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दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी आर्मको में हिस्सा खरीदेगा भारत, प्रस्तावित मेगा रिफाइनरी के लिए कच्चा तेल खरीदने की योजना

सऊदी आर्मको अगले साल दुनिया का सबसे बड़ा आईपीओ लाने जा रही है। कंपनी दुनिया के टॉप शेयर बाजार में अपने 5 प्रतिशत शेयर को बेचेगी।

सऊदी अरब के सुल्तान सलमान के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Photo- Reuters)

सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी आर्मको में भारत हिस्सेदारी खरीदने की योजना बना रहा है। सऊदी तेल कंपनी आर्मको अगले साल मार्केट में अपने शेयर बेचने जा रही है। भारत सरकार सऊदी अरब के साथ रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए इस कंपनी में अहम हिस्सेदारी खरीदना चाहता है। समाचार एजेंसी रायटर के मुताबिक पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि भारत की सरकारी तेल कंपनियां चाहती हैं कि सऊदी आर्मको के साथ मिलकर एक ज्वाइंट वेंचर तेल रिफाइनरी खोली जाए, इसी रणनीति के तहत सरकारी तेल कंपनियां सऊदी आर्मको में निवेश करना चाहती हैं। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा, ‘मैं चाहता हूं कि आर्मको लंबे समय के लिए हमारा सप्लायर बनें, हमने इस बारे में सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री खालिद अल फलिह से चर्चा की थी। आर्मको ने इस ज्वाइंट वेंचर के लिए रूचि दिखाई है।

धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि भारत की तीन सरकारी तेल कंपनियां पश्चिमी समुद्री तट पर एक मेगा रिफाइनरी स्थापित करने की योजना बना रही है। 6 करोड टन सालाना क्षमता वाले इस रिफाइनरी के लिए एक कच्चे तेल के एक बड़े सप्लायर की तलाश है और सऊदी आर्मको इसके लिए सही साझेदार है। बता दें कि सऊदी आर्मको अगले साल दुनिया का सबसे बड़ा आईपीओ लाने जा रही है। कंपनी दुनिया के टॉप शेयर बाजार में अपने 5 प्रतिशत शेयर को बेचेगी। लेकिन इस पांच प्रतिशत शेयर का मूल्य दुनिया के कई देशों के जीडीपी से ज्यादा है। 5 प्रतिशत शेयर बेचने पर सऊदी आर्मको को 100 अरब डॉलर यानी कि लगभग 6.70 लाख करोड़ रुपये हासिल होगी। इसके साथ ही कंपनी का वैल्यू 2 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगी।

बता दें कि पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ अपने संबंधों को मज़बूत करने के फिराक में लगा रहता है। पाकिस्तान की मंशा सऊदी अरब के जरिये भारत पर दबाव बनाने की रहती है। लेकिन भारत सऊदी अरब के साथ व्यापारिक रिश्तों को मज़बूत कर पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देना चाहता है। सूत्रों के मुताबिक सऊदी आर्मको ने कच्चे तेल के अपने दो बड़े आयातकों चीन और भारत को इस कंपनी में अहम हिस्सेदारी देना चाहता है। केन्द्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि ये बेहतरीन विचार है और हमलोग इसका अध्ययन करेंगे। बता दें कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल खर्च करने वाला देश है। भारत अपनी तेल ज़रूरतों का 86 फीसदी हिस्सा ओपेक देशों से आयात करता है।

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