ब्रिटेन में रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन के मामले में भारतीय मर्चेंट नेवी कैप्टन अजय पंत की मुश्किलें बढ़ गई हैं। 38 वर्षीय पंत को जून में इंग्लिश चैनल में ब्रिटिश बलों द्वारा तेल टैंकर स्मिर्टोस (Smyrtos) को रोके जाने के बाद गिरफ्तार किया गया था। उन पर ऐसे प्रतिबंधित रूसी तेल या तेल उत्पादों को जहाज के जरिए किसी तीसरे देश तक पहुंचाने का आरोप है, जिसमें दोष साबित होने पर उन्हें अधिकतम 10 साल की जेल हो सकती है।

उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर निवासी अजय पंत इन आरोपों से इनकार कर रहे हैं। उनकी पत्नी रितु पंत का कहना है कि उनके पति को इस पूरे मामले में ‘बलि का बकरा’ बनाया गया है। रितु ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा, “मेरे पति को बस बलि का बकरा बना दिया गया। वह गलत जगह पर गलत समय पर थे।” पंत का ट्रायल 15 दिसंबर से शुरू होने वाला है।

ब्रिटिश कमांडो ने बीच समुद्र रोका था टैंकर

स्मिर्टोस को 14 जून को इंग्लिश चैनल में ब्रिटिश कमांडो ने रोका था। आरोप है कि यह जहाज रूस की कथित ‘घोस्ट फ्लीट’ का हिस्सा था। इस तरह के जहाजों पर रूस के खिलाफ लगाए गए तेल प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने का आरोप है।

मरीन ट्रैफिक के आंकड़ों के अनुसार, स्मिर्टोस ने 5 जून को रूस के उस्त-लुगा बंदरगाह से यात्रा शुरू की थी और मिस्र के पोर्ट सईद की ओर जा रहा था। ब्रिटिश कमांडो हेलीकॉप्टर से जहाज पर उतरे और उसे अपने नियंत्रण में लिया। उस समय ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस कार्रवाई को रूस के खिलाफ ‘झटका’ बताया था। अदालत में पेश विवरण के मुताबिक, टैंकर में करीब 98,000 टन तेल लदा हुआ था।

गिरफ्तारी के बाद पत्नी को फोन कर रो पड़े थे पंत

गिरफ्तारी के बाद से अजय पंत को जमानत नहीं मिली है और वह हिरासत में हैं। उनकी पत्नी रितु के मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद पहली बार फोन पर बात करते हुए पंत काफी परेशान थे और रो रहे थे। रितु ने बताया कि उनके पति ने फोन पर कहा, “मैं जेल में हूं, मुझे यहां से बाहर निकालो।”

पंत के वकील का तर्क है कि वह जहाज के मालिक के कर्मचारी थे और सिर्फ उन्हें दिए गए निर्देशों का पालन कर रहे थे। वहीं अभियोजन पक्ष का कहना है कि पंत जहाज के मास्टर यानी कप्तान थे और उन्हें जहाज में मौजूद माल की जानकारी थी। रितु पंत भी अपने पति के बचाव में यही तर्क देती हैं। उनके मुताबिक, “किसी भी जहाज के मास्टर की जिम्मेदारी सिर्फ यह सुनिश्चित करना है कि माल सुरक्षित तरीके से अपने गंतव्य तक पहुंच जाए।”

सिर्फ कप्तान पर ही क्यों लगा आरोप?

इस मामले का सबसे अहम सवाल यही है कि स्मिर्टोस के 25 सदस्यीय क्रू में सिर्फ अजय पंत को ही आरोपी क्यों बनाया गया, और 24 क्रू सदस्य अपने घर लौट चुके हैं। ब्रिटिश अभियोजन पक्ष का कहना है कि जहाज के मास्टर होने के कारण पंत की जिम्मेदारी अधिक थी और उन्हें कार्गो की जानकारी थी।

इसके विपरीत बचाव पक्ष का कहना है कि पंत जहाज के मालिक के कर्मचारी थे और उनका काम मालिक के निर्देशों के अनुसार जहाज का संचालन करना था। इंडियन सोसाइटी ऑफ इंटरनेशनल लॉ के अनवर सादात ने एएफपी से कहा कि यह मामला कई जटिल कानूनी सवाल खड़े करता है।

बन सकता है दूसरे समुद्री कर्मचारियों के लिए मिसाल

पंत का मामला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि माना जा रहा है कि किसी यूरोपीय देश में पहली बार इस तरह के जहाज के कप्तान पर प्रतिबंध उल्लंघन से जुड़े आरोप लगाए गए हैं, जबकि इससे पहले मुख्य रूप से जहाज या उसके मालिकों को निशाना बनाया जाता रहा है।

इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन के सीफेरर्स सेक्शन के कोऑर्डिनेटर स्टीव यांडेल ने एएफपी को बताया कि समुद्री कर्मचारी हमेशा यह नहीं जानते कि उनका जहाज प्रतिबंधित तेल ले जा रहा है या नहीं। ऐसे में वे अलग-अलग देशों के बीच चल रहे भू-राजनीतिक विवादों के बीच ‘फंस’ सकते हैं।

भारत दुनिया के बड़े समुद्री कार्यबल वाले देशों में शामिल है और उसके 3.2 लाख से अधिक सीफेरर्स हैं। ऐसे में पंत की गिरफ्तारी को भारतीय समुद्री कर्मचारियों के लिए भी चिंता का विषय माना जा रहा है।

भारत ने दी कांसुलर मदद

भारत सरकार भी अजय पंत के मामले पर नजर बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारतीय कांसुलर अधिकारियों ने हिरासत में पंत से मुलाकात कर उनकी स्थिति की जानकारी ली है।

भारतीय हाई कमीशन, लंदन ने उत्तराखंड सरकार को बताया था कि पंत को एचएमपी विनचेस्टर में न्यायिक हिरासत में रखा गया है। 19 जून को भारतीय अधिकारियों ने उनसे बात की थी। उस समय पंत ने बताया था कि उनकी तबीयत ठीक है, उन्हें मेडिकल सुविधा मिल रही है और वह अपनी पत्नी के संपर्क में हैं।

भारतीय हाई कमीशन ने ब्रिटिश अधिकारियों के सामने कांसुलर एक्सेस, पंत की सुरक्षा और उनके अधिकारों का मुद्दा भी उठाया है। अधिकारियों ने उनकी पत्नी, वकीलों और उनकी नियोक्ता कंपनी एनर्जियोस मैरीटाइम प्राइवेट लिमिटेड के संपर्क में रहने की बात कही है। कंपनी ने पंत को कानूनी सहायता देने और उनके परिवार की मदद करने का भरोसा दिया है।

मां ने सरकार से बेटे को वापस लाने की लगाई गुहार

स्मिर्टोस के बाकी अधिकांश क्रू सदस्य भारत लौट चुके हैं, जबकि जहाज इंग्लैंड के दक्षिणी तट के पास लंगर डाले हुए है। अजय पंत ही ऐसे क्रू सदस्य हैं जिन पर इस मामले में आरोप लगाए गए हैं। पंत की मां दीपा ने सरकार से भावुक अपील करते हुए अपने बेटे को वापस लाने की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि वह हाथ जोड़कर सरकार से अपने बेटे को घर वापस लाने की अपील करती हैं।

अजय पंत की पत्नी के मुताबिक, गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले ही उनके पति ने समुद्र में काम को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि “अब समुद्र बहुत मुश्किल होता जा रहा है।”

अब इस मामले में अदालत का फैसला न सिर्फ अजय पंत के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होगा, बल्कि यह भी तय कर सकता है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के उल्लंघन के मामलों में जहाज के कप्तानों और समुद्री कर्मचारियों की कानूनी जिम्मेदारी की सीमा आखिर कहां तक है।

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दीपके ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में आरोप लगाया कि CJP नेताओं को स्कूल में जाने से रोका गया और उनके साथ मारपीट की गई। उन्होंने कहा कि पार्टी बच्चों की शिक्षा और सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को लेकर आवाज उठाती रहेगी और किसी भी दबाव में पीछे नहीं हटेगी। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।