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जी-20 के 2022 सम्मेलन की मेजबानी करेगा भारत, इटली ने दावा छोड़ा

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को इसकी मेजबानी मिलने के बाद इसके लिए इटली का आभार जताया और जी-20 समूह के नेताओं को 2022 में भारत आने का न्योता दिया। मोदी ने कहा, ‘मैं आभारी हूं और 2022 में दुनिया भर के नेतृत्व को भारत आने के लिए आमंत्रित करता हूं।’

फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को बड़ी कूटनीतिक कामयाबी मिली है। वर्ष 2022 में भारत दुनिया के 20 ताकतवर देशों के समूह जी-20 के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। उसी वर्ष भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने वाले हैं। वर्ष 2022 में इटली को जी-20 सम्मेलन की मेजबानी करनी थी। लेकिन भारत से राजनयिक वार्ता के बाद इटली अपना दावा छोड़ने को तैयार हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ट्वीट में कहा, ‘मैंने इटली से गुजारिश की थी कि वह 2021 में इस सम्मेलन की मेजबानी करे, ताकि 2022 का मौका भारत को मिले। इटली समेत दूसरे देश भी इसपर राजी हो गए।’

आर्थिक और कूटनीतिक मामलों के लिए जी-20 अहम संस्था है। यह विश्व की 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों का एक संगठन है। इसके सदस्यों में अर्जेंटीना, आस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्की, ब्रिटेन और अमेरिका हैं। जी- 20 देशों की अर्थव्यवस्था का सकल वैश्विक उत्पाद में 90 फीसद और विश्व व्यापार में 80 फीसद हिस्सेदारी है। दुनिया की दो तिहाई आबादी जी-20 देशों में रहती है। दुनिया के जमीनी क्षेत्र का करीब 50 फीसद जी-20 देशों में है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को इसकी मेजबानी मिलने के बाद इसके लिए इटली का आभार जताया और जी-20 समूह के नेताओं को 2022 में भारत आने का न्योता दिया। मोदी ने कहा, ‘मैं आभारी हूं और 2022 में दुनिया भर के नेतृत्व को भारत आने के लिए आमंत्रित करता हूं।’

प्रधानमंत्री ने ब्यूनस आयर्स में शनिवार को जी-20 सम्मेलन के दौरान वैश्विक नेताओं की बैठक में इस बाबत एलान भी किया। उन्होंने अपनी घोषणा के बाद ट्वीट किया, ‘वर्ष 2022 में भारत की आजादी के 75 साल पूरे हो रहे हैं। उस विशेष वर्ष में, भारत जी-20 शिखर सम्मेलन में विश्व का स्वागत करने की आशा करता है। विश्व की सबसे तेजी से उभरती सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत में आइए। भारत के समृद्ध इतिहास और विविधता को जानिए और भारत के गर्मजोशी भरे आतिथ्य का अनुभव लीजिए।’ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि समूह ने 10 साल पूरे कर लिए हैं। उन्होंने 2008 के आर्थिक संकट के दौरान इस समूह के सदस्यों के बीच सहयोग का जिक्र किया, जिसकी वजह से अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाया जा सका। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने मेजबानी के बारे में प्रधानमंत्री के ट्वीट का हवाला देते हुए ब्यूनस आयर्स में उनके संबोधन की जानकारी दी।

प्रधानमंत्री ने सम्मेलन में शामिल प्रतिनिधियों के सामने वैश्विक अर्थव्यवस्था के समक्ष मौजूदा चुनौतियों को भी उठाया। विशेषरूप से उन्होंने उभरती अर्थव्यवस्थाओं के समक्ष आने वाले मुद्दों का जिक्र किया। इसके अलावा मोदी ने विकसित अर्थव्यवस्थाओं की मौद्रिक नीतियों की वजह से पैदा होने वाले वित्तीय जोखिमों पर अपनी बात रखी। प्रधानमंत्री ने कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता पर जोर देते हुए कहा कि इसमें किसी तरह की अस्थिरता से काफी दबाव बनता है। विशेष रूप से घरेलू अर्थव्यवस्थाओं पर असर होता है। कीमतों में उतार-चढ़ाव के हिसाब से अपनी नीतियां बनानी पड़ती हैं। मोदी ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में सुधारों के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि डब्लूटीओ में सुधार काफी महत्वपूर्ण हैं। यह सिर्फ महत्वपूर्ण ही नहीं हैं, बल्कि व्यापार और सेवाओं पर वार्ता, कृषि क्षेत्र में वैश्विक मूल्य श्रृंखला को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी भी है।

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