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सुषमा ने पाकिस्तान को दिखाया आईना, चीन को भी खरी-खरी

दक्षिण एशियाई क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए आतंकवाद सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है। इसे हर रूप में खत्म करने की जरूरत है। आतंकवाद विकास और समृद्धि के हमारे साझा लक्ष्यों के लिए सबसे बड़ा खतरा है। सरकारों को अपनी राष्ट्रीय जिम्मेदारी समझनी चाहिए और एक दूसरे से सहयोग करना चाहिए।

ताजिकिस्तान की राजधानी दुशाम्बे में एससीओ की बैठक में भाषण देतीं सुषमा स्वराज।

ताजिकिस्तान की राजधानी दुशाम्बे में शंघाई सहयोग सम्मेलन (एससीओ) की बैठक के दौरान भारतीय विदेश मंत्री ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को भरे मंच पर करारा जवाब दिया। इस सम्मेलन में जब विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का अपने पाकिस्तानी समकक्ष से आमना-सामना हुआ तो दोनों के बीच की तल्खी साफ नजर आई। स्वराज ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री एसएम कुरैशी को नजरअंदाज करते हुए उनकी ओर देखा तक नहीं। अपने भाषण में उन्होंने आतंकवाद के मुद्दे पर पड़ोसी मुल्क को घेरा। इस दौरान उन्होंने चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपेक) को लेकर चीन को भी कड़ा संदेश दिया। उन्होंने साफ कहा कि संपर्क परियोजनाओं के दौरान दूसरे देशों की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान की गारंटी दी जानी चाहिए।

शुक्रवार को सम्मेलन में एससीओ के सहयोगी देशों के प्रतिनिधियों की बैठक के बाद फोटो सेशन हुआ। इसमें रूस के प्रधानमंत्री दमित्री मेदवेदेव समेत चीन, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान, कजाखस्तान के भी राजनेता शामिल थे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार के मुताबिक, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज दूसरी कतार में खड़ी थीं। उन्हीं की कतार में दार्इं ओर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी भी खड़े थे। फोटो सेशन खत्म होने पर सभी लोग जाने लगे। इस दौरान पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी सुषमा स्वराज के पीछे ही थे और उन्हें देखकर मुस्कुराने लगे। लेकिन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस दौरान उन्हें देखा तक नहीं और सीधे बाहर की ओर चली गर्इं।

अपने भाषण के दौरान विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों से वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए एकजुट होने की अपील करते हुए आतंकवाद के खिलाफ लड़ने को कहा। उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा कि दक्षिण एशियाई क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए आतंकवाद सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है। इसे हर रूप में खत्म करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘आतंकवाद विकास और समृद्धि के हमारे साझा लक्ष्यों के लिए सबसे बड़ा खतरा है।’ विदेश मंत्री ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी की मौजूदगी में कहा कि चूंकि आतंकवाद पैर पसार रहा है तो सरकारों को अपनी राष्ट्रीय जिम्मेदारी समझनी चाहिए और एक दूसरे से सहयोग करना चाहिए।
चीन को आड़े हाथों लेते हुए सुषमा स्वराज ने 50 अरब डॉलर के चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपेक) के संदर्भ में कहा कि संपर्क की सभी पहलें संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान, विचार-विमर्श, सुशासन, पारदर्शिता, व्यवहारिकता और निरंतरता के सिद्धांत पर आधारित होनी चाहिए। भारत ने सीपेक परियोजनाओं का विरोध किया है और चीन के समक्ष विरोध दर्ज कराया है, क्योंकि यह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरता है जिसे भारत अपना अभिन्न अंग मानता है।

सुषमा स्वराज एससीओ के शासनाध्यक्षों की परिषद (सीएचजी) के दो दिवसीय सम्मेलन में शामिल होने के लिए पहुंची हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, उन्होंने अन्य एससीओ देशों के प्रतिनिधि प्रमुखों समेत ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन से भी मुलाकात की। इसके अलावा एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद की बैठक में सीरिया, अफगानिस्तान और कोरियाई प्रायद्वीप की स्थिति पर भी समीक्षा हुई। अपने भाषण में स्वराज ने कहा कि हम सब को वैश्वीकरण से लाभ हुआ है। हमें अपना व्यापार और निवेश सहयोग आगे बढ़ाना चाहिए। हम खुले, स्थायी अंतरराष्ट्रीय व्यापार तंत्र का समर्थन करते हैं जो विश्व व्यापार संगठन की केंद्रीयता पर आधारित हो।

पाकिस्तान पर हमला: दक्षिण एशियाई क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए आतंकवाद सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है। इसे हर रूप में खत्म करने की जरूरत है। आतंकवाद विकास और समृद्धि के हमारे साझा लक्ष्यों के लिए सबसे बड़ा खतरा है। सरकारों को अपनी राष्ट्रीय जिम्मेदारी समझनी चाहिए और एक दूसरे से सहयोग करना चाहिए।

चीन को सख्त संदेश: संपर्क परियोजनाओं के दौरान दूसरे देशों की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान की गारंटी दी जानी चाहिए। संपर्क की सभी पहलें संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान, विचार-विमर्श, सुशासन, पारदर्शिता, व्यवहारिकता और निरंतरता के सिद्धांत पर आधारित होनी चाहिए।

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