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सरकार देगी लखवी के बेल के फैसले को चुनौती, जमानत के बावजूद रुक सकती है रिहाई

पाकिस्तान की एक अदालत ने लश्कर ए तैयबा के ऑपरेशंस कमांडर और मुंबई हमलों के मुख्य षड्यंत्रकारी जकी उर रहमान लखवी को पांच लाख रुपए के मुचलके पर गुरुवार को जमानत दे दी। उसे जमानत पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के ‘अच्छा’ और ‘बुरा’ तालिबान नाम की कोई चीज नहीं होने की बात कहने के एक […]

Author December 19, 2014 8:43 AM
लखवी को नवंबर, 2008 में मुंबई में हुए आतंकवादी हमले में आरोपित किया गया है। इस हमले में 166 लोगों की जान चली गई थी। (फोटो: रॉयटर्स)

पाकिस्तान की एक अदालत ने लश्कर ए तैयबा के ऑपरेशंस कमांडर और मुंबई हमलों के मुख्य षड्यंत्रकारी जकी उर रहमान लखवी को पांच लाख रुपए के मुचलके पर गुरुवार को जमानत दे दी। उसे जमानत पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के ‘अच्छा’ और ‘बुरा’ तालिबान नाम की कोई चीज नहीं होने की बात कहने के एक दिन बाद मिली है। लखवी ने बुधवार को ही पेशावर हमले के खिलाफ वकीलों की हड़ताल के बीच चुपचाप जमानत की अर्जी दी थी। पाकिस्तान के आंतरिक मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि सरकार लखवी की जमानत को लाहौर हाई कोर्ट में चुनौती देगी। अधिकारी ने दावा किया कि सरकार 16 एमपीओ (मेंटेनेंस आॅफ पब्लिक आर्डर) कानून के तहत जमानत मिलने के बावजूद लखवी को रिहा नहीं करेगी।

अभियोजन प्रमुख चौधरी अजहर ने बताया कि इस्लामाबाद की आतंकवाद निरोधी अदालत के न्यायाधीश कौसर अब्बास जैदी ने गुरुवार को जकी उर रहमान लखवी को जमानत दे दी। 54 वर्षीय लखवी और छह अन्य ने वकीलों की हड़ताल के बीच बुधवार को जमानत की अर्जी दी थी। वकील पेशावर के स्कूल में तालिबान हमले में 132 बच्चों सहित 148 लोगों की हत्या के विरोध में हड़ताल पर हैं।

अजहर ने कहा कि हम इस फैसले की उम्मीद नहीं कर रहे थे क्योंकि हमें मामले में बहुत से गवाह पेश करने हैं। हम फैसले पर विस्तृत टिप्पणी करने से पहले अदालत के विस्तृत आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लखवी के खिलाफ सबूत होने के बावजूद उसे जमानत मिलना आश्चर्यजनक है। उन्होंने कहा कि सुनवाई लगभग खत्म होने वाली है। ऐसे में इस्लामाबाद की आतंकवाद-निरोधी अदालत ने उसे जमानत दे दी जबकि उसके खिलाफ सबूत भी मौजूद हैं।

इस मामले की सुनवाई 2009 में शुरू हुई। उस वक्त से सात न्यायाधीश बदल चुके हैं और न्यायमूर्ति कौसर अब्बासी जैदी आठवें न्यायाधीश हैं। सुरक्षा कारणों से वे रावलपिंडी के अडियाला जेल में बंद कमरे में सुनवाई कर रहे हैं।

अजहर ने कहा कि हमने अभी तक अदालत में 46 गवाह पेश किए हैं जिन्होंने सभी सात आरोपियों… जकी उर रहमान लखवी, अब्दुल वाजिद, मजहर इकबाल, हमाद अमीन सादिक, शाहिद जमील रियाज, जमील अहमद और युनिस अंजुम के खिलाफ गवाही दी है। आने वाले दिनों में सिर्फ और 15 गवाहों को उनके खिलाफ बयान देना है और यह सुनवाई तीन से चार हफ्ते में पूरी होने वाली है। इन 46 गवाहों में संघीय जांच एजंसी, अपराध जांच विभाग, नेशनल डेटाबेस रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी के अधिकारी, सरकारी डॉक्टर और प्रशिक्षण शिविर चलाने वाले, बैंक के लेनदेन, मुंबई में हमला कर रहे 10 आंतकवादियों को फोन पर निर्देश देने वालों, आतंकवादियों के परिवहन के रूप में प्रयुक्त नौकाएं खरीदने वालों के खिलाफ गवाही देने वाले शामिल हैं। चौधरी अजहर सहित अभियोजन पक्ष के वकीलों को जमात-उद-दावा से धमकियां मिली थीं।

ऐसी ही धमकियां न्यायाधीश को भी मिलीं जिसके बाद उन्होंने सुरक्षा की मांग की। जमात उद दावा का नेतृत्व हाफिज सईद करता है, जो नवंबर 2008 में मुंबई में हुए हमलों की साजिश करने के मामले में भारत के वांछितों की सूची में शामिल है। अभियोजन पक्ष के वकीलों ने हाल ही में अदालत में अर्जी देकर मामले की सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कराने या गवाहों को अपना रिकार्ड किया हुआ बयान अदालत को सौंपने का अनुरोध किया था लेकिन अदालत ने इस अर्जी को खारिज कर दिया था।

पाकिस्तान की संघीय सरकार के आंतरिक मंत्रालय के एक प्रवक्ता अधिकारी ने बताया कि सरकार सुनवाई अदालत के फैसले के खिलाफ अपील जरूर करेगी। पहचान गुप्त रखने का अनुरोध करते हुए अधिकारी ने कहा कि मुंबई हमले के सातों आरोपियों के खिलाफ हमारा मुकदमा बहुत मजबूत है और लखवी की जमानत को हाई कोर्ट में चुनौती देंगे। अधिकारी ने दावा किया कि सरकार 16 एमपीओ (मेंटेनेंस आॅफ पब्लिक आर्डर) कानून के तहत लखवी को जमानत मिलने के बावजूद रिहा नहीं करेगी। अधिकारी ने बताया कि पहले भी ऐसे कई मामले हुए हैं, जब जमानत मिलने के बावजूद आरोपी को 16 एमपीओ कानून के तहत रिहा नहीं किया गया।

लखवी के वकील राजा रिजवान अब्बासी ने कहा कि अदालत ने जमानत दे दी क्योंकि लखवी के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं थे। उन्होंने कहा कि बचाव पक्ष जल्दी ही छह अन्य आरोपियों की भी जमानत याचिका दायर करेगा।

लखवी को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शरीफ के आतंकवाद से निपटने के लिए एक हफ्ते के भीतर राष्ट्रीय योजना पेश करने के एलान के एक दिन बाद रिहा किया गया है। शरीफ ने कहा था कि ‘इस पूरे क्षेत्र को आतंकवाद से मुक्त कराया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा था, ‘हम इस बात की घोषणा करते हैं कि ‘अच्छे’ और ‘बुरे’ तालिबान के बीच भेद नहीं होगा और आखिरी आतंकवादी का सफाया किए जाने तक हम आतंकवाद के खिलाफ जंग जारी रखने का संकल्प जताते हैं।’

मुंबई हमले के सातों संदिग्धों के खिलाफ मुकदमा काफी धीमी गति से आगे बढ़ रहा है। ऐसा बार-बार के स्थगनादेशों और विभिन्न तकनीकी विलंबों के कारण हुआ है। उस हमले में 166 लोग मारे गए थे।

 

 

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