भारत ने होर्मुज में भारतीय नाविकों पर हुए हमले को लेकर ईरान के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इस मामले में विदेश मंत्रालय (MEA) ने ईरान के मिशन उप प्रमुख (Deputy Chief of Mission) को तलब किया है।
आपको बता दें कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में क्रूज मिसाइलों के जरिये ईरान ने यूएई के दो तेल टैंकरों पर हमला किया। हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई और आठ अन्य लोग घायल हो गए।
ईरान के हमले के बाद यूएई के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी किया। बयान के मुताबिक, दो तेल टैंकरों- मोम्बासा और अल बहियाह पर उस समय हमला हुआ जब वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे थे। ये हमले ओमान की समुद्री सीमा के भीतर हुए।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि मारा गया भारतीय नागरिक मोम्बासा पर तैनात था। घायल हुए आठ लोगों में से चार गंभीर रूप से घायल हैं। इनमें से छह भारतीय और दो यूक्रेनी नागरिक हैं।
अमेरिका-ईरान के बीच संघर्ष तेज
6-7 जुलाई को युद्धविराम समाप्त होने के बाद पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष और तेज हो गया। इस दौरान ईरान ने कथित तौर पर तीन तेल टैंकरों को निशाना बनाया।
ईरान का दावा है कि जिन जहाजों को निशाना बनाया गया, उन्होंने तेहरान द्वारा अधिकृत (अधिकृत) समुद्री मार्गों का इस्तेमाल करने की बार-बार दी गई चेतावनियों को नजरअंदाज किया था।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने आरोप लगाया कि ये जहाज निर्धारित नौवहन मार्गों (Shipping Lanes) से हटकर चल रहे थे और उन्होंने अपने नेविगेशन सिस्टम (Navigation System) भी बंद कर रखे थे।
केवल ईरान और उससे व्यापार करने वालों पर नाकेबंदी
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि होर्मुज़ जलमार्ग (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले सभी माल पर अमेरिका 20 प्रतिशत शुल्क वसूलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी फिर से लागू करेगी। ट्रंप ने कहा कि यह नाकेबंदी सिर्फ ईरान और उन देशों या कंपनियों पर लागू होगी जो ईरान के साथ व्यापार कर रही हैं। अन्य देशों के जहाज पहले की तरह इस समुद्री मार्ग से गुजर सकेंगे।
उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान की नौसेना, वायुसेना, मिसाइल और ड्रोन क्षमता को काफी हद तक कमजोर कर दिया है और जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
