के कारण बांग्लादेश भी विदेशी मुद्रा के संकट में फंसता नजर आ रहा है।

कुछ ही देशों को कर्ज देने पर राजी हुआ IMF

आंकड़ों की बात करें तो, पाकिस्तान ने 5194 मिलियन डॉलर का कर्ज लिया है। वहीं, बांग्लादेश ने जुलाई 2022 तक विदेशी मुद्रा भंडार से 762 मिलियन डॉलर का कर्ज लिया है। इसके अलावा, अफगानिस्तान ने भी 378 मिलियन डॉलर का कर्ज लिया है। इस लिस्ट में पांचवे स्थान पर म्यांमारऔर छठे नंबर पर नेपाल हैं। आईएमएफ कड़ी शर्तों के साथ देशों को कर्ज देता है, ऐसे में उसकी शर्तें अक्सर विवाद का कारण बन जाती हैं। तमाम देश कर्ज के लिए आईएमएफ की ओर देख रहे है, लेकिन वह कुछ ही देशों को कर्ज देने पर राजी हुआ है।

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