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रक्षा संबंध बढ़ाएंगे भारत और अमेरिका

भारत और अमेरिका ने सह-निर्माण वाले उद्यमों में तेजी लाने पर सहमति जताते हुए अपने रक्षा एवं रणनीतिक संबंधों को मजबूत किया है।
Author वाशिंगटन | December 12, 2015 00:36 am

भारत और अमेरिका ने सह-निर्माण वाले उद्यमों में तेजी लाने पर सहमति जताते हुए अपने रक्षा एवं रणनीतिक संबंधों को मजबूत किया है। दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच हुई व्यापक बातचीत में क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा के मुद्दों के साथ-साथ आतंकवाद के बढ़ते प्रकोप पर भी चर्चा हुई।
रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर और उनके अमेरिकी समकक्ष एश्टन कार्टर ने कल डेढ़ घंटे तक बंद कमरे में चर्चा की। इस दौरान दोनों नेताओं ने सशस्त्र बलों के बीच सहयोग की समीक्षा की, जो कि पहले से मजबूत हुआ है।’’
पर्रीकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच एक रणनीतिक साझेदारी है जो उनके साझा मूल्यों और हितों को दर्शाती है। रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग इस साझेदारी का एक महत्वपूर्ण घटक है।
भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को वैश्विक सुरक्षा का एक सहयोगी बताते हुए कार्टर ने कहा कि ओबामा प्रशासन इस संबंध को और अधिक मजबूत करने के लिए तैयार है।
भारतीय रक्षा मंत्री के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कार्टर ने संवाददाताओं को बताया, ‘भारत-एशिया-प्रशांत अमेरिका के भविष्य के लिए दुनिया के सबसे प्रभावशाली हिस्सों में से एक है। इस क्षेत्र में सुरक्षा सहयोगी के रूप में भारत के उदय का हम स्वागत करते हैं। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जहां आधी आबादी रहती है और दुनिया की आधी आर्थिक गतिविधियां यहां होती हैं।’
कार्टर ने पर्रीकर को बताया कि अमेरिका ने गैस-टरबाइन इंजन तकनीक हस्तांतरण पर अपनी नीति में बदलाव किए हैं ताकि संवेदनशील जेट इंजन के घटकों के निर्माण एवं डिजाइन में सहयोग बढ़ाया जा सके। कार्टर ने भरोसा जताते हुए कहा कि नीति अद्यतन के परिणामस्वरूप अमेरिका संवदेनशील जेट इंजन के हिस्सों के निर्माण एवं डिजाइन में सहयोग बढ़ाने में सक्षम होगा।
पेंटागन में कल दोनों देशों के नेताओं की बैठक के बाद जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया कि कार्टर और पर्रीकर आशा करते हैं कि अपने भारतीय समकक्षों के साथ काम कर रहीं अमेरिकी कंपनियां हस्तांतरण अनुरोध भेजेंगी, जिन्हें इस अद्यतन नीति से लाभ होगा। इस बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने महत्वाकांक्षी रक्षा प्रौद्योगिकी एवं व्यापार पहल : डीटीटीआई: को आगे बढाने के तरीकों और साधनों पर चर्चा की ।
संयुक्त बयान में डीटीटीआई में अब तक हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए दोनों ने डीटीटीआई के परिर्वतनकारी मकसद को पूरा करने वाली उच्च प्रौद्योगिकी सामग्रियों के संभावित सह निर्माण और सह विकास के लिए अतिरिक्त परियोजनाओं को चिन्हित करने के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की। पिछले छह माह से भी कम समय के भीतर यह दोनों नेताओं के बीच की तीसरी बैठक थी। गुरुवार को दोनों नेता नौ घंटे तक एक दूसरे के साथ रहे। इस दौरान उन्होंने चार घंटे परमाणु क्षमता से संपन्न विमान वाहक पोत यूएसएस आइजेनहावर पर बिताए।
कार्टर ने कहा, ‘‘हमारी आज की बैठकों और आने वाले दिनों में विस्तृत सहयोग के जरिए, भारत और अमेरिका की रक्षा साझेदारी वैश्विक सुरक्षा का एक आधार बनेगी क्योंकि एक साथ मिलकर हम एक साझा भविष्य की दिशा में, भारत और अमेरिका के तय साझा भविष्य की दिशा में, काम करते हैं।’
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा, ‘यह एक ऐसा संबंध है, जो कि भारत-एशिया-प्रशांत सुरक्षा के ढांचे को मजबूत करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होगा ताकि किसी का भी वहां पर उत्थान और समृद्धि हो सके।’’
कार्टर ने कहा कि उन्होंने और पर्रीकर ने जेट इंजनों और विमान वाहकों के डिजाइन एवं निर्माण पर सहयोग की दिशा में हुई प्रगति पर चर्चा की। इसके साथ ही उन्होंने हित से जुड़ी अतिरिक्त परियोजनाओं पर भी चर्चा की, जो कि प्रधानमंत्री की ‘मेक इन इंडिया’ नीति को भी आगे बढ़ाएंगी। पर्रीकर ने कहा कि उनकी इच्छा डीटीटीआई की रूपरेखा के तहत उच्च स्तरीय तकनीकों में और अधिक सहयोग की है।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘मुझे भरोसा दिलाया गया है और मुझे भरोसा है कि भारत को एक ऐसे स्तर पर रखा गया है जिससे लालफीताशाही को हटाया जाना सुनिश्चित होगा। हमसे एक बहुत स्पष्ट वादा किया गया है और हम यह अनुभव कर रहे हैं कि हमारे मामलों पर तेजी से काम हो रहा है।’’
पर्रीकर ने कहा कि लड़ाकू विमानों के लिए भारत में निर्माण आधार स्थापित करने में कुछ अमेरिकी कंपनियों ने रुचि दिखाई है जिसके लिए भारत ने पेंटागन से पूछा है कि क्या उनकी ओर से हरी झंडी के लिए कोई अग्रिम प्रक्रिया प्रणाली है।
पर्रीकर ने कहा, ‘वे (अमेरिका) इस पर बेहद सकारात्मक हैंं।’ उन्होंने बताया कि बोइंग और लॉकहीड जैसी कंपनियों से मिलने वाले इस प्रकार के सभी प्रस्तावों की पूर्व-स्वीकृति पर विचार किए जाने की ओर अमेरिका ने इशारा किया है। डीटीटीआई के तहत सहयोग के लिए 17 नए विचारों पर चर्चा की जा रही है। उन्होंने कहा ,‘ हमने अनुसंधान और विकास की दिशा में सहयोग के लिए कई नए क्षेत्र चिन्हित किए हैं और दोनों पक्ष डीटीटीआई के मकसद को पूरा करने वाले संभावित सह विकास एवं सह निर्माण के लिए अतिरिक्त परियोजना की तलाश में विचारों का आदान-प्रदान जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’’

 

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