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लीगो ऑब्जर्वेटरी की स्थापना को भारत-अमेरिका ने सहमति पत्र पर किये हस्ताक्षर

भारत में ‘लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल वेब आब्जर्वेटरी’ (लीगो) स्थापित करने के लिए भारत और अमेरिका ने एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये जो भूगर्भीय तरंग खगोल विज्ञान के विभिन्न पहलुओं पर अग्रिम अनुसंधान को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

Author वॉशिंगटन | April 1, 2016 5:55 AM
(Photo Agency)

भारत में ‘लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल वेब आब्जर्वेटरी’ (लीगो) स्थापित करने के लिए भारत और अमेरिका ने एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये जो भूगर्भीय तरंग खगोल विज्ञान के विभिन्न पहलुओं पर अग्रिम अनुसंधान को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

यह एमओयू केंद्रीय कैबिनेट द्वारा लंबे समय से प्रतीक्षित तीसरे लीगो इंटरफेरोमीटर निर्माण को मंजूरी दिये जाने के करीब एक महीने बाद हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लीगो वैज्ञानिकों की यहां मौजूदगी में परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव शेखर बसु और अमेरिका के नेशनल साइंस फाउंडेशन (एनएसएफ) निदेशक फ्रांस काडरेवा ने एमओयू पर हस्ताक्षर किये।

लंबे समय से प्रतीक्षित तीसरे लीगो इंटरफेरोमीटर के निर्माण से गुरूत्वाकषर्ण तरंगों के स्रोतों का सटीक पता लगाने और संकेतों के विश्लेषण करने के वैज्ञानिकों की क्षमता में महत्वपूर्ण सुधार होगा। उम्मीद है कि ये 2023 तक काम करने लगेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय परमाणु सुरक्षा सम्मेलन (एनएसएस) में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका में हैं।

मोदी ने लीगो से जुड़े वैज्ञानिकों से मुलाकात की जिन्होंने हाल में गुरूत्वाकषर्ण तरंग सिद्धांत सिद्ध किया। मोदी ने इसके साथ उन भारतीय छात्र वैज्ञानिकों से भी बातचीत की जो लीगो परियोजना का हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री मोदी परमाणु सुरक्षा सम्मेलन में हिस्सा लेने यहां आए हैं जिसमें करीब 50 देशों के शीर्ष नेता परमाणु हथियारों और सामग्री के खतरे के आकलन और इस बारे में विचार साझा करेंगे।

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय कैबिनेट ने पिछले महीने भारत में तीसरे लीगो इंटरफेरोमीटर निर्माण को मंजूरी प्रदान की थी। इस परियोजना से वैज्ञानिकों एवं इंजीनियरों को भूगर्भीय तरंग के क्षेत्र में गहराई से शोध करने का अवसर मिल सकेगा और खगोल विज्ञान के नये आयाम के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

अमेरिका में दो लीगो वेधशालाएं हैं जो हैनफोर्ड, वाशिंगटन और लिविंग्सटन, लूसियाना में हैं। इनकी स्थापना अमेरिकी नेशनल साइंस फाउंडेशन ने की है। इसकी कल्पना, निर्माण एवं संचालन कैल्टेक एवं एमआईटी द्वारा किया जाता है। एक प्रेस बयान में कहा गया है कि लीगो भारतीय अनुसंधानकर्ताओं को पुर्जे और प्रशिक्षण मुहैया कराएगा ताकि वे एक नया उन्नत लीगो डिटेक्टर का निर्माण एवं उसका संचालन कर सकें, जिसका बाद में संचालन भारतीय टीम द्वारा किया जाएगा।

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