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भारत चाहता है कि वह दुनिया की सबसे खूबसूरत महिला बने जिसे सब अपना बनाना चाहें: चीनी मीडिया

चीन की सरकारी मीडिया ने अमेरिका के साथ साजो सामान विनिमय के समझौते पर हस्ताक्षर करने के भारत के निर्णय पर कटाक्ष किया है। चीनी अखबार ग्‍लोबल टाइम्‍स ने लिखा कि दोनों देशों के बीच अविश्वास के कारण प्रस्तावित समझौता रूका हुआ है।
Author बीजिंग | April 18, 2016 15:22 pm
यह लेख ग्‍लोबल टाइम्‍स्‍ के संपादकीय पेज पर छपा है।

चीन की सरकारी मीडिया ने अमेरिका के साथ साजो सामान विनिमय के समझौते पर हस्ताक्षर करने के भारत के निर्णय पर कटाक्ष किया है। चीनी अखबार ग्‍लोबल टाइम्‍स ने लिखा कि दोनों देशों के बीच अविश्वास के कारण प्रस्तावित समझौता रूका हुआ है। क्योंकि भारत ‘सबसे खूबसूरत महिला’ बनना चाहता है जिसे सभी खासकर अमेरिका और चीन अपनी ओर लुभाएं।

भारत के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने चीनी अधिकारियों के साथ वार्ता के लिए चीन की अपनी पहली यात्रा शुरू की है। ऐसे में सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स ने एक लेख में कहा, ‘उनके पारंपरिक अविश्वास के बावजूद भारत अमेरिका के गठबंधन की अटकलें लगाना महाशक्यिों के बीच झूलने वाले देश की भूमिका निभाने की भारत की महत्वाकांक्षा को स्पष्ट रूप से कम करके आंकना है। ‘एलएसए हस्ताक्षर को रोक रहा भारत-अमेरिका का रणनीतिक अविश्वास’ शीर्षक के लेख में कहा गया है, ‘मूल बात यह है कि भारत सबसे खूबसूत महिला बने रहना चाहता है जिसे सभी पुरूष, खासकर दो सबसे मजबूत देश यानी अमेरिका और चीन लुभाएं।’

उसने कहा, ‘यह भारत के लिए यह कोई नई भूमिका नहीं है। हम अब भी याद कर सकते है कि अपनी कूटनीतिक चतुराई के कारण किस प्रकार उसने शीत युद्ध के दौरान दो प्रतिद्वंदी धड़ों के बीच विशेष भूमिका हासिल की थी।’ अमेरिका के रक्षा मंत्री एश्टन कार्टर ने पिछले सप्ताह भारत की तीन दिवसीय यात्रा में घोषणा की थी कि वह और उनके भारतीय समकक्ष ने इस मामले में सैद्धांतिक सहमति जताई है कि लॉजिस्टिक सपोर्ट समझौते (एलएसए) संबंधी सभी मसलों को सुलझा लिया गया है।

समाचार पत्र ने एलएसए पर हस्ताक्षर करने के भारत के निर्णय को रेखांकित करते हुए कहा कि साजो सामान के विनिमय संबंधी समझौते ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया में ये अटकलें शुरू कर दी हैं कि दोनों पक्ष चीन को नियंत्रित करने के लिए एक ही नौका में सवार हैं। उसने कहा कि एलएसए का मकसद ईंधन भरने और मरम्मत करने समेत साजो सामान संबंधी कार्यों के लिए सैन्य अड्डों को साझा करना है। इसलिए यह एक्वीजिशन एंड क्रॉस सर्विसिंग एग्रीमेंट (एसीएसए) के बहुत मिलता जुलता है। अमेरिका ने अपने कई नाटो सहयोगियों के साथ यह समझौता किया है।

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  1. Krishna Singh Rajput
    Apr 19, 2016 at 8:59 am
    एक सीता के एवं एक द्रौपदी के कारण पूरा रामायण और महाभारत के योद्धा का सर्वनाश हो गया। चीन और अमेरिका का भी भारत के चक्कर में यही बात होगी।
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