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भारत का निर्यात बढ़ने से डरा चीनी मीडिया, लिखा- इसे नजरअंदाज किया तो परिणाम भुगतने होंगे

भारत ने जनवरी के महीने में चीन को किए जाने वाले निर्यात में 42 प्रतिशत की बढ़ोत्‍तरी दर्ज की है।

सीमा गतिरोध हाल ही में पैदा हुआ, जब बीते महीने डोकलाम में चीनी जवानों को भारत ने सड़क निर्माण करने से रोका। (संकेतात्मक तस्वीर)

भारत के हालिया निर्यात के आंकड़ों ने चीन के कान खड़े कर दिए हैं। भारत ने जनवरी के महीने में चीन को किए जाने वाले निर्यात में 42 प्रतिशत की बढ़ोत्‍तरी दर्ज की है। इसके चलते वहां के स्‍टेट मीडिया ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारत के निर्माण क्षेत्र की चुनौती को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। वाणिज्‍य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, सालाना तुलना से देखें तो जनवरी में भारत के चीन को कपास निर्यात में 52 प्रतिशत, इनऑर्गेनिक केमिकल्‍स ममें 810 प्रतिशत और आयरन व स्‍टील में 200 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हालांकि अभी भी दोनों देशों के व्‍यापार में चीन की बड़ी हिस्‍सेदारी है। जनवरी में दोनों पड़ोसियों के बीच 6.83 बिलियन डॉलर का कारोबार हुआ जिसमें भारत के निर्यात का हिस्‍सा 1.34 बिलियन डॉलर है।

चीन के ग्‍लोबल टाइम्‍स अखबार ने अपनी रिपोर्ट में चेताते हुए कहा है कि जनवरी में भारते के चीन को निर्यात में वृद्धि हुई है और इसे चीनी जानकारों ने नजरअंदाज किया। लेकिन चीन भारत की बढ़ती प्रतिस्‍पर्धा के प्रति घमंडभरा रूख जारी रखता है तो यह खतरनाक होगा। विद्वानों को बढ़ते विकास का सावधानी से अध्‍ययन करना चाहिए जिससे कि पता चल सके कि यह केवल तुक्‍का है या फिर निर्माण क्षेत्र में किए गए छोटे-छोटे बदलावों का नतीजा है। इस लेख में भारत की अक्‍टूबर से दिसंबर की तिमाही में 7 प्रतिशत की विकास दर पर संदेह जताया गया है।

इस बारे में लिखा गया है, ”भारत में निर्माण क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्‍पर्धा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। साल 2016 की तीसरी तिमाही में भारत का निर्माण क्षेत्र 8.3 प्रतिशत की दर से विकास कर रहा है और यह भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है। यदि विकास के आंकड़ें थोड़े से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए हुए हो सकते हैं जैसा कि कुछ जानकारों ने बताया है।” लेख में आगे कहा गया है कि चीन में बढ़ती मजदूरी के चलते भारत और वियतनाम जैसे देशों को फायदा हो सकता है। हालांकि भारत अभी भी विकास के शुरुआती दर्जे में हैं लेकिन उसमें निर्माण क्षेत्र का अगुवा बनने की सामर्थ्‍य है। चीन को भारत की निर्माण प्रतिस्‍पर्धा पर ध्‍यान देना चाहिए। भारत में निर्माण के क्षेत्र में ज्‍यादा विकास हुआ तो दबाव चीन पर बढ़ेगा।

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