नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या सोमवार को बढ़कर 903 हो गई जबकि 4,247 लोग अब भी लापता हैं। चीनी मीडिया की खबरों के अनुसार, इस आपदा में चीन की ओर भी 16 लोगों की मौत हुई है जबकि तिब्बत में करीब 550 लोग अब भी लापता हैं। वहीं, विदेश मंत्रालय ने रविवार को बताया कि 403 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से चीन से नेपाल में प्रवेश कर गए और 500 भारतीय अभी भी चीन में सुरक्षित हैं।
मंत्रालय ने हालांकि लापता भारतीयों के बारे में कोई अपडेट नहीं दिया। नेपाल में खोज और बचाव अभियान अभी भी जारी है। मंत्रालय ने कहा था कि 275 भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के 128 अन्य लोग जिनमें ज्यादातर कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए थे अभी भी लापता हैं।
भारत की स्पेशल फॉरेंसिक टीम ने काठमांडू में काम शुरू किया
रविवार को विदेश मंत्रालय ने अपने X हैंडल पर बचाए गए 149 लोगों की सूची साझा की। इसमें यह भी बताया गया कि भारत से 19 सदस्यीय स्पेशल फॉरेंसिक टीम ने आज काठमांडू में काम शुरू कर दिया है। यह टीम नेपाल में पीड़ितों के शवों की पहचान के लिए डीएनए सैंपल के विश्लेषण में सहायता करेगी। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने फॉरेंसिक टीम से मुलाकात की और उन्हें जानकारी दी। इसके बाद, टीम ने काठमांडू स्थित नेपाल पुलिस की केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला और त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल के फॉरेंसिक विभाग के समकक्षों के साथ चर्चा की।
विदेश मंत्रालय ने भारतीय बचाव दल के बारे में कहा, “सुरंग बचाव अभियान दल ने आज भी अपना काम जारी रखा और चिलिमे और लांगटांग में जलविद्युत स्थलों पर नेपाली सेना के अनुसंधान और बचाव प्रयासों में सहयोग किया।” बयान के मुताबिक, खराब मौसम के बावजूद टीम लांगटांग जलविद्युत परियोजना के पास एक सुरंग में प्रवेश करने और एक व्यक्ति के शव को निकालने में सफल रही। यह टीम लांगटांग जलविद्युत परियोजना के पास अपना सहायता अभियान जारी रखे हुए है।
2500 से अधिक लोग अभी भी लापता
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, 2500 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं जबकि लगभग 9500 लोगों को बचा लिया गया है। रविवार को जारी एक बयान में एनडीआरआरएमए ने चेतावनी दी कि भोटेकोशी नदी में जलस्तर फिर से बढ़ गया है। अधिकारियों के अनुसार इस आपदा के बाद नेपाल में 591 विदेशियों सहित कुल 2502 लोग लापता हैं। अधिकारियों ने बताया कि रविवार शाम तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से लगभग 9500 लोगों को बचाया गया जिनमें स्थानीय लोग और भारत, अमेरिका, चीन और रूस सहित कई देशों के पर्यटक शामिल हैं।
भारत ने 68.5 टन राहत सामग्री उपलब्ध कराई
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, भारत ने 68.5 टन राहत सामग्री उपलब्ध कराई है और खोज एवं बचाव कार्यों में सहायता के लिए तकनीकी दल, फोरेंसिक विशेषज्ञ और उपकरण भेजे हैं। भारतीय मिशन ने कहा, “राहत सामग्री से भरी चौथी उड़ान जिसमें 11 टन सामग्री थी, नेपाल पहुंच चुकी है और राहत सामग्री सौंप दी गई है। इसमें खोज और बचाव अभियान के लिए सुसज्जित एक सुरंग तकनीकी टीम, डीएनए विश्लेषण के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों की एक टीम और कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और स्वच्छता किट जैसी राहत सामग्री शामिल है।”
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के ढहने या हिमस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आई। इससे उत्तरी और मध्य नेपाल के शहरों तथा गांवों में भारी तबाही हुई। हिमालयी सीमा क्षेत्र से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी में बाढ़ का पानी आने से घर, वाहन, सड़कें और पुल बह गए तथा पनबिजली परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा।
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नेपाल में आई आपदा के छठे दिन बचावकर्मी लापता लोगों की तलाश और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने के प्रयास कर रहे हैं। इस बीच त्रिभुवन त्रिशुली सेकेंडरी स्कूल के 1600 छात्रों की जान बचाने वाले प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने 26 अगस्त की घटना को याद कर बताया कैसे मिनटों में उन्होंने स्कूल खाली करने का फैसला किया। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
