स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज को खोलने को लेकर 60 से ज्यादा देशों ने एक अहम बैठक की। भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इस बैठक में हिस्सा लिया। इस मीटिंग की अगुवाई ब्रिटेन ने की।
बैठक के दौरान स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज को तुरंत प्रभाव से खोलने पर चर्चा हुई। सभी देशों ने इसे जल्द से जल्द खोलने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही, ‘फ्रीडम ऑफ नेविगेशन’ को बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया गया। जारी बयान में कहा गया कि ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज को बंद करना वैश्विक समृद्धि के लिए बड़ा खतरा है।
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को हुई यह बैठक इस दिशा में एक पहला अहम कदम मानी जा रही है। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी अपने बयान में कहा कि विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बैठक में भारत का रुख स्पष्ट किया। बैठक में भारत ने फ्रीडम ऑफ नेविगेशन पर जोर दिया और इस मुद्दे पर अपनी चिंता भी जताई। विक्रम मिस्री ने कहा कि इस स्थिति का भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर गहरा असर पड़ रहा है।
भारत ने बैठक में क्या कहा?
अपने बयान में उन्होंने यह भी चिंता जताई कि इस संघर्ष के चलते भारतीय नाविकों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी है। जानकारी के मुताबिक, फिलहाल 18 भारतीय जहाज जिनमें 485 से ज्यादा भारतीय नाविक सवार हैं गल्फ क्षेत्र में फंसे हुए हैं। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह इस संकट का समाधान कूटनीतिक तरीके से चाहता है और जल्द से जल्द स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज को खोले जाने की मांग करता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ क्या है और कहां है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग रूट में से एक है और यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग (oil transit choke point) है।
यह समुद्री रास्ता ईरान के उत्तर में और ओमान तथा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दक्षिण में स्थित है। इसके प्रवेश और निकास पर चौड़ाई लगभग 50 किमी (31 मील) है और सबसे संकरे हिस्से में करीब 33 किमी रह जाती है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। यह रास्ता खाड़ी क्षेत्र से दुनिया के बाकी हिस्सों तक तेल और गैस की आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है।
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