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कुलभूषण जाधव मामले को अंतरराष्ट्रीय अदालत ले जाने की तैयारी में भारत

पाकिस्तान की सैन्य अदालत द्वारा कुलभूषण जाधव को सजा सुनाए जाने के मामले में भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय अदालत का दरवाजा खटखटाने का विकल्प टटोल रही है।

Author नई दिल्ली | April 11, 2017 12:28 PM
भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव

 दीपक रस्तोगी  

पाकिस्तान की सैन्य अदालत द्वारा कुलभूषण जाधव को सजा सुनाए जाने के मामले में भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय अदालत का दरवाजा खटखटाने का विकल्प टटोल रही है। वियना सम्मेलन समझौते के उल्लंघन का हवाला देकर पाकिस्तान को कठघरे में खड़ा किया जाएगा। वियना सम्मेलन के प्रावधानों के अनुसार, किसी देश का जासूस कहीं पकड़ा जाता है तो उसके मुकदमे की सुनवाई के लिए उसके देश को वकील उपलब्ध कराने की इजाजत होनी चाहिए। पाकिस्तान ने कुलभूषण के मामले में वकील उपलब्ध कराने या उससे मुलाकात करने की इजाजत भारतीय अधिकारियों को नहीं दी थी।  कुलभूषण को सजा सुनाए जाने की खबर आने के साथ ही विदेश मंत्रालय, सेना और खुफिया विभाग के अधिकारी सक्रिय हो गए हैं। एक ओर, राजनयिक चैनल के जरिए पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ में बात रखने की तैयारी की जा रही है। दूसरी ओर, सेना और खुफिया विभाग ‘कई और विकल्पों’ को लेकर सक्रिय हो रहे हैं। भारतीय नौसेना के पूर्व अफसर कुलभूषण जाधव को भारतीय खुफिया एजंसी रॉ का एजंट बताते हुए उसे विध्वंसक साजिश रचने का आरोप लगा कर पाकिस्तानी अदालत ने सजा सुनाई है।

भारत और पाकिस्तान- दोनों ही देशों के नागरिक कानून जासूसी के मामले में कई स्तर पर खामोश हैं। वियना सम्मेलन की धारा 36(1) की उपधारा (बी) के अनुसार, जासूसी या आतंकवादी गतिविधियों का आरोपी जिस देश का नागरिक हो, उसके लिए वकील वही देश मुहैया कराएगा। साथ ही, आरोपी से मिलने की पूरी छूट होगी। भारत ने कुलभूषण को अपना नागरिक मान लिया था, इस नाते विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने 11 बाद पाकिस्तानी शासन को ‘परामर्शदाता अधिकारी’ मुहैया कराने और उसके साथ मुलाकात करने का आवेदन भेजा। पाकिस्तान-अफगानिस्तान-ईरान डेस्क के प्रभारी रहे वरिष्ठ नौकरशाह और पूर्व आईएफएस अधिकारी विवेक काटजू ने ‘जनसत्ता’ से कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से गिरफ्तारी की जानकारी देनी होगी। साथ ही, आरोपी नागरिक तो तीन सहूलियतें देनी जरूरी हैं- 1.परामर्शदाता अधिकारी को अधिकार होगा कि उसके नागरिक को जिस मुल्क ने पकड़ा है, वहां के लोगों से वह खुल कर बातचीत करे। 2. जब भी आरोपी चाहे, उसे परामर्शदाता अधिकारी से मिलने की इजाजत होगी और 3. परामर्शदाता अधिकारी उससे जब चाहे मिल सकता है और कानूनी प्रतिनिधि नियुक्त कर सकता है।’

पाकिस्तान ने इस धारा के तहत गिरफ्तारी की जानकारी तो दे दी। लेकिन उप धारा (बी और सी) का पालन नहीं किया। परामर्शदाता के साथ जाधव का संपर्क कराने की भारत की अपीलें ठुकरा दी। विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी में रिसर्च फेलो यशस्विनी मित्तल के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में यह स्थिति भारत के पक्ष में है।
अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जासूसी और आतंकवाद को अलग-अलग किस्म का अपराध माना जा गया है। जासूसी को शांति काल का अपराध माना गया है और संयुक्त राष्ट्र के दो प्रस्ताव (49-60 और 51-210) कहते हैं कि उस व्यक्ति के नागरिक अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता। कोई देश उसे अपना नागरिक स्वीकार कर ले तो उसके खिलाफ कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत करनी होगी। जबकि, आतंकवाद को युद्ध का अपराध माना गया है।

 

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