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वियतनाम के पायलट्स को सुखोई उड़ाना सिखाएगा भारत, एशिया में चीन को दी जाएगी चुनाैती

दोनों देशों ने रक्षा तकनीक में भी सहयोग बढ़ाया है, इस‍के अलावा विवादित दक्षिणी चीन सागर में संयुक्‍त रूप से तेल भी तलाश रहे हैं।

सुखोई-30 एमकेआई विमान। (FILE PHOTO)

भारत अगले साल से वियतनाम के फाइटर पायलट्स को सुखाेई-30एमकेआई उड़ाना सिखाएगा। इस संबंध में सोमवार को रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और वियतनामी रक्षा मंत्री जनरल एनगो जुआन लिच ने समझौते पर हस्‍ताक्षर किए। लिच तीन दिन के दौरे पर भारत आए हुए हैं, उनके साथ 30 सदस्‍यीय मिलिट्री प्रतिनिधिमंडल भी है। उनके एयरफोर्स और नेवी चीफ भी इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्‍सा हैं। पिछले साल सितंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वियतनाम यात्रा के दौरान दोनों देशों की द्विपक्षीय ‘रणनीतिक भागीदारी’ को और ‘बढ़ाने’ पर फैसला किया गया था। भारत पिछले तीन साल से वियतनाम के नाविकों को किलो-क्‍लास पनडुब्बियों के ऑनबोर्ड ऑपरेशंस सिखाता आ रहा है। भारत और वियतनाम, दोनों ही एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन के आक्रामक व्‍यवहार को लेकर चिंतित हैं और मिलिट्री ट्रेनिंग में धीरे-धीरे सहयोग बढ़ा रहे हैं। दोनों देशों ने रक्षा तकनीक में भी सहयोग बढ़ाया है, इस‍के अलावा विवादित दक्षिणी चीन सागर में संयुक्‍त रूप से तेल भी तलाश रहे हैं।

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टाइम्‍स ऑफ इंडिया ने सूत्रों के हवाले से लिखा है, ”दोनों देश रक्षा समझौतों पर और आगे बढ़ने जा रहे हैं। पर्रिकर ने वियतनाम में डिफेंस मैन्‍युफैक्‍चरिंग कैपासिटी बनाने में भी भागीदारी का आॅफर दिया है। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मिलने वाले जनरल लिच ने कहा कि वह चाहते हैं कि दोनों देश बहुपक्षीय मंचों जैसे एडीएमएम-प्‍लस (आसियान के रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्‍लस) पर एक-दूसरे के करीब रहकर काम करें।”

भारत और वियतनाम के रक्षा सचिव अगले साल (2017) में मिलेंगे ताकि पीएम मोदी की वियतनाम यात्रा के दौरान रक्षापंक्ति के लिए दिए गए 500 मिलियन डॉलर के कर्ज के तहत मिलिट्री प्रोजेक्‍ट्स और उपकरणों की पहचान हो सके। भारत ने अपनी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस, वरुणास्‍त्र एंटी-सबमरीन टारपीडो और अन्‍य मिलिट्री हार्डवेयर तथा सॉफ्टवेयर वियतनाम को निर्यात करने का भी प्रस्‍ताव रखा है।

वियतनामी फाइटर पायलट्स को ट्रेनिंग देने का समझौता 2013 में ही हो गया था, मगर कुछ वित्‍तीय और माल ढुलाई की दिक्‍कतों के चलते इसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका था। अगले साल से वियतनामी पायलट्स भारत आना शुरू हो जाएंगे और उन्‍हें भारतीय एयरफोर्स के सुखाई विमानों की बेसिक और एडवांस्‍ड ट्रेनिंग दी जाएगी।

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