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भारत-अमेरिका ने दी पाकिस्तान को चेतावनी- ऐसा नहीं करेंगे बर्दाश्त

भारत और अमेरिका के विदेश मंत्रियों की बातचीत के दौरान एच1बी वीजा, अफगानिस्तान में हालात, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत-अमेरिका गठजोड़ और उत्तर कोरिया सहित कई मुद्दों पर चर्चा की गई।

Author नई दिल्ली | Updated: October 25, 2017 8:41 PM
सुषमा स्वराज और रेक्स टिलरसन के बीच हुई समग्र बातचीत के बाद दोनों देशों ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया।

भारत और अमेरिका ने बुधवार को पाकिस्तान को चेतावनी दी कि आतंकवाद की पनाहगाहों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और वह अपनी सरजमीं पर मौजूद आतंकी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करे। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और उनके अमेरिकी समकक्ष रेक्स टिलरसन के बीच हुई समग्र बातचीत के बाद दोनों देशों ने पाकिस्तान को यह कड़ा संदेश दिया। दोनों विदेश मंत्रियों की बातचीत के दौरान एच1बी वीजा, अफगानिस्तान में हालात, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत-अमेरिका गठजोड़ और उत्तर कोरिया सहित कई मुद्दों पर चर्चा की गई।

सुषमा के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए टिलरसन ने कहा, ‘‘आतंकवाद की पनाहगाह बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।’’ भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया के एक लिए एक बड़ा खतरा बन चुके आतंकवाद पर टिलरसन के साथ विस्तृत चर्चा हुई। सुषमा ने कहा कि भारत ने अफगानिस्तान में होने आतंकी हमले की घटनाएं बढ़ने को लेकर चिंता जताई और कहा कि ये हमले दर्शाते हैं कि वहां ऐसे तत्व हैं जो आतंकवादियों की मदद कर रहे हैं और उनको पनाहगाह मुहैया करा रहे हैं।

उनके मुताबिक टिलरसन ने सहमति जताई कि भारत और अमेरिका को यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी देश आतंकवादियों को पनाहगाह मुहैया नहीं कराए और अगर कोई देश आतंवाद का सहयोग करता है या उसका इस्तेमाल करता है तो उसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने इस बात पर भी सहमति जताई कि पाकिस्तान को आतंकवाद की पनाहगाहों को खत्म करने के लिए तत्काल कदम उठाना चाहिए।”

उन्होंने यह भी कहा कि हमारा मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की नई रणनीति (दक्षिण एशिया के लिए) तभी सफल हो सकती है जब पाकिस्तान बिना किसी भेदभाव के सभी आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करे। सुषमा और टिलरसन के बीच वार्ता में अमेरिका की ओर से दक्षिण एशिया एवं अफगानिस्तान में सुरक्षा हालात को लेकर घोषित नई रणनीति का पूरा असर दिखा। अपनी नई रणनीति में ट्रंप प्रशासन ने क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे में भारत की भूमिका बढ़ने की पैरवी की है।

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