यूके की संसद में भारतीय सेना की तारीफ, सांसद बोले- इंडियन आर्मी ने कश्मीर को नहीं बनने दिया अफगानिस्तान

सितंबर 2019 के दौरान भी जम्‍मू कश्‍मीर को लेकर यूके के संसद में चिंता जाहिर की थी। ब्रिटिश सांसद बॉब ब्लैकमैन ने कहा था कि पूरा जम्मू और कश्मीर क्षेत्र संप्रभु भारत का हिस्सा था और पाकिस्तान से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) को छोड़ने का आग्रह किया था।

यूके की संसद में भारतीय सेना की तारीफ, सांसद बोले- इंडियन आर्मी ने कश्मीर को नहीं बनने दिया अफगानिस्तान (फोटो- Times now)

यूके की संसद में जम्‍मू कश्‍मीर में मानवाधिकार की स्थित को लेकर चर्चा की जा रही थी। इसी दौरान एक ब्रिटिश सांसद बॉब ब्‍लैकमैन ने भारतीय सेना की तारीफ करते हुए कहा कि उसकी वजह से जम्‍मू कश्‍मीर अफगानिस्‍तान नहीं बन पाया। उन्‍होंने भारत और पाकिस्‍तान के बीच की तनाव की वजह कश्‍मीर को लेकर बताया कि वहां किस तरह से इस्‍लामी ताकतें प्रभावी हैं। सीमा उस पार यानी पाकिस्‍तान की ओर से आतंकी हमले हो रहे हैं और उनकी ओर से भारत में वहां से ही घुसपैठ की जाती है। ऐसे में अगर भारत वहां से अपनी सेना हटा लेती है तो वहां इस्‍लामी ताकतें कश्‍मीर से लोकतंत्र खत्‍म कर देंगी। जो मानवाधिकार के लिए बिल्‍कुल सही नहीं है।

बॉब ब्लैकमैन ने कहा कि यह भारतीय सेना की वजह से है कि जम्मू-कश्मीर का क्षेत्र अभी तक तालिबान के कब्जे वाले अफगानिस्तान जैसा नहीं है। जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार की स्थिति पर एक बहस के जवाब में, यूके हाउस ऑफ कॉमन्स में बोलते हुए ब्लैकमैन ने उल्लेख किया कि, कश्मीर कई आतंकवादी हमलों, हत्याओं और कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवादियों द्वारा जबरन धर्मांतरण द्वारा “दागी” किया गया है।

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सांसद ने कहा, ”हमें याद रखना चाहिए कि कश्मीर शायद मुस्लिम (बहुल) हो सकती है, जम्मू मुख्य रूप से हिंदू है और लद्दाख मुख्य रूप से बौद्ध है। और तथ्य यह है कि ऐतिहासिक रूप से सताए गए हिंदुओं, सिखों, ईसाइयों, महिलाओं और बच्चों के धार्मिक अल्पसंख्यक दुर्भाग्य से घाटी में पीड़ित हैं।” उन्होंने कहा कि भारतीय सेनाओं ने यहां पर अच्‍छी सुरक्षा की जिम्‍मेदारी निभाई है।

उन्‍होंने कहा, हमने देखा है कि अफगानिस्तान में क्या हुआ है। अगर सैनिकों को वापस ले लिया गया था, अगर हमारे पास ऐसी स्थिति थी जहां सुरक्षा नहीं थी, तो जम्मू और कश्मीर की दुर्दशा अफगानिस्तान जैसी ही होगी।

ब्लैकमैन ने कहा, “यह केवल भारतीय सेना और भारतीय सैन्य लोकतंत्र की मजबूत नींव है जिसने तालिबान के कब्जे वाले अफगानिस्तान जैसे जम्मू और कश्मीर के क्षेत्र को रोक दिया है।” ब्लैकमैन ने अपने सहयोगियों से वास्तविकता को पहचानने के लिए कहकर अपना संबोधन समाप्त कर दिया। ब्रिटिश संसद में मानवाधिकार की स्थिति को लेकर दो ओर से पक्ष रखे गए थे। जिसके तहत सांसद ब्‍लैकमैन ने जम्‍मू कश्‍मीर को लेकर कई तर्क दिए, जिसके तहत कई नेताओं ने हामी भरी।

बता दें कि इसी तरह सितंबर 2019 के दौरान भी जम्‍मू कश्‍मीर को लेकर यूके के संसद में चिंता जाहिर की थी। ब्लैकमैन ने कहा था कि पूरा जम्मू और कश्मीर क्षेत्र संप्रभु भारत का हिस्सा था और पाकिस्तान से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) को छोड़ने का आग्रह किया था।

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